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सरोजनीनगर विधानसभा: 25 सितम्बर को हर बूथ पर संचालित होगा विशेष सदस्यता अभियान- डॉ.राजेश्वर सिंह

  • कुम्भकारी कौशल को प्रोत्साहित कर रहे डॉ.राजेश्वर सिंह: 12 कुम्भकारों को उपलब्ध कराई इलेक्ट्रिक चाक मशीन
  • गोडवा से हरौनी के बीच की दूरी 9 किमी होगी कम : डॉ.राजेश्वर सिंह ने सई नदी पार करने के लिए उपलब्ध कराई नाव
  • सरोजनीनगर विधायक ने की भाजपा सदस्यता अभियान की समीक्षा, प्रतिदिन 5 हजार सदस्य बनाए जाने का रखा लक्ष्य
  • जैन धर्म के दशलक्षण पर्व में पहुंचे डॉ राजेश्वर सिंह, दिगंबर जैन मंदिर आशियाना को प्रदान की 1 लाख की राशि
  • डॉ०सिंह ने कहा: सुरक्षित भविष्य के लिए भाजपा की राष्ट्रप्रथम की विचारधारा और संगठन को अजेय, अभेद बनाने की जरुरत

लखनऊ: कुम्भकारी मानव सभ्यता के इतिहास के सबसे प्राचीन आविष्कारों में से प्रमुख है। कुम्भकारी शिल्पकला व इस कौशल को संरक्षित, प्रोत्साहित करने के उद्देश से आज सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने नटकुर में 12 कुम्भ्कारों को इलेक्ट्रिक चाक मशीन प्रदान की। इसके साथ ही डॉ. सिंह ने गोडवा, हुलासखेडा, भटगाँव पाण्डेय, हाजीपुर सहित 14 समीपवर्ती गावों के निवासियों की मांग पर सई नदी में संचालन हेतु एक नाव उपलब्ध कराई। इस नाव के माध्यम से इन गांवों से हैरानी बीच की दूरी 9 किमी तक कम हो जाएगी। साथ ही नटकुर के पूर्व प्रधान पवन सिंह के आग्रह पर गाँव में 5 सोलर लाइट लगवाने, सड़क निर्माण करवाने तथा क्रिकेट किट उपलब्ध करवाने हेतु आश्वस्त किया।

भाजपा सदस्यता अभियान (ग्रामीण) की समीक्षा कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा आज भारत के पडोसी देशों की स्थिति देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि राष्ट्र प्रथम की विचारधारा किसी भी देश के लिए कितना जरुरी है। भाजपा की विचारधारा राष्ट्रप्रथम की है, इस लिए भाजपा को विश्व की सबसे मजबूत और अजेय पार्टी के रूप में स्थापित करना जरुरी है। डॉ. सिंह ने कार्यकर्ताओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा उनके सहयोग और समर्थन से सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र सदस्यता अभियान में जिले और प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में अग्रणी रहेगा। इस दौरान विधायक ने बताया 25 सितम्बर को सरोजनीनगर विधान सभा क्षेत्र के सभी बूथों पर वृहद सदस्यता अभियान संचालित किया जाएगा।

इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सहयोग से स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया और ताराशक्ति निःशुल्क रसोई के माध्यम से उपस्थित लोगों को ताजा – पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध करवाया गया। कार्यक्रम में राजेश सिंह चौहान, पूर्व प्रधान नटकुर पवन सिंह, ब्लॉक प्रमुख सुनील रावत, गोविंद शुक्ला, मंडल अध्यक्ष विवेक राजपूत, शिव बख्श सिंह, मोहित तिवारी, शिव कुमार सिंह ‘चच्चू’, लवकुश रावत, राहुल रावत, हरिकरन सिंह, अनुज प्रताप सिंह, उमाकांत पाल, शीला रावत, अर्चना गौतम, अरविंद सिंह, रूप नारायण गौतम, संजीव मिश्रा, राजन सिंह आदि मौजूद रहे।

वार्ड बैठक एवं सदस्यता अभियान (शहरी) समीक्षा कार्यक्रम में सहभागिता

भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए भाजपा की राष्ट्रप्रथम की विचारधारा को मजबूत करने, पार्टी का विस्तार और भाजपा नेतृत्व को सशक्त बनाने की सर्वाधिक आवश्यकता है। सनातन संस्कृति सुरक्षित रहेगी तभी राष्ट्र का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा, सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए भी भाजपा को सशक्त बनाने की परम आवश्यकता है। भाजपा सदस्यता अभियान समीक्षा कार्यक्रम के दौरान ये विचार व्यक्त किये हैं सरोजनीनगर भाजपा डॉ. राजेश्वर सिंह ने।

