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सरोजनीनगर में भाजपा कार्यशाला का आयोजन: लिया गया भाजपा को विश्व का सबसे मजबूत संगठन बनाने का संकल्प

  • मंडल स्तरीय कार्यशाला में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ हर व्यक्ति भाजपा से जुड़ना चाहता है
  • उन्होंने कहा- बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ नरसंहार पर विपक्षी पार्टियों ने एक शब्द नहीं बोला
  • देश को खोखला करने वाली तुष्टिकरण और जातिवादी राजनीति के खिलाफ मजबूती से खड़ा है भाजपा का हर सिपाही
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने योगी के बयान का किया समर्थन, कहा आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए भाजपा संगठन को अभेद, अजेय बनाना जरुरी
  • जितना मजबूत होगा भाजपा संगठन, उतना ही मजबूत होगा देश
  • ⁠सदस्यता अभियान में सरोजनीनगर निभाएगा अग्रणी भूमिका

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी द्वारा संचालित सदस्यता अभियान-2024 के अंतर्गत मंगलवार को सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के सरोजनीनगर दक्षिण प्रथम की मंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन क्वीन पैलेस हिंद नगर में किया गया। विधायक राजेश्वर सिंह ने सदस्यता अभियान कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा सदस्यों के आधार पर भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, जितना भाजपा संगठन मजबूत होगा उतना ही देश भी मजबूत होगा, इसलिए सदस्यता अभियान को सफल बनाना भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य और देश के प्रति सभी कार्यकर्ताओं की अहम जिम्मेदारी है।

विधायक ने कार्यकार्ताओं में जोश का संचार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की कविता पढ़ी, जहाँ कण कण में शंकर और बिंदु बिंदु में गंगाजल है, हम जियेंगे तो इसी के लिए मरेंगे तो इसी के लिए। विधायक ने आगे जोड़ा लखनऊ अटल बिहारी की कर्मभूमि है, इसलिए यहां के कार्यकर्ताओं का दायित्व है उनके बताये मार्ग पर चलते हुए लखनऊ में सदस्यता अभियान को देश भर में ऐतिहासिक बनाया जाए, विधायक ने अपनी विधानसभा का उल्लेख करते हुए आगे जोड़ा सरोजनीनगर सभी अभियानों में कीर्तिमान स्थापित करता है, सदस्यता अभियान में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

डॉ.राजेश्वर सिंह ने कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए आगे जोड़ा कि भाजपा की विचारधारा राष्ट्रप्रथम की है, भाजपा कार्यकर्ताओं की सोच राष्ट्र के लिए सबकुछ समर्पित करने की है, इसलिए हर व्यक्ति भाजपा से जुड़ना चाहता है, उन्हें जिम्मेदारीपूर्वक भाजपा से जोड़ना है। विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पडोसी देशों में जो कुछ हो रहा है वो चिंताजनक है। विरोधी दलों पर हमला करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि कांग्रेस धारा 370 बहाल करने की बात करने वाली पार्टियों के साथ है, सपा अयोध्या के चर्चित और दुखद बलात्कार घटना के आरोपियों के समर्थन में खड़ी है, किसी भी दल ने बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हुई हिंसा पर एक शब्द भी नहीं बोला।

इस दौरान मूसलाधार बारिश के बीच कार्यशाला में आये कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा भाजपा कार्यकर्ताओं में पार्टी को मजबूत करने की सबसे ज्यादा इच्छाशक्ति है, सब पार्टी को मजबूत करना चाह रहे हैं। कार्यशाला में पूर्व सांसद मोहनलालगंज व पूर्व केन्द्रीय मंत्री कौशल किशोर, लखनऊ महानगर महामंत्री पुष्कर शुक्ला, मंडल अध्यक्ष के के श्रीवास्तव, महामंत्री रजनीश श्रीवास्तव एवं नीरज श्रीवास्तव, पूर्व मंडल अध्यक्ष आरपी भारद्वाज, राजेश गुप्ता, अनूप मिश्रा, पार्षद सौरभ सिंह मोनू, राम नरेश रावत, पूर्व पार्षद सर्वजीत सिंह एवं अन्य मंडल पदाधिकारी, मंडल मोर्चा अध्यक्ष, शक्ति केंद्र संयोजक एवं प्रभारी, वार्ड अध्यक्ष और बूथ अध्यक्ष मौजूद रहे।

लखनऊ: मायावती फिर से बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं

  • बीएसपी प्रमुख मायावती फिर बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष
  • मायावती ने मायावती को पुनः बहुजन समाज पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया
  • बसपा सुप्रीमो मायावती 2003 से हैं राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ: बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बसपा सुप्रीमो मायावती को एक बार फिर से अगले 5 साल के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। पार्टी की तरफ से सतीश चंद्र मिश्रा ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा था, सभी राज्यों के प्रदेशाध्यक्षों ने सर्वसम्मति से मायावती को फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना।

लखनऊ: पूर्वी भाग में धूमधाम से आयोजित की गई मटकी फोड़ प्रतियोगिता

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के पूर्व भाग में श्री कृष्णा जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता का कार्यक्रम संपन्न हुआ, प्रतियोगिता के पश्चात क्षेत्र प्रचार प्रमुख पूर्वी उत्तर प्रदेश सुभाष जी का पाथेय प्राप्त हुआ। जिसमें उन्होंने श्री कृष्ण जन्मोत्सव के संपूर्ण जीवन काल को परिभाषित किया, जिससे समाज से आए हुए लोगों का उत्साहवर्धन हुआ।

