केंद्र में मोदी जी भ्रष्टाचार को खत्म कर रहें तो प्रदेश में योगी जी गुंडाराज, माफियाराज को
मंत्री ए.के.शर्मा ने कहा प्रदेश के हित में गुण्डों और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक
सिद्धार्थनगर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने गुरुवार को सिद्धार्थनगर जनपद प्रवास के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बुल्डोजर पर किए गए ट्वीट कि “सपा सरकार बनते ही सारे बुल्डोजर गोरखपुर की ओर रुख करेंगे” पर पूंछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सपा सरकार में जो माफिया गुंडे पले बड़े थे और जो गुंडाराज उन्होंने स्थापित किया था। उन्होंने गरीबों, सामान्य व्यक्तियों, निर्दोष लोगों की जमीनों में अवैध कब्जे किए थे, सरकारी जमीनों, नजूल की जमीनों में अवैध कब्जे कर बड़ी-बड़ी महलनुमा बहुमंजिला आवास अट्टालिकाएं बनाई थी। इसको ध्वस्त करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बुलडोजर का प्रयोग हो रहा है। उसमें कहीं पर भी कोई गलती नहीं हो रही है, गुंडे माफियाओ के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होती रहेगी। केंद्र में मोदी जी भ्रष्टाचार को खत्म करने में लगे हुए हैं, इसी प्रकार प्रदेश में योगी जी गुंडाराज, माफियाराज को खत्म करने में लगे हुए हैं, उसमें बुलडोजर का पूरा उपयोग हो रहा है और यह प्रयोग होता रहेगा, प्रदेश के हित में यह सब बहुत अच्छा हो रहा है।
श्री शर्मा ने कहा कि मुंगेरीलाल के सपने हसीन होते हैं, सपा अध्यक्ष अखिलेश जी को सपने आ रहे हैं, अच्छा है कि वह हमेशा ऐसे ही सपने देखते रहें। वर्ष 2022 में भी उन्होंने ऐसा ही सपना देखकर सरकार बनाने की मंशा जाहिर की थी, जिसका परिणाम सभी के सामने रहा। इसी प्रकार वर्ष 2027 में भी योगी जी के नेतृत्व में प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी।
उद्योग समागम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी को दिया अवार्ड
उद्योग समागम में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए सम्मिलित हुए औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी
मंत्री नन्दी ने कहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश का ग्रोथ इंजन बनने की ओर अग्रसर है उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के बदले औद्योगिक परिवेश और बदली कानून व्यवस्था और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से कराया अवगत
उत्तर प्रदेश के अनुदान में दस हजार करोड़ से अधिक की वृद्धि किए जाने का रखा प्रस्ताव
लखनऊ: गुरूवार को देश की राजधानी दिल्ली में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग भारत सरकार द्वारा आयोजित उद्योग समागम में उत्तर प्रदेश को व्यापार और नागरिक केंद्रित सुधार क्षेत्र में टॉप अचीवर घोषित किया गया। समागम में उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए सम्मिलित उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हाथों से टॉप अचीवर राज्य का अवार्ड हासिल किया। मंत्री नन्दी ने उद्योग समागम में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए असीम सम्भावनाओं के प्रदेश उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं प्रगति से अवगत कराया। वहीं उत्तर प्रदेश के चहुमुखी विकास के लिए कुछ प्रस्ताव भी रखे।
मंत्री नन्दी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अथक प्रयास, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, बेहतर औद्योगिक नीति एवं विकासोन्मुखी योजनाओं की वजह से देश का ग्रोथ इंजन बनने की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश में व्यापार और नागरिक केंद्रित सुधार क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। इसी बदलाव का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश व्यापार और नागरिक केंद्रित सुधार क्षेत्र में टॉप अचीवर राज्य बन गया है।
