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डॉ. प्रवीण सिंह जादौन का नगर पालिका परिषद बीना में भव्य स्वागत, सहकारिता के विकास पर दिया जोर

बीना (सागर): बुंदेलखंड महापरिषद के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ के माननीय निदेशक डॉ. प्रवीण सिंह जादौन का आज नगर पालिका परिषद बीना में भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र के नागरिकों ने बड़े उत्साह और गरिमा के साथ डॉ. जादौन का स्वागत किया।

सहकारिता के विकास पर दिया गया जोर

इस अवसर पर डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने बुंदेलखंड की समृद्धि और विकास के लिए सहकारिता क्षेत्र के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “बुंदेलखंड क्षेत्र को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सहकारिता का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। सहकारी संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और कृषि सुधार में अहम भूमिका निभा सकती हैं।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सहकारिता क्षेत्र से जुड़े किसानों, महिला उद्यमियों और युवा व्यवसायियों को अधिक समर्थन और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है, ताकि क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

डॉ. जादौन ने यह भी कहा कि सहकारी आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाना बुंदेलखंड महापरिषद की प्राथमिकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे सहकारी संस्थाओं से जुड़कर क्षेत्रीय विकास में अपना योगदान दें।

स्थानीय निकायों और सहकारी संस्थाओं के तालमेल से होगा समग्र विकास

डॉ. जादौन ने भाजपा सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चलाए जा रहे विभिन्न विकास योजनाओं की जानकारी दी और बताया कि स्थानीय निकायों और सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल से ही क्षेत्र का समग्र विकास संभव है। उन्होंने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत नगरीय क्षेत्रों में गठित स्वयं सहायता समूहों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम में प्रमुख व्यक्ति की मौजूदगी में पौधारोपण का आयोजन

कार्यक्रम के दौरान नगर पालिका परिषद अध्यक्ष लता सवकार, पार्षदों और डॉ.प्रवीण सिंह जादौन ने शहीद भगत सिंह पार्क में पौधारोपण किया। इस आयोजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का संदेश भी दिया गया। इस कार्यक्रम में औद्योगिक विकास संघ के उपाध्यक्ष अखंड प्रताप चंद्र, नगर पालिका परिषद बीना के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम प्रकाश, भाजपा सागर के जिला उपाध्यक्ष संजय सिंह, पार्षद सभापति जितेंद्र बोहरे, हरिओम चौबे, विजय लखेरा, गौरीशंकर राय, प्रहलाद यादव, नवीन साहू, अशोक राय, विकास राजपूत, शुभम तिवारी, बीडी रजक, नगर पालिका परिषद बीना के अन्य पार्षद और अधिकारी उपस्थित रहे।

डॉ. प्रवीण सिंह जादौन का बीना में जोरदार स्वागत और अभिनंदन किया गया। उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास और सहकारिता के महत्व पर जोर देते हुए ग्रामीण विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, स्थानीय निकायों और सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल से क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की अपील की।

डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को ढालें युवा- डॉ.राजेश्वर सिंह

  • डॉ.राजेश्वर सिंह ने ट्वीट कर युवाओं को दिखाई भावी चुनौतियों और संभावनाओं की तस्वीर, कहा अभी अपनी स्किल्स को करें मजबूत
  • तेजी से डिजिटलीकृत हो रही दुनिया, 2030 में प्रचलित 85% नौकरियों का अभी अस्तित्व ही नहीं, एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस भविष्य की नौकरियों का आधार
  • डिजिटल सरोजनीनगर अभियान : डॉ. राजेश्वर सिंह ने 18 कॉलेजों में स्थापित कराया स्मार्ट क्लास रूम, 25 में डिजिटल लैब, 1000 मेधावियों में बांटी डिजिटल डिवाइज

लखनऊ: पढ़ाई कर रहे युवाओं को अपनी नौकरी और व्यवसाय चुनने के लिए भविष्य पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, उन्हें अपने कौशल और महत्वाकांक्षाओं को अभी से आकार देना शुरू कर देना चाहिए क्योकि आने वाले समय में उन लोगों की तरक्की सबसे ज्यादा होगी जो भावी चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप अभी से खुद को ढालने के लिए तैयार हैं। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने ट्वीट कर भारत की युवा पीढ़ी को ये सलाह दी है।