इस दौरान महानगर महामंत्री पुष्कर शुक्ला, मण्डल अध्यक्ष के. के. श्रीवास्तव, शिवशंकर विश्वकर्मा, मण्डल महामंत्री शिव प्रसाद मिश्रा, वार्ड अध्यक्ष राकेश तिवारी, पार्षद कौशलेन्द्र द्विवेदी, सौरभ सिंह ‘मोनू’, ब्रज मोहन शर्मा, राम नरेश रावत, के. एन. सिंह, हिमांशु अंबेडकर, पार्षद प्रतिनिधि कमलेश सिंह, विमल तिवारी, संजीव अवस्थी, लवकुश रावत, मनोज रावत, सरभजीत सिंह, शंकरी सिंह, राजेश सिंह, राकेश सिंह ‘बब्लू’, संजीव मिश्रा, हनुमान पाल, शेर अली, मण्डल सदस्यता प्रभारी सरिता शुक्ला, श्रीराम गुप्ता, सतगुरु प्रसाद, सभी सेक्टर संयोजक और बूथ अध्यक्ष मौजूद रहे।

उप्र पंचायतीराज ग्रामीण सफ़ाई कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों से की मुलाकात

वृहस्पतिवार को डॉ. राजेश्वर सिंह से उनके आशियाना आवास पर ‘उत्तर प्रदेश पंचायतीराज ग्रामीण सफ़ाई कर्मचारी संघ’ के पदाधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट कर पंचायतीराज विभाग के अंतर्गत कार्यरत सफाई कर्मचारियों की पदोन्नति व अन्य विभागीय मांगों से अवगत कराया। जिस पर डॉ. सिंह ने सफ़ाई कर्मचारी संघ पदाधिकारियों को उनकी मागों से मुख्यमंत्री को अवगत कराए जाने और यथासंभव समाधान दिलाए जाने हेतु आश्वस्त किया। इस दौरान डॉ. सिंह ने एलएलबी की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्रा आयुषी सिंह को लैपटॉप प्रदान कर सम्मानित किया और बेहसा, अमौसी निवासी नीलम की बेटी रिंकी को सिलाई – कढाई के उनके कौशल को व्यवसाय से जोड़ने में सहायता हेतु सिलाई मशीन उपलब्ध कराई।

इस दौरान उप्र पंचायतीराज ग्रामीण सफ़ाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष बसंतलाल, प्रदेश महामंत्री रामेन्द्र कुमार, प्रदेश कोषाध्यक्ष कृष्ण कुमार, प्रदेश संगठन मंत्री डी.डी. चौहान, प्रदेश संप्रेषक अयोध्या यादव, जिलाध्यक्ष रामकृष्ण, राघवेंद्र तिवारी, नरेंद्र भराला, रमेश भारती, रोशन लाल, प्रवीण भारती, लाल बहादुर सिंह, पवन वाल्मीकि एवं मनोज भारती मौजूद रहे।

दशलक्षण पर्व में की सहभागिता

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने वृहस्पतिवार को श्री 1008 महावीर भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना में आयोजित दशलक्षण पर्व में सहभागिता कर भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाओं को आज के समय में सर्वाधिक प्रासंगिक बताया। डॉ. सिंह ने बताया की भगवान महावीर ने सपूर्ण विश्व की मानवता के लिए सीख दी कि हमें हर दृष्टिकोण को स्वीकार करना चाहिए, लोगों के अच्छे गुणों को आत्मसात करना चाहिए। जैन समाज के बारे में बोलते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि जैन समाज ने अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त की है। जैन समाज सबसे शिक्षित समाज है, 94 प्रतिशत जैन साक्षर और 34 स्नातक है। इस दौरान डॉ. सिंह ने दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना बीबी में सुविधाओं के प्रसार के लिए एक लाख की सहयोग राशि प्रदान करने की घोषणा की साथ ही जैन समाज द्वारा चौक में संचालित 75 वर्ष पुराने स्कूल को सरोजनीनगर में शिफ्ट करने के लिए आवश्यक भूमि दिलाने हेतु और जैन समाज की बेटियों को डिजिटल शिक्षा दिलाने के लिए डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कराने हेतु आश्वस्त किया।