मंत्री नन्दी ने उत्तर प्रदेश में निवेश की विशाल संभावनाओं और राज्य सरकार द्वारा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने निवेशकों को राज्य में आकर्षित करने के लिए बेहतर नीतियों और बुनियादी ढांचे के विकास पर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। मंत्री नन्दी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिवेश में अमूल-चूल परिवर्तन हुआ है। उत्तर प्रदेश निवेश, उद्योगों की स्थापना एवं निवेश के माध्यम से रोजगार श्रृजन में अग्रणी है। अनुकूल नीतियाँ, जवाबदेह कार्यप्रणाली एवं निवेशकों के हितों के संरक्षण की प्राथमिकता ने बड़े पैमाने पर निवेशकों आकर्षित किया है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट एवं 4 ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी की सफल मेजबानी इस बात का प्रमाण है। मंत्री नन्दी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में हमें भारत सरकार का हर कदम पर प्रोत्साहन एवं सहयोग प्राप्त हुआ है और यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश सर्वोत्तम सम्भावनाओं को साकार कर पा रहा है।
मंत्री नन्दी ने बैठक में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक समृद्धि से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष रखे। मंत्री नन्दी ने कहा कि वर्ष 2024-25 के बजट के अनुसार ‘स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट’ के अन्तर्गत दीर्घ कालिक ब्याज मुक्त ऋण के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के अनुदान में दस हजार करोड़ रूपये की वृद्धि की जाए। साथ ही मंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में राज्य के समस्त चार भौगोलिक क्षेत्रों में विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) विकसित करने हेतु अनुमोदित निर्माण अधिनियम के तहत एसआईआर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्टेªक्चर के विकास हेतु धनराशि आवंटित किए जाने की मांग की।
मंत्री नन्दी ने कहा कि राष्ट्रीय औद्योगिक विकास कारिडोर कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्ष 2024 में आगरा तथा प्रयागराज का चयन किया गया है। भारत सरकार से इस योजना के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड एवं मध्यांचल क्षेत्र से एक-एक शहर को शामिल किये जाने का अनुरोध है। भारत सरकार ‘इण्डिया सेमी कन्डक्टर मिशन’ के अन्तर्गत भारत में सेमी कन्डक्टर एवं डिस्प्ले इको सिस्टम के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायताओं एवं अन्य प्रोत्साहन के कारण इस सेक्टर की प्रमुख कम्पनियाँ भारत में इकाइयाँ स्थापित करने हेतु उत्सुक हैं। भारत सरकार से अनुरोध है कि उत्तर प्रदेश देश का एक प्रमुख सेमी कन्डक्टर हब है। अतः इस क्षेत्र की शीर्ष व प्रतिष्ठित कम्पनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश हेतु प्रेरित किया जाए। मंत्री नन्दी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में अपने सर्वोत्तम योगदान हेतु प्रतिबद्ध हैं।
शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर सरोजनी नगर के सैकड़ो शिक्षक सम्मानित किए गए
लखनऊ: सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के तत्वाधान में शिक्षक समान समारोह का आयोजन गौतम बुद्ध डिग्री कॉलेज बिजनौर सरोजिनी नगर में किया गया है। मुख्य अतिथि के तौर पर इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह सदस्य विधान परिषद लखनऊ खंड स्नातक क्षेत्र से तथा शैलेंद्र दुबे अध्यक्ष सर्वजन हिताय संरक्षण समिति, रश्मि शर्मा प्राचार्य गौतम बुद्ध डिग्री कॉलेज तथा सेवक राम सर्वांगीण विकास कॉलेज के संस्थापक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना, महान शिक्षाविद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पुष्पांजलि अर्पित कर और अतिथि और शिक्षक स्वागत गीत के साथ हुई।
मुख्य अतिथि अवनीश सिंह ने सभी शिक्षकों को नमन करते हुए प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षक की मेहनती भूमिका होती है और डिजिटलाइजेशन के युग में आज महंगे महंगे कक्षा के शिक्षण कार्य यूट्यूब तथा अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से गांव और दूर दराज राज्य के बच्चों तक भी पहुंच सकते हैं। सर्वजन संरक्षण समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने सभी को बताया कि अन्याय के खिलाफ लड़ने की ताकत हमें शिक्षक द्वारा ही नैतिक शिक्षा और आत्म बल के माध्यम से ही प्राप्त हो सकती है। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने पूरे देश की नहीं दुनिया को शिक्षा के माध्यम से ज्ञान की ज्योति कैसे फैलाई जाती है यह बताया, उनके जीवन चरित्र के प्रत्येक पन्ने में बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएं हैं जिन्हें हमें आज आदर्श के रूप में देखते हुए जीवन में पालन करना चाहिए।
महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष रीना त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षण कार्य बल किसी राष्ट्र के भविष्य को बनाने में एक शक्तिशाली कारक है एक शिक्षक ही वह प्राथमिक व्यक्ति होता है जो बच्चों को शिक्षा और ज्ञान प्रदान करता है माता-पिता के अलावा भी अपने पूरे परिवार को ज्ञान सिखा कर सबसे अच्छा मार्गदर्शन प्रदान करते हैं वह नैतिक समर्थन प्रदान करते हैं और बच्चों को अंतिम रूप से सलाह देते हैं। आज के डिजिटलाइजेशन के युग में कोरोना महामारी के बाद अधिकतर आंकड़े पेपरलेस वर्क की कार्यशैली को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन ही किये जा रहे हैं ।प्रतिदिन शिक्षकों को अधिकतर आंकड़े ऑनलाइन देने पड़ते हैं उत्तर प्रदेश के अभिनव प्रयोग के तहत प्रत्येक स्कूल में टैबलेट के माध्यम से विभिन्न रजिस्टरों के रखरखाव की प्रक्रिया चल रही है जिसे शिक्षक करता है और इन सब से प्रक्रिया तो आसान हुई है पर नेटवर्किंग की समस्या के कारण बहुत से शिक्षक अनायास आंकड़े ना भेज पाने के कारण कार्रवाइयों की शिकार हो जाते हैं।
समय-समय पर सरकार द्वारा डिजिटल हाजिरी के आदेश जारी किए जाते हैं इस तरह की उपस्थिति और समय की पाबंदी का खामियाजा शिक्षकों को झेलना पड़ता है क्योंकि गांव और दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क नहीं होता।सभी शिक्षकों नेएक सुर में यह कहा कि यदि शिक्षकों को उनके मूल कार्य हेतु स्वतंत्र छोड़ दिया जाए और विद्यालय में शिक्षक शिक्षार्थी और पढ़ाई पर ही ध्यान केंद्रित किया जाए विभिन्न आंकड़ों की समय बर्बादी में शिक्षकों को ना लगाया जाए तो निश्चित रूप से देश में शिक्षा की स्थिति गुणवत्ता का स्तर और बच्चों की मानसिक स्तर में भी सुधार होगा।कार्यक्रम में रमा शर्मा, उषा त्रिपाठी, क्षमा सिंह, सुमन दुबे रेनू त्रिपाठी, खुरदई बाजार से राजू शुक्ला,सुरेश जयसवाल प्रकाश चंद तिवारी, अनिल सिंह भूपेश ओझा, ज्ञान प्रताप,संजय सिंह साथ ही सैकड़ो शिक्षक उपस्थित रहे।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के अगस्त माह में गत वर्ष के इसी अवधि की तुलना में 1725.83 करोड़ रूपये अधिक राजस्व प्राप्त
वर्तमान वित्तीय वर्ष में माह अगस्त तक कुल 84266.15 करोड़ रूपये का कर राजस्व प्राप्त जो लक्ष्य का 76.7 प्रतिशत- सुरेश कुमार खन्ना
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि प्रदेश के मुख्य कर करेत्तर राजस्व वाले मदों में वित्तीय वर्ष 2024-25 के अगस्त माह में कुल 15969.65 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 के अगस्त माह में 14243.82 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2024-25 के अगस्त माह में गत वर्ष के इसी अवधि की तुलना में 1725.83 करोड़ रूपये अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में माह अगस्त तक कर राजस्व प्राप्ति 109862.15 करोड़ रूपये लक्ष्य के सापेक्ष 84266.15 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो निर्धारित लक्ष्य का 76.7 प्रतिशत है।
श्री खन्ना ने बताया कि कर राजस्व की मद जीएसटी के अंतर्गत माह अगस्त 2024 में कुल 6228.82 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति हुई है, जो माह अगस्त में राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य 8428.45 करोड़ रूपये के सापेक्ष 73.9 प्रतिशत है। जबकि गत वर्ष अगस्त माह में प्राप्ति 5425.21 करोड़ रूपये थी। इस मद के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष के माह अगस्त तक राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य 48154.25 करोड़ रूपये के सापेक्ष 34691.13 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है, जो निर्धारित लक्ष्य का 72 प्रतिशत है। इसी प्रकार वैट के अंतर्गत माह अगस्त, 2024 में 2659.47 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति हुई है, जो अगस्त माह के निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 77.6 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में अगस्त माह तक वैट के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 16295.54 करोड़ रूपये के सापेक्ष 11977.21 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो लक्ष्य का 73.5 प्रतिशत है।