सोमवार को डॉ. सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स(ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा कि आज की दुनिया तेजी से डिजिटलीकृत हो रही है, ऐसे में उभरते नौकरी के अवसरों को समझना और उनके अनुरूप सही स्किल्स हासिल करना सबसे महत्वपूर्ण है। विधायक ने अपने ट्वीट में भविष्य के उभरते क्षेत्र और उनमें नौकरी की संभावनाओं और उनसे सम्बंधित कोर्सों का उल्लेख करते हुए लिखा कि अगले 5 सालों में एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में 71% मांग बढ़ेगी जबकि डेटा साइंस के क्षेत्र में 2029 तक 31% नौकरियाँ बढ़ेंगी, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में 2031 तक 35% नौकरियों की वृद्धि होगी और 2030 तक रोबोटिक्स फील्ड का 19% अधिक विस्तार होगा।

विधायक ने आगे जोड़ा कि 2025 तक क्लाउड कंप्यूटिंग का बाजार 832.1 बिलियन डॉलर और 2026 तक डिजिटल मार्केटिंग उद्योग 876 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, टेलीहेल्थ उद्योग में 2028 तक 25.2% की वृद्धि संभावित है। डॉ. सिंह ने वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम फ्यूचर ऑफ़ जॉब्स रिपोर्ट का हवाला देते हुए आगे लिखा कि 2025 तक 50% नौकरियों को रिस्किल करने की आवश्यकता होगी। एआई 2025 तक मौजूदा 18 लाख नौकरियों के अस्तित्व को खत्म करते हुए 23 लाख नौकरियां सृजित करेगा। डेल टेक्नोलॉजीज के अनुमान के अनुसार 2030 में प्रचलित 85% नौकरियाँ अभी तक मौजूद नहीं हैं। इस लिए युवा पाठ्यक्रम: मशीन लर्निंग, डेटा साइंस आदि डिजिटल स्किल्स के साथ आगे बढ़ें और अपने भविष्य में निवेश करें।

बता दें कि राजधानी लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवा पीढ़ी का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए लगातर सुविधा, संसाधन और अवसर भी दिला रहे हैं। इस सम्बन्ध में विधायक ने त्रिस्तरीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केन्द्रों की स्थापना कर युवाओं को निःशुल्क डिजिटल कोर्सेज की ट्रेनिंग दिला रहे हैं अबतक 7 केन्द्रों की स्थापना ह चुकी है, डॉ. सिंह का लक्ष्य 100 केन्द्रों की स्थापना कर कम से कम 50 हजार युवाओं को डिजिटल ट्रेनिंग से जोड़ना है।

डॉ. राजेश्वर सिंह अपनी विधानसभा क्षेत्र के मेधावी छात्रों को लगातार डिजिटल डिवाइसेस भी उपलब्ध करवा रहे हैं। उनके द्वारा अबतक करीब 1 हजार मेधावी छात्र – छात्राओं को लैपटॉप, स्मार्ट फ़ोन और टेबलेट्स बांटे गएँ, यही नहीं डॉ. सिंह ने 18 कॉलेज में डिजिटल स्मार्ट बोर्ड पैनल स्थापित करवाए, 25 कॉलेज में डिजिटल लैब स्थापित करवाई, यही नहीं विधायक ने अपने क्षेत्र में बेसिक विद्यालय पहाड़पुर को गोद लेकर उसमें स्मार्ट क्लास रूम, रोबोटिक्स और स्टेम लैब तथा प्लेनेटोरियम भी स्थापित करवाया है।

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के वरिष्ठ सदस्य दिलीप सिन्हा विवाद में, गाली-गलौज का स्क्रीनशॉट हुआ वायरल