इस दौरान दिगंबर जैन सेवा समिति अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जैन, मंत्री अजय जैन, सहमंत्री अंकित जैन, अविनाश जैन, बंटी जैन, संजीव जैन, कौशलेंद्र द्विवेदी, विमल तिवारी, कमलेश सिंह, के एन सिंह, अरविंद चौबे, शंकरी सिंह, अन्नू त्रिपाठी, करुणा शारस्वत व अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तरप्रदेश: योगी सरकार गरीब परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ कराने में जुटी

women empowerment
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  • 2025-26 सत्र में आरटीई के तहत पात्र छात्रों को प्रवेश दिलाने के लिए अभी से शुरू की गई तैयारी
  • चयन प्रक्रिया को लेकर जारी की गई समय सारणी, चार चरणों में आवेदन करने का मिलेगा मौका
  • प्रत्येक चरण में पहली से 19 तारीख तक छात्र कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन
  • प्रथम चरण में 01 से 19 दिसंबर और चौथे चरण में 19 मार्च 2025 तक है आवेदन करने की अंतिम तिथि
  • पात्र परिवारों के छात्रों को कक्षा एक से लेकर पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में चयन का मिलेगा अवसर

लखनऊ, 19 सितम्बर: गरीब परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके, इसको लेकर योगी सरकार लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत गरीब और दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को गैर सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने ऐसे बच्चों की पढ़ाई को हर हाल में एक अप्रैल से शुरू कराने और प्रवेश सम्बन्धी सभी औपचारिकताओं को मार्च 2025 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के बच्चों को कक्षा-1 व पूर्व प्राथमिक कक्षा में 25 प्रतिशत प्रवेश दिया जाना अनिवार्य है। इसी के अनुपालन में योगी सरकार का बेसिक शिक्षा विभाग अभी से जुट गया है और आगामी सत्र में इसे अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

चार चरणों में पूरा होगा चयन और प्रवेश दिलाने की कार्यवाही

योगी सरकार की यह तैयारी सत्र 2025-26 में अलाभित और दुर्बल परिवारों के होनहारों को अच्छी और नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा द्वारा जारी दिशा निर्देश के मुताबिक यह प्रक्रिया चार चरणों में पूरी कराई जाएगी। प्रवेश दिलाने के लिए पात्र छात्रों के चयन के लिए आन लाइन आवेदन प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिन दुर्बल परिवारों के बच्चों को गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश लेना है, उन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होगा। चार चरणों में पूरा होने वाली इस प्रक्रिया में आवेदन की निर्धारित तिथि के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा और उसके बाद लॉक हुए आवेदन पत्रों की लॉटरी होगी। लॉटरी में निकले नामों को सूचीबद्ध कर विद्यालयों के आवंटन की सूची जारी कर दी जाएगी।

इन तिथियों में आवेदन का मौका

प्रत्येक चरण में पहली से 19 तारीख तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। प्रथम चरण में ऑनलाइन आवेदन के लिए 01 से 19 दिसंबर तक का समय निर्धारित है, जबकि दूसरा चरण 01 से 19 जनवरी 2025 और तीसरा और चौथा चरण क्रमशः 01 से 19 फरवरी तथा 01 से 19 मार्च 2025 निर्धारित है। बता दें कि आवेदनों के प्राप्त होने बाद प्रत्येक चरण की 20 से 23 तारीख के बीच सम्बन्धित बीएसए द्वारा उनका सत्यापन कर उन्हें लॉक करने की कार्यवाही की जाएगी। 24 तारीख को लाटरी और 27 तारीख को चयनित छात्रों के प्रवेश के लिए गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के आवंटन की सूची जारी कर दी जाएगी। इस सम्बन्ध में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि पिछले सत्र में जुलाई माह तक इनके प्रवेश की प्रक्रिया चलती रही। इससे इनकी पढ़ाई प्रभावित हुई थी, लेकिन अब हमने अलाभित समूह व दुर्बल परिवारों के बच्चों के गैर सहायतित विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया हर हाल में मार्च तक पूरा करने व चयनित बच्चों को प्रवेश दिलाने का निर्णय लिया है ताकि, पहली अप्रैल से इनकी विधिवत पढ़ाई शुरू हो सके।