इस अवसर पर सह-प्रांत संघचालक सुनीत खरे जी, भाग संघचालक प्रभात जी, सह भाग संघचालक अरूण जी, भाग कार्यवाह मनुदेव जी, भाग सायं प्रचारक कमलेश जी, भाग विद्यार्थी कार्य प्रमुख विश्व राज, भाग सह-विद्यार्थी कार्य प्रमुख भावेश जी, भाग महाविद्यालयीन विद्यार्थी कार्य प्रमुख योगेन्द्र जी सहित अन्य दायित्वधारी कार्यकर्ता उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम में कुल संख्या 312 रही।

बड़ी खबर: रूस के सारातोव में बहुमंजिला इमारत में ड्रोन से अमेरिका के 9/11 जैसा बड़ा हमला

मास्को: रूस के सारातोव में एक बहुमंजिला बिल्डिंग में अमेरिका के 9/11 जैसा बड़ा हमला होने की खबर आ रही है। अमेरिका के बर्ड ट्रेड सेंटर की इमारतों में हवाई जहाज घुस गए थे जबकि सारातोव की इस बहुमंजिला बिल्डिंग में ड्रोन घुस गया।

ड्रोन के इमारत से टकराते ही कई मंजिलों से आग की लपटे व धुंआ उठता देखा गया तथा भारी चीख पुकार मच गई। इस हमले में हताहतों के बारे में अभी जानकारी नहीं मिली है, लेकिन कहा जा रहा है कि इस हमले में बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं। बचाव एवं राहत कार्य शुरू कर दिया गया है।

कहा जा रहा है कि इस हमले के पीछे यूक्रेन का हाथ है, उसी की सेना द्वारा ये ड्रोन भेजा गया। इस भीषण हमले से रूस यूक्रेन के बीच युद्ध रुकने के बजाय और तेज हो सकता है। रूस जैसी महाशक्ति के लिए ये हमला एक बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि ये हमला तो किसी बड़े हमले का प्रयोग है।

धार्मिक पर्व: श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व

लखनऊ: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘गोकुलाष्टमी’ या ‘कृष्णाष्टमी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार भाद्रपद मास (अगस्त-सितंबर) में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। श्रीकृष्ण को विष्णु के आठवें अवतार के रूप में पूजा जाता है, जिन्होंने धरती पर अवतार लेकर अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना की।

पौराणिक कथा: श्रीकृष्ण का जन्म लगभग 5,250 साल पहले मथुरा में हुआ था। उनके माता-पिता वासुदेव और देवकी थे। देवकी के भाई, कंस, को यह भविष्यवाणी की गई थी कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। इस भय से कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनके सभी नवजात बच्चों की हत्या कर दी।

जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो वह आधी रात का समय था। उस समय अद्भुत घटनाएँ घटित हुईं। कारागार के द्वार अपने आप खुल गए, पहरेदार सो गए और वासुदेव ने नवजात कृष्ण को यमुना पार गोकुल में अपने मित्र नंद बाबा और यशोदा के पास पहुंचा दिया। इसके बाद, वासुदेव एक कन्या को साथ लाकर कंस को दे दिया। जब कंस ने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, तो वह देवी दुर्गा के रूप में प्रकट हुईं और कंस को चेतावनी दी कि उसे मारने वाला बच्चा सुरक्षित है और उचित समय पर उसे नष्ट करेगा।

कृष्ण की बाललीला:
गोकुल में नंद और यशोदा के पुत्र के रूप में कृष्ण का पालन-पोषण हुआ। उन्होंने बचपन से ही अद्भुत लीलाएँ कीं, जिनमें पूतना राक्षसी का वध, कालिया नाग का दमन, और गोवर्धन पर्वत उठाना शामिल है। बाल कृष्ण की माखन चुराने वाली लीला भी बहुत प्रसिद्ध है, जिसे ‘माखनचोर’ के नाम से जाना जाता है। उनकी लीलाओं में गोपियों के साथ रासलीला और राधा-कृष्ण की प्रेमकथा भी विशेष स्थान रखती हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व:
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, और रात्रि के समय श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में उत्सव मनाया जाता है। मथुरा, वृंदावन, और द्वारका जैसे स्थानों पर यह त्योहार विशेष धूमधाम से मनाया जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी का सांस्कृतिक महत्त्व भी कम नहीं है। इस दिन नाटक, संगीत, और नृत्य के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन होता है, जिसे ‘रासलीला’ कहते हैं। विशेषकर महाराष्ट्र में दही-हांडी का आयोजन किया जाता है, जिसमें मटकी फोड़ने की प्रतियोगिता होती है। इसे कृष्ण की बाललीलाओं की याद में किया जाता है।

उपवास और पूजा की विधि:
जन्माष्टमी के दिन लोग व्रत रखते हैं, जो सुबह से शुरू होकर मध्यरात्रि तक चलता है, जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस दिन लोग केवल फलाहार करते हैं और पानी का सेवन करते हैं। शाम को भगवान कृष्ण की मूर्ति को दूध, दही, शहद, और गंगाजल से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। इसके बाद विशेष भोग चढ़ाया जाता है, जिसमें माखन-मिश्री प्रमुख होते हैं। मध्यरात्रि को कृष्ण जन्म के समय शंख और घंटियों की ध्वनि के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं, और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन और उनकी शिक्षाएँ आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके द्वारा दिया गया ‘भगवद गीता’ का उपदेश, जो महाभारत के युद्ध के दौरान अर्जुन को दिया गया था, जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन प्रदान करता है। जन्माष्टमी का पर्व हमें धर्म, प्रेम, और कर्तव्य की सीख देता है, और समाज में सद्भावना और एकता की भावना को मजबूत करता है।