लखनऊ, 15 सितंबर 2024: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पत्रकारिता जगत में हाल ही में एक विवाद ने तूल पकड़ा है, जिसमें उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के वरिष्ठ सदस्य दिलीप सिन्हा का नाम सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक चैट के स्क्रीनशॉट में दिलीप सिन्हा द्वारा वरिष्ठ पत्रकार प्रभात त्रिपाठी को कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए गालियां दी गई हैं।

इस घटना ने लखनऊ के पत्रकारिता जगत में खलबली मचा दी है और वरिष्ठ पत्रकारों के बीच आपसी विवाद को उजागर किया है।

दिलीप सिन्हा: एक अनुभवी और सम्मानित पत्रकार

दिलीप सिन्हा लखनऊ के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकारों में से एक माने जाते हैं। उनका करियर नेशनल हेराल्ड और नवजीवन जैसे प्रतिष्ठित मीडिया हाउस में लंबा और सफल रहा है, जहां से वे रिटायर होने के बाद स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं। उनकी उम्र अब सत्तर वर्ष से अधिक है, और वे पत्रकारिता जगत में अपने बेदाग और सम्मानित छवि के लिए जाने जाते हैं।

इसके साथ ही, वे उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, जहां वे आठ बार सबसे अधिक मतों से चुनाव जीत चुके हैं। इस पृष्ठभूमि के बावजूद, हालिया घटनाएं उनकी छवि पर प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं।

विवाद की जड़: चुनाव और गुटबाजी का प्रभाव

यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक हारे हुए प्रत्याशी ने दिलीप सिन्हा को फोन कर के अपनी हार का दोष वरिष्ठ पत्रकारों पर मढ़ा। सूत्रों के अनुसार, उस प्रत्याशी ने कहा कि उसने चुनाव जीतने के लिए मतदाताओं पर भारी खर्च किया था, लेकिन बुजुर्ग पत्रकारों ने हेमंत तिवारी को वोट देकर उसके साथ गद्दारी की। इस दौरान प्रत्याशी ने कई वरिष्ठ पत्रकारों को गाली-गलौज भी की, जिसके बाद दिलीप सिन्हा का गुस्से में आना स्वाभाविक था।

दिलीप सिन्हा की प्रतिक्रिया का स्क्रीनशॉट जल्द ही वायरल हो गया, जिसमें वह कथित तौर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रभात त्रिपाठी को माँ की गालियां देते हुए नजर आ रहे हैं। यह स्क्रीनशॉट लखनऊ के पत्रकारों और मीडिया जगत में तेजी से फैला, और अब इस पर सार्वजनिक चर्चा शुरू हो गई है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकारों की प्रतिक्रिया

नाम न छापने की शर्त पर लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि दिलीप सिन्हा पुराने और खाटी पत्रकार हैं, जिन्होंने लम्बे समय तक मीडिया जगत में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने बताया कि सिन्हा का स्वभाव काफी शांत और प्रतिष्ठित माना जाता है, लेकिन हाल के दिनों में चल रहे विवाद और गुटबाजी ने उनकी छवि पर असर डाला है।

वरिष्ठ पत्रकारों के बीच चल रही गुटबाजी के कारण, कई पत्रकार संगठनों के भीतर और बाहर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। इन गुटबाजियों के कारण पत्रकारों के बीच आपसी संघर्ष और मनमुटाव भी देखा जा रहा है।

वायरल स्क्रीनशॉट और सोशल मीडिया का प्रभाव

वायरल हुआ स्क्रीनशॉट दिलीप सिन्हा के लिए भारी पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, और उनके अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर लोगों में नाराजगी है। हालाँकि दिलीप सिन्हा के समर्थन में भी कुछ पत्रकार सामने आए हैं, जो इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह घटना उनके गुस्से का परिणाम है, और उन्हें इतने सालों के उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए समझा जाना चाहिए।

पत्रकारिता जगत में गुटबाजी: एक बढ़ती समस्या

लखनऊ के पत्रकारिता जगत में गुटबाजी एक प्रमुख समस्या बनती जा रही है। पत्रकार संगठनों में आपसी मतभेद और व्यक्तिगत मुद्दों ने मीडिया समुदाय में विभाजन को जन्म दिया है। हाल के चुनावों ने इस विभाजन को और बढ़ाया है, जिसमें विभिन्न गुटों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक समीकरणों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।