वित्त मंत्री ने बताया कि कर राजस्व के अंतर्गत आबकारी मद में माह अगस्त 2024 में 3580.51 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो निर्धारित लक्ष्य का 87.3 प्रतिशत है। आबकारी मद के अंतर्गत गत वर्ष अगस्त माह में प्राप्ति 2980.47 करोड़ रूपये थी। उन्होंने बताया कि आबकारी मद के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में अगस्त माह तक राजस्व प्राप्ति के निर्धारित लक्ष्य 22900 करोड़ रूपये के सापेक्ष 19317.62 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है, जो निर्धारित लक्ष्य का 84.4 प्रतिशत है। स्टाम्प तथा निबंधन के अंतर्गत माह अगस्त, 2024 में राजस्व प्राप्ति 2477.38 करोड़ रूपये थी, जो माह अगस्त में राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य का 88.5 प्रतिशत है। इस मद के अंतर्गत गत वर्ष अगस्त माह में राजस्व प्राप्ति 2427.52 करोड़ रूपये थी। उन्होंने बताया कि स्टांप तथा निबंधन मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में अगस्त माह तक राजस्व प्राप्ति के निर्धारित लक्ष्य 14852 करोड़ रूपये के सापेक्ष 12655.11 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है, जो निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 85.2 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार के राजस्व प्राप्ति की मद परिवहन के अंतर्गत माह अगस्त, 2024 में 775.11 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो अगस्त माह में निर्धारित लक्ष्य का 85 प्रतिशत है। इस मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में अगस्त माह तक राजस्व प्राप्ति के निर्धारित लक्ष्य 4908.11 करोड़ रूपये के सापेक्ष 4645.90 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो निर्धारित लक्ष्य का 94.7 प्रतिशत है। इसी प्रकार करेत्तर राजस्व की प्रमुख मद भूतत्व एवं खनिकर्म के अंतर्गत माह अगस्त, 2024 में प्राप्ति 248.36 करोड़ रूपये है, जो माह अगस्त में निर्धारित लक्ष्य का 82.1 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस मद के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में अगस्त माह तक राजस्व प्राप्ति के निर्धारित लक्ष्य 1842.50 करोड़ रूपये के सापेक्ष 1423.66 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है, जो निर्धारित लक्ष्य का 77.3 प्रतिशत है।
लखनऊ: बुलडोजर न्याय को लेकर देश भर में जारी बहस के बीच सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने बुधवार को एक अंग्रेजी पत्रिका में विधिसम्मत लेख लिखकर बुलडोजर जस्टिस की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और उसके समर्थन में उदाहरण सहित कानूनी प्रावधान भी उल्लेखित किए।
विधायक ने अपने लेख में लिखा, “बुलडोजर जस्टिस” शब्द हाल में बहुत प्रचलित हुआ है, जिसके सम्बन्ध में आलोचकों का तर्क है कि गंभीर अपराधों के आरोपियों की संपत्तियों को लक्षित करना पारंपरिक न्याय सिद्धांतों के विरुद्ध है और परेशान करने वाले बदलाव को दर्शाता है। हालाँकि, अक्षमता और देरी से जूझ रही न्याय प्रणाली में त्वरित कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता को स्वीकार करने में विफलता के कारण यह आलोचना लक्ष्य से चूक जाती है, जहां पारंपरिक कानूनी प्रक्रियाओं में जनता का विश्वास कम हो रहा है।
अपराधियों पर अंकुश के लिए आवश्यक प्रक्रिया
विकास दुबे और मुख्तार अंसारी के कुख्यात मामले कुछ उदाहरण हैं जिनमें उनके द्वारा खुलेआम कानून का उल्लंघन किया गया और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाला गया। दुबे, जो पुलिस अधिकारियों की निर्मम हत्या का मास्टरमाइंड था, और अंसारी, जो एक कुख्यात अपराधी था, उसके विरुद्ध 18 हत्या और 10 हत्या के प्रयास सहित 65 से अधिक आपराधिक मामले थे। तथाकथित “बुलडोजर न्याय” का उद्देश्य ऐसे अपराधियों का ही उन्मूलन करना है। बुलडोजर कार्रवाई को महज बदला या राजनीतिक प्रतिशोध कहकर खारिज करना सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के आवश्यक लक्ष्य को नजरअंदाज करना है। दिल्ली उदाहरण है जहां उपद्रवियों ने निज़ामुद्दीन-की-बावली और बाराखंभा मकबरे जैसे केंद्रीय संरक्षित स्मारकों पर अवैध अतिक्रमण कर लिया और इन ऐतिहासिक स्थलों को सार्वजनिक उपद्रव का स्रोत बना दिया गया। इसके संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबी मुकदमेबाजी चली, अंततः राज्य के अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए दंडित किया। यदि अधिकारियों ने तुरंत और प्रभावी से प्रयास किया होता, तो अतिक्रमण को न्यायिक हस्तक्षेप के बिना रोका जा सकता था।