उत्तरप्रदेश की राजनीति में जातिवाद का मुद्दा: जातिगत राजनीति करने वाले अखिलेश यादव ने “STF” को लेकर योगी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, माया सरकार में भी हावी रहा जातिवाद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिवाद का मुद्दा हमेशा से ही एक ज्वलंत विषय रहा है। राजनीतिक पार्टियाँ चुनावी मैदान में अपनी रणनीतियों को धार देने के लिए विभिन्न जातिगत समीकरणों का सहारा लेती रही हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने हाल ही में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सरकार पर ठाकुरवाद (Thakurvad) का आरोप लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष टास्क फ़ोर्स (STF) को ‘स्पेशल ठाकुर फ़ोर्स’ (Special Thakur Force) कहकर सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, इस आरोप के बाद राज्य की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है कि आखिर जातिवाद किस सीमा तक राजनीति में प्रवेश कर चुका है।

अखिलेश यादव का आरोप और उसकी पृष्ठभूमि

अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा विशेष जाति के लोगों को प्रमुख पदों पर बैठाया जा रहा है, विशेषकर STF जैसे संगठनों में। उन्होंने STF को ‘स्पेशल ठाकुर फ़ोर्स’ कहकर इस बात का संकेत दिया कि सरकार ठाकुर जाति के अधिकारियों को विशेष तवज्जो दे रही है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई और जातिवाद (Caste Politics) का मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया।

हालांकि, अखिलेश यादव का यह आरोप अपने आप में कुछ सवाल खड़े करता है। यदि हम योगी सरकार (Yogi Sarkar) से पहले की सरकारों का विश्लेषण करें, विशेषकर अखिलेश यादव की खुद की सरकार (Akhilesh Yadav Government), तो हमें जातिगत भर्तियों और तैनातियों के उदाहरण देखने को मिलते हैं। उस समय यादव समुदाय (Yadav Community) से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरियों और पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में तैनात किया गया था।

समाजवादी पार्टी और जातिगत राजनीति

समाजवादी पार्टी का अस्तित्व हमेशा से जातिगत राजनीति (Caste-Based Politics) पर निर्भर रहा है। यादव समुदाय और मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी के प्रमुख वोट बैंक माने जाते हैं। अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में भी इन समुदायों को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए। विशेषकर पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में यादव समुदाय के अधिकारियों को बड़ी संख्या में नियुक्त किया गया। उस समय भी विपक्षी दलों ने समाजवादी पार्टी पर यादववाद (Yadavvad) का आरोप लगाया था, जिसे अब ठाकुरवाद के आरोप के साथ तुलना की जा रही है।

समाजवादी पार्टी के शासनकाल में पुलिस विभाग (Police Department) में बड़ी संख्या में यादव समुदाय के अधिकारियों को तैनाती मिली थी। यह बात न केवल विपक्ष ने, बल्कि राज्य के विभिन्न तबकों ने भी समय-समय पर उठाई। ऐसे में अखिलेश यादव का वर्तमान सरकार पर ठाकुरवाद का आरोप लगाना राजनीतिक विरोधाभास (Political Contradiction) को दर्शाता है।

योगी सरकार और STF की भूमिका

उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) का गठन अपराध और आतंकवाद के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई के उद्देश्य से किया गया था। यह फ़ोर्स राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। STF के अधिकारियों की नियुक्ति और तैनाती राज्य सरकार के आदेशों पर की जाती है, लेकिन यह कहना कि यह विशेष रूप से किसी जाति के लिए काम करती है, एक गंभीर आरोप है।

योगी आदित्यनाथ की सरकार (Yogi Adityanath Government) ने STF का उपयोग अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई के लिए किया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि STF ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया है, जिसमें माफिया डॉन और अपराधी गिरोहों का सफाया किया गया है। STF की यह कार्रवाई न केवल वर्तमान सरकार के समय में हुई है, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों, जैसे मायावती (Mayawati) और अखिलेश यादव की सरकारों के दौरान भी STF का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उदाहरण के तौर पर, दस्यु उन्मूलन अभियान (Dacoit Elimination Campaign) के दौरान STF ने उत्तर प्रदेश को दस्यु विहीन (Dacoit-Free) करने का अहम काम किया।

जातिवाद का आरोप: राजनीति की पराकाष्ठा

अखिलेश यादव द्वारा STF पर लगाए गए ठाकुरवाद के आरोप को राजनीतिक विश्लेषक जातिवाद की राजनीति का एक नया उदाहरण मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति (UP Politics) में जातिवाद हमेशा से एक प्रमुख भूमिका निभाता आया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल जातिगत समीकरणों का लाभ उठाने के लिए समय-समय पर ऐसे बयान देते रहते हैं। बीजेपी (BJP), सपा (SP), बसपा (BSP) और अन्य पार्टियाँ जाति विशेष के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए विभिन्न आरोप-प्रत्यारोपों का सहारा लेती हैं।