गुटबाजी के इस माहौल में, व्यक्तिगत हमले और सार्वजनिक आलोचना आम हो चुकी है, और इसका परिणाम दिलीप सिन्हा जैसे वरिष्ठ पत्रकारों के सार्वजनिक विवादों के रूप में सामने आ रहा है।

दिलीप सिन्हा का अब तक का रिकॉर्ड और विवाद की गंभीरता

दिलीप सिन्हा का पत्रकारिता में अब तक का रिकॉर्ड बेदाग रहा है। उन्होंने लम्बे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं और हमेशा अपने सिद्धांतों के लिए जाने जाते रहे हैं। लेकिन इस हालिया विवाद ने उनकी छवि को कुछ हद तक धूमिल किया है।

चूंकि यह मामला अब सार्वजनिक हो चुका है, इसलिए मीडिया और पत्रकारिता जगत में इस पर गहन चर्चा हो रही है। लोग यह जानना चाहते हैं कि एक वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार ऐसी स्थिति में कैसे फंस सकते हैं, और क्या इसका कोई समाधान निकल सकता है।

आगे की राह: पत्रकार संगठनों की भूमिका

इस विवाद के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पत्रकार संगठनों को गुटबाजी और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना होगा। पत्रकारिता का पेशा एक जिम्मेदारीपूर्ण कार्य है, और इसे व्यक्तिगत विवादों से दूर रखना चाहिए।

पत्रकार संगठनों को इस दिशा में कदम उठाने होंगे ताकि पत्रकारों के बीच भाईचारे और सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया जा सके। इसके साथ ही, वरिष्ठ पत्रकारों को अपने अनुभव और प्रतिष्ठा के आधार पर नए पत्रकारों को मार्गदर्शन देना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

विवाद से पत्रकारिता पर असर

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सिन्हा और प्रभात त्रिपाठी का यह विवाद राजधानी लखनऊ के पत्रकारिता जगत में गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यह न केवल पत्रकारों के बीच बढ़ते मनमुटाव और गुटबाजी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वरिष्ठ पत्रकार भी इस तरह के विवादों में फंस सकते हैं।

आगे चलकर, पत्रकारिता के पेशे में गुटबाजी और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने की आवश्यकता है। इसके लिए पत्रकार संगठनों को सामूहिक रूप से पहल करनी होगी, ताकि पत्रकारिता जगत में शांति और सहयोग बना रहे।

लखनऊ: विकासनगर के बाद अब लखनऊ विश्वविद्यालय के पास सड़क पर बड़ा गड्ढा, जलकल विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर

लखनऊ, 16 सितंबर 2024: बारिश के मौसम में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की कुछ सड़कों की स्थिति दिन-ब-दिन एकदम से बिगड़ती जा रही है। हाल ही में विकासनगर की सड़कों पर गड्ढों की समस्या सुर्खियों में थी, और अब बीते दिनों हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के पास एक बड़े गड्ढे ने न केवल यातायात बाधित किया है, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। इस गड्ढे के पीछे जलकल विभाग की लापरवाही बताई जा रही है, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है।

सड़क के बीचों-बीच बना खतरनाक गड्ढा: लखनऊ की यातायात व्यवस्था पर असर

लखनऊ विश्वविद्यालय, जो कि एक प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है, के आसपास हर दिन हजारों लोग आवाजाही करते हैं। यहां की सड़कों पर यातायात का भारी दबाव होता है, और ऐसे में बीच सड़क पर इस तरह के गड्ढे न केवल ट्रैफिक जाम का कारण बन रहे हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा रहे हैं।

सड़क के बीचों-बीच बना यह गड्ढा इतना गहरा हो चुका है कि छोटे वाहनों को यहां से गुजरने में कठिनाई होती है। पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहनों के लिए यह गड्ढा और भी खतरनाक है, क्योंकि इससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

