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डॉ.राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय का 29वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 2,00,218 उपाधियां और 200 आंगनबाड़ी किटों का वितरण किया

अयोध्या, उत्तर प्रदेश: डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या का 29वां दीक्षांत समारोह प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण समारोह में राज्यपाल ने 2,00,218 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं और 102 मेधावी छात्र-छात्राओं को कुल 116 स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। समारोह में राज्यपाल ने समाज के निर्माण में विश्वविद्यालयों की अग्रणी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ शिक्षित करना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनाना भी होना चाहिए।

2,00,218 उपाधियां और 116 स्वर्ण पदक प्रदान

समारोह में आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय और इसके सम्बद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की 2,00,218 उपाधियां प्रदान कीं। इसके साथ ही 102 मेधावी छात्र-छात्राओं को कुल 116 स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए, जिनमें 33 कुलपति स्वर्ण पदक, 66 कुलाधिपति स्वर्ण पदक, और 17 दानस्वरूप स्वर्ण पदक शामिल थे। उल्लेखनीय है कि 14 छात्र-छात्राओं ने कुलपति और कुलाधिपति दोनों स्वर्ण पदक प्राप्त किए।

इस वर्ष, छात्राओं का प्रदर्शन अत्यधिक प्रभावशाली रहा, जहाँ 65 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले, जो कुल स्वर्ण पदकों का 64% रहा। वहीं 37 स्वर्ण पदक छात्रों को प्राप्त हुए, जो 36% रहा।

डिजिलॉकर के जरिए डिजिटल उपाधियों की पहल

राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह के दौरान डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए सफल विद्यार्थियों के अंक-पत्र और उपाधियों को भारत सरकार के डिजिलॉकर में अपलोड करवाया, जिससे छात्र अपने प्रमाणपत्रों को डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे।

आंगनबाड़ी किट वितरण और शिक्षा का विस्तार

समारोह में आनंदीबेन पटेल ने बहराइच जिले की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 200 आंगनबाड़ी किट प्रदान कीं, जो राज्यपाल की समाज सेवा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने पांच विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को विद्यालय के पुस्तकालय हेतु राजभवन से उपहार स्वरूप पुस्तकें भेंट कीं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए प्राथमिक और पूर्व प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को भी चित्रकला, भाषण, और संवाद प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।

स्वच्छता और सामाजिक बुराइयों पर राज्यपाल का संदेश, स्वरोजगार पर विशेष जोर

समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि स्वच्छता हमारा स्वभाव बननी चाहिए। उन्होंने नशा और दहेज प्रथा को समाज की सबसे बड़ी बुराइयां बताते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों को इनसे दूर रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नशामुक्ति का संकल्प लेने का आह्वान किया और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शिक्षित करना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग न केवल अपने व्यक्तिगत विकास के लिए, बल्कि देश के विकास में भी करें। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पांचवे स्थान पर है और वर्ष 2030 तक इसे तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विद्यार्थियों को संकल्पित होकर कार्य करना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सहयोग देना चाहिए।

विश्वविद्यालयों की शोध और विकास नीति की प्रशंसा

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा क्रियान्वित शोध एवं विकास नीति की प्रशंसा की और इसे शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए और साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

अयोध्या का विकास और संस्कृति व कार्यक्रम के अन्य मुख्य बिंदु

राज्यपाल ने कहा कि अयोध्या अपनी पुरातन संस्कृति के साथ सज-धज रही है और इसे एक धर्म नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या रेलवे स्टेशन का पुनरुद्धार और वंदे भारत ट्रेनों का संचालन इस विकास का हिस्सा है। समारोह के मुख्य अतिथि भगवती प्रकाश शर्मा, विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, और विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. प्रतिभा गोयल ने भी छात्र-छात्राओं को संबोधित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय का 29वां दीक्षांत समारोह एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कार्यक्रम साबित हुआ, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और समाज निर्माण के महत्व को समझाया।इस अवसर पर बहराइच सीडीओ मुकेश चंद्र, उप कुलसचिव दिनेश कुमार मौर्य, डॉ. रीमा श्रीवास्तव, विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, और स्कूली बच्चे भी उपस्थित रहे।

लापरवाही चरम पर: राजधानी में सड़कों के बैठने का बढ़ता संकट, अब लखनऊ के हजरतगंज में धँसी सड़क

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी, में सड़क धंसने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने सड़क धंसने की घटना के बाद, अब लखनऊ के पॉश इलाके हजरतगंज में सड़क धंसने का मामला सामने आया है। हजरतगंज के हलवासिया पुलिस चौकी के सामने की सड़क अचानक धंस गई, जिससे इलाके में यातायात बाधित हो गया।

हजरतगंज में सड़क धंसने का मामला

लखनऊ का हजरतगंज इलाका शहर का सबसे महत्वपूर्ण और भीड़भाड़ वाला क्षेत्र माना जाता है। हलवासिया पुलिस चौकी के सामने सड़क धंसने की घटना से स्थानीय लोग और प्रशासन चिंतित हैं। इस घटना के तुरंत बाद, नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेटिंग की गई।

लखनऊ में सड़कों के धंसने का संकट बढ़ा

यह घटना तब सामने आई है जब लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने धंसी सड़क की मरम्मत अभी चल ही रही थी। लखनऊ में सड़कों के धंसने की बढ़ती घटनाएं शहर के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। इन घटनाओं से नागरिकों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम को अब सड़कों की गुणवत्ता और उनकी नियमित देखरेख पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है।

लोक निर्माण विभाग की कार्रवाई

सड़क धंसने की खबर मिलते ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सहायक अभियंता बी.के. पाण्डेय भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन अब इस घटना की जांच कर रहा है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि सड़क की मरम्मत जल्द से जल्द की जाए, ताकि यातायात को फिर से सुचारू रूप से चलाया जा सके।

लखनऊ की सड़कों का रखरखाव और मरम्मत

लखनऊ नगर निगम और लोक निर्माण विभाग को शहर की सड़कों की लगातार निगरानी और रखरखाव की आवश्यकता है। हाल ही में हुई इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि सड़कों की देखरेख में लापरवाही हो रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लखनऊ में बारिश के बाद पानी के ठहराव और सही जल निकासी प्रणाली की कमी के कारण सड़कों के धंसने की घटनाएं बढ़ रही हैं।

सड़क धँसने के बाद आगे की कार्रवाई

लखनऊ में लगातार हो रही सड़कों के धंसने की घटनाओं के बाद, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग ने इन क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी है। विशेषज्ञ अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इन घटनाओं के पीछे का असली कारण क्या है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

लखनऊ के नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे धंसी हुई सड़कों के पास से गुजरते समय सतर्क रहें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। नगर निगम ने यह भी आश्वासन दिया है कि सड़कों की मरम्मत का कार्य जल्द ही पूरा किया जाएगा और स्थिति को नियंत्रण में लाया जाएगा।