जातिवाद की राजनीति से केवल समाज का विभाजन (Social Division) ही होता है। जातिगत आरोपों के कारण प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र की छवि भी धूमिल होती है। ऐसे आरोप न केवल राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने का एक तरीका होते हैं, बल्कि आम जनता के बीच भी गलतफहमियाँ पैदा करते हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों का जातिगत समीकरण

यदि हम अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल पर नजर डालें, तो पाएंगे कि उस समय भी प्रशासनिक तंत्र और पुलिस विभाग में जातिगत आधार पर भर्तियाँ और तैनातियाँ होती थीं। समाजवादी पार्टी पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि उन्होंने यादव समुदाय के लोगों को प्रमुख पदों पर नियुक्त किया। पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में यादव समुदाय के लोगों की भर्ती की गई, जिसका विपक्ष ने कड़ा विरोध किया। इसके अलावा थानों में तैनातियाँ भी जाति विशेष के आधार पर की गईं, जिससे अन्य जातियों के लोगों में असंतोष की भावना बढ़ी।

इसी प्रकार, मायावती सरकार के दौरान भी दलित समुदाय (Dalit Community) को प्राथमिकता दी गई थी। मायावती ने अपने कार्यकाल में दलित समुदाय के लोगों को बड़े पदों पर बैठाकर समाज में एक नई पहचान दिलाने का काम किया। इस प्रकार उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिवाद का खेल कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चला आ रहा है।

योगी आदित्यनाथ की सरकार पर ठाकुरवाद का आरोप

अखिलेश यादव द्वारा योगी सरकार पर ठाकुरवाद का आरोप लगाना इस बात का संकेत है कि राजनीति में जातिवाद अब एक आवश्यक हथियार बन चुका है। हालांकि, यह आरोप नई बहस को जन्म देता है कि क्या सरकारें वास्तव में जातिगत आधार पर काम कर रही हैं, या यह केवल विपक्ष का राजनीतिक हथकंडा है।

योगी सरकार पर ठाकुरवाद का आरोप लगाना यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिवाद का खेल कभी खत्म नहीं होने वाला है। हर सरकार पर जातिवाद का आरोप लगता है, चाहे वह किसी भी दल की क्यों न हो। योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में STF के द्वारा कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों को अंजाम दिया गया है, जिसमें न केवल माफिया डॉन और अपराधी गिरोहों का सफाया किया गया, बल्कि राज्य में कानून व्यवस्था को भी सुधारा गया। जातिवाद की राजनीति उत्तर प्रदेश में एक गहरा मुद्दा है, और इसका समाधान तब तक संभव नहीं है जब तक राजनीतिक दल इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना बंद नहीं करते। अखिलेश यादव का योगी सरकार पर ठाकुरवाद का आरोप लगाना इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार जातिगत समीकरणों को भुनाने के लिए बयान दिए जाते हैं। हालांकि, यह भी सच है कि हर सरकार में जातिगत भर्तियाँ और तैनातियाँ होती रही हैं। लेकिन अब वक्त आ गया है कि राजनीतिक दल जातिवाद से ऊपर उठकर राज्य के विकास और कानून व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करें।

जातिवाद की राजनीति से समाज में विभाजन की भावना बढ़ती है, और इससे प्रशासनिक तंत्र की छवि भी प्रभावित होती है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे जातिवाद की राजनीति को त्यागकर समाज के सभी वर्गों के विकास पर ध्यान दें, ताकि एक मजबूत और विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण हो सके।

सहकार भारती: भूमिहार समाज के डॉ.अरुण कुमार सिंह बने उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष

अयोध्या धाम में सहकार भारती का पांचवां प्रादेशिक अधिवेशन संपन्न

अयोध्या/लखनऊ: सहकार भारती उत्तर प्रदेश का पाँचवां प्रादेशिक अधिवेशन प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या धाम के बड़ा भक्त माल स्थित सभागार में आयोजित किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में सहकारिता के क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

अधिवेशन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने किया, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर इफको के प्रबंध निदेशक उदय शंकर अवस्थी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस मौके पर सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर, राष्ट्रीय महामंत्री उदय जोशी, और उत्तर प्रदेश प्रभारी दीपक चौरसिया समेत कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक पदाधिकारी मौजूद रहे।