विकासनगर में भी हुआ था ऐसा ही गड्ढा, ख़तरे की संभावना के चलते लगाई गई बैरिकेटिंग

लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र में भी कुछ ही समय पहले इसी तरह की स्थिति सामने आई थी, जहां पर सीवर लाइन में लीकेज के चलते शंकरजी की मूर्ति के आगे बहुत बड़ा गड्ढा हो गया था, यहाँ पर तो पिछले साल भी यही स्थिति हुई थी। हालाँकि स्थानीय प्रशासन ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और न सिर्फ़ मरम्मत कार्य शुरू किया बल्कि संबंधित विभागों द्वारा की गई उच्चस्तरीय जाँच के बाद विकासनगर के उस इलाक़े की 1700 मीटर से भी ज़्यादा की लाइन को ख़तरनाक बताते हुए भारी वाहनो का प्रवेश वर्जित करने के साथ ही, सीवर के आसपास से कोई न निकले इसके लिए बैरिकेटिंग भी करवाई, अब इस लाइन का नवीनीकरण का काम भी शुरू हो गया है।

हालांकि, विकासनगर में स्थिति गंभीर होने के बावजूद, अब लखनऊ विश्वविद्यालय के पास भी ऐसी ही समस्या पैदा हो गई है। यह दिखाता है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में जलकल विभाग और अन्य संबंधित विभागों द्वारा सड़कों की मरम्मत और रखरखाव में गंभीर लापरवाही हो रही है।

जलकल विभाग की लापरवाही: गड्ढे का कारण

इस गड्ढे के निर्माण का मुख्य कारण जलकल विभाग की लापरवाही मानी जा रही है। जलकल विभाग की इस लापरवाही के चलते अब स्थानीय प्रशासन और सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर कब तक लखनऊ के निवासियों को इस तरह की समस्याओं से जूझना पड़ेगा। सड़क के बीचोंबीच गड्ढा बनने के बाद से लगातार हो रही बारिश ने स्थिति और भी खराब कर दी है, और अब यह गड्ढा इतना बड़ा हो चुका है कि जल्द मरम्मत न की गई तो बड़ी दुर्घटना की आशंका है।

स्थानीय लोगों की नाराजगी और मांगें

लखनऊ विश्वविद्यालय के आसपास रहने वाले स्थानीय लोग और यहां आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं ने इस गड्ढे को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि यह गड्ढा न केवल यातायात बाधित कर रहा है, बल्कि लोगों की जान को भी जोखिम में डाल रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलकल विभाग और प्रशासन को बार-बार सूचित करने के बावजूद इस समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाया है, जहां उन्होंने लखनऊ की सड़कों की बदहाली और विभागीय लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई है।

लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द इस गड्ढे की मरम्मत की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित कदम

गड्ढे की शिकायतों के बाद प्रशासन ने इस मामले को संज्ञान में लिया है। नगर निगम और जलकल विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया है। प्रशासन का कहना है कि सीवर लाइन लीकेज के कारण यह समस्या हुई है, जल्द ही मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि मरम्मत के बाद यह गड्ढा भी जल्द ही भर दिया जाएगा, और यातायात व्यवस्था को सामान्य करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें प्रशासन के इन वादों पर ज्यादा भरोसा नहीं है, क्योंकि पहले भी कई बार ऐसी लापरवाहियां देखी जा चुकी हैं।

लखनऊ की सड़कों की स्थिति पर सवाल, सीवर लीकेज से हुए गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाओं की संभावना

लखनऊ की सड़कों की स्थिति पिछले कुछ समय से चिंता का विषय बनी हुई है। हर साल बारिश के मौसम में इस प्रकार की समस्याएँ देखी जा रही हैं, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है।

सरकार द्वारा शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और अन्य विकास योजनाओं के तहत बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां कुछ और ही हैं। सड़कों की खराब स्थिति और गड्ढों की समस्या न केवल नागरिकों के लिए असुविधाजनक है, बल्कि यह शहर के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सवाल उठाती है, लखनऊ में गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं आम होती जा रही हैं। छोटे वाहन, खासकर बाइक और स्कूटी चलाने वालों के लिए ये गड्ढे बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। इस स्थिति में वाहनों का फंसना और दुर्घटनाएं होना लगभग तय होता है। प्रशासन को इस समस्या पर जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