गंभीर अपराधों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के लिए न्यायिक समर्थन
आमतौर पर आलोचकों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि सज़ा केवल अदालत के फैसले के बाद ही दी जानी चाहिए, ऐसी स्थितियाँ भी हैं जहाँ अपराध की प्रवृति इतनी अधिक है कि व्यापक कानूनी निर्णय निरर्थक लगते हैं। आरजी कर मेडिकल अस्पताल में हाल में दुखद घटना घटी, जहां एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार हुआ, उसकी हत्या कर दी गई और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा विलंबित और अपर्याप्त कार्रवाई के परिणामों से सार्वजनिक आक्रोश भड़क गया।
नरिंदर सिंह और अन्य स्टेट ऑफ़ पंजाब उदाहरण है
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी त्वरित और निर्णायक सरकारी कार्रवाई की आवश्यकता को स्वीकार किया है। “बुलडोजर जस्टिस” के आलोचक अक्सर व्यर्थ तर्क देते हैं कि राज्य अल्पसंख्यकों और हाशिए पर रहने वाले समूहों को निशाना बनाता है, लेकिन यह तर्क एक बुनियादी सच्चाई को नजरअंदाज कर देता है – अपराध धर्म और समूह से परे है। कानून का प्राथमिक उद्देश्य व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की रक्षा करना है, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो। उदाहरण के लिए, _*शैलेश जसवंतभाई बनाम स्टेट ऑफ़ गुजरात में*_, सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीडमैन की बात दोहराते हुए कहा कि आपराधिक कानून को समाज की सामूहिक चेतना को प्रतिबिंबित करना चाहिए। इसके अलावा, कानूनी रूप से आवश्यक होने पर अदालतें विध्वंस की कार्रवाई का समर्थन करने से नहीं कतराती। सुपरटेक लिमिटेड बनाम एमराल्ड कोर्ट ओनर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन मामला एक स्पष्ट उदाहरण है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करते हुए कानून के शासन को मजबूत करने के लिए उच्च न्यायालय के विध्वंस आदेश को बरकरार रखा।
अपराध पर अंकुश और सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए “बुलडोजर” कार्रवाइयों का समर्थन
उत्तर प्रदेश पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, बुलडोजर कार्रवाई की निर्णायक उपायों के बाद संगठित अपराध में 20% की कमी आई है। 2023 के एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि 65% उत्तर दाताओं का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों ने स्थानीय अपराध को प्रभावी ढंग से कम कर दिया है।
बुलडोजर कार्रवाई के लिए जनता का समर्थन निर्विवाद
2024 CSDS सर्वेक्षण से पता चलता है कि यूपी के 70% निवासी इन उपायों का समर्थन करते हैं, जो प्रभावित क्षेत्रों में जनता के विश्वास में 15% की वृद्धि दर्शाता है। पुरानी अवधारणा होने से कहीं दूर, यह व्यवस्था जनता के गुस्से को शांत करने और भविष्य में कदाचार को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में कार्य करती है।
आगे का रास्ता
मामलों के बढ़ते बैकलॉग को हल करने और विशेष रूप से जघन्य अपराधों के मामलों में न्याय में तेजी लाने के लिए विधायी सुधार की तत्काल आवश्यकता है। हाल ही में, न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इस तथ्य को कवर किया है कि भारतीय न्यायालयों में चौंकाने वाला बैकलॉग मौजूद है जिसे निपटाने में 300 साल से अधिक का समय लग सकता है। इस संकट से निपटने के लिए त्वरित लेकिन निष्पक्ष न्याय दिलाने वाले परीक्षणों का कार्यान्वयन आवश्यक है।
योगी आदित्यनाथ जैसे सशक्त राजनेताओं के कार्यों की आलोचना के लिए उन्हें “बुलडोजर बाबा” जैसे लेबल के साथ उनकी नकारात्मक छवि बनाने का प्रयास अक्सर वास्तविक कानूनी चिंता के बजाय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से उत्पन्न होती है। तथाकथित “बुलडोजर न्याय” का सार सुरक्षा और व्यवस्था के लिए जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप है।