डॉ.अरुण कुमार सिंह बने सहकार भारती उत्तर प्रदेश के नए अध्यक्ष

अधिवेशन के दूसरे दिन संगठन ने नई कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसमें सहकार भारती उत्तर प्रदेश के संगठन प्रमुख मूलतः उत्तरप्रदेश के चंदौली निवासी डॉ. अरुण कुमार सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। डॉ. अरुण कुमार सिंह का मूल निवास चंदौली जिले में है और वे भूमिहार समाज का एक प्रतिष्ठित नाम है। उनकी अध्यक्षता संगठन को एक नई दिशा देने में सहायक होगी।

इसके साथ ही, अरविन्द दुबे, जो कि मूल रूप से कानपुर निवासी और ब्राह्मण समाज से हैं, को संगठन का प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया गया। इनके अलावा, नई कार्यकारिणी में अजय राय को प्रदेश उपाध्यक्ष, मीनाक्षी राय को महिला प्रमुख, विवेक राय को मीडिया प्रभारी, और कैलाश नाथ को प्रदेश मंत्री बनाया गया, उपरोक्त के साथ ही कई पदाधिकारियों की घोषणा की गई।

सहकार भारती: सहकारिता आंदोलन में अहम भूमिका

सहकार भारती का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मजबूत करना है। संगठन, सहकारिता क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को एक मंच प्रदान करता है, जहां से वे अपने अनुभव और विचार साझा कर सकते हैं।

सहकार भारती के इस अधिवेशन में उत्तर प्रदेश की सहकारिता व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाओं और पहलों पर विचार किया गया। राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व की उपस्थिति में इस अधिवेशन ने सहकारिता आंदोलन में नई ऊर्जा का संचार किया।

डॉ. अरुण कुमार सिंह का योगदान

डॉ.अरुण कुमार सिंह सहकारिता क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं और उनके नेतृत्व में संगठन को नई ऊँचाइयाँ प्राप्त होने की उम्मीद है। भूमिहार समाज का यह गौरव सहकारिता आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए जाने जाते हैं और उनकी अध्यक्षता में सहकार भारती उत्तर प्रदेश को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में कार्य करेगा।

इस अधिवेशन ने सहकारिता आंदोलन में नए जोश का संचार किया है, और नई कार्यकारिणी के साथ सहकार भारती उत्तर प्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाए रखने की दिशा में अग्रसर है। डॉ. अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में सहकार भारती निश्चित रूप से अपने उद्देश्यों को और प्रभावी ढंग से पूरा करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश के सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिलेगी।

उत्तर प्रदेश में चक्रवाती तूफान ‘यागी’ का कहर: अगले 48 घंटे में भारी बारिश, कई जनपदों के स्कूलों में छुट्टी घोषित

लखनऊ: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘यागी’ का असर उत्तर प्रदेश में दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटे प्रदेश के कई जिलों के लिए भारी साबित हो सकते हैं।

तूफान के प्रभाव से राज्य के 20 से अधिक जिलों में मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रयागराज, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, बहराइच, चित्रकूट, हमीरपुर सहित अन्य जिलों में स्कूलों को कक्षा 1 से 8 तक के लिए बंद कर दिया गया है।

किन जिलों में होगी भारी बारिश?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दो से तीन दिन तक भारी बारिश की संभावना है। जिन जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, उनमें प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, चित्रकूट, कानपुर नगर, कानपुर देहात, अमेठी, सुल्तानपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर, बांदा, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, रामपुर शामिल हैं। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

आकाशीय बिजली गिरने की संभावना

मौसम विभाग ने राजधानी लखनऊ समेत बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, कौशांबी, गाजीपुर, प्रतापगढ़, चंदौली, और मुरादाबाद समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात की संभावना भी जताई है।

बाढ़ के हालात: पूर्वांचल में संकट गहराया

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पूर्वांचल के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सोनभद्र, मऊ, और गाजीपुर में 50 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। सोनभद्र में पिछले 24 घंटों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे रिहंद और ओबरा डैम के गेट खोलने पड़े। घंघरौल और नगवां बांध से भी पानी छोड़ा गया है, जिससे कर्मनाशा नदी उफान पर है।

चंदौली जिले में भी बाढ़ और बारिश का दोहरा संकट देखने को मिल रहा है। गंगा नदी चेतावनी बिंदु से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे कई गांव प्रभावित हो रहे हैं।

सरकार और प्रशासन की तैयारियां

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और निचले इलाकों से दूर रहें। आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह से तैनात हैं और प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी हैं।अगले 48 घंटे उत्तर प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारी बारिश, आकाशीय बिजली और बाढ़ जैसी आपदाओं से बचने के लिए प्रशासन और जनता दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।