लखनऊ के सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जरूरत

यह जरूरी है कि लखनऊ के सड़कों की मरम्मत और रखरखाव को प्राथमिकता दी जाए। जलकल विभाग और नगर निगम जैसी संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मरम्मत कार्य पूरी तरह से किया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न हो।

साथ ही, सरकार को सड़कों के रखरखाव के लिए एक नियमित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करना चाहिए ताकि समय रहते समस्याओं का समाधान किया जा सके। लखनऊ की सड़कों की मौजूदा स्थिति शहर के विकास के लिए गंभीर चुनौती बन रही है, और इसका समाधान तत्काल जरूरी है।

सरोजनीनगर विधानसभा: परवर पश्चिम के श्रद्धालुओं ने किया अयोध्या दर्शन, निजामपुर मझिगांव में आयोजित हुआ ‘आपका विधायक-आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर

लखनऊ, 15 सितम्बर 2024: सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में रविवार का दिन ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण रहा। जहां परवर पश्चिम से 29वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा बस सेवा का सफलतापूर्वक संचालन हुआ, वहीं ग्राम पंचायत निजामपुर मझिगांव में ‘आपका विधायक-आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर आयोजित कर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया।

जय श्रीराम के नारों के साथ रवाना हुई रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा

भाजपा विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह की ओर से आयोजित 29वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा में परवर पश्चिम के श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल हुए। हर महीने दो बार चलने वाली इस निःशुल्क बस सेवा के तहत क्षेत्र के बुजुर्गों और महिलाओं को अयोध्या में भव्य राममंदिर के दर्शन कराए जाते हैं। विधायक कार्यालय की ओर से यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए नाश्ता, पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखा जाता है। वापसी पर सभी यात्रियों को प्रसाद और श्रीमद्भगवत गीता की प्रतियां भेंट की जाती हैं।

निजामपुर मझिगांव में हुआ जनसुनवाई शिविर और गर्ल्स यूथ क्लब का शुभारंभ

इसी दिन, डॉ. राजेश्वर सिंह ने ग्राम पंचायत निजामपुर मझिगांव में 88वां ‘आपका विधायक-आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर भी आयोजित किया, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से संबंधित 35 से अधिक समस्याएं सामने आईं, जिनके समाधान हेतु विधायक की टीम ने तत्काल कदम उठाए।

इसके साथ ही, गाँव की बेटियों के लिए 39वां गर्ल्स यूथ क्लब स्थापित किया गया। इस क्लब में वॉलीबॉल, फुटबॉल, और कैरम जैसे खेलों की किट बेटियों को दी गईं, जिससे उनके चेहरे पर खुशी साफ़ देखी जा सकती थी।

गाँव की शान पहल के तहत मेधावी छात्रों का सम्मान, ताराशक्ति रसोई से ताजा भोजन की व्यवस्था

शिविर के दौरान ‘गाँव की शान’ पहल के तहत इंटरमीडिएट और हाईस्कूल के सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को भी सम्मानित किया गया। आकांक्षा तिवारी (71%), कृष्णा शर्मा (65.34%), शुभम रावत (89.4%) और रक्तिमा पाल (78.2%) को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया साथ ही गाँववासियों के लिए ताराशक्ति रसोई की ओर से ताजा और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई, जो सरोजनीनगर क्षेत्र में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहचान बन चुकी है।

सरोजनीनगर में लगातार हो रहे विकास कार्य

डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं। रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा जैसी सेवाओं और ‘आपका विधायक-आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर के माध्यम से डॉ. सिंह का लक्ष्य हर नागरिक की समस्याओं का समाधान करना और बुजुर्गों को राममंदिर का दर्शन कराना है। साथ ही, गाँवों में गर्ल्स यूथ क्लब जैसे प्रोजेक्ट्स से बेटियों को खेल-कूद और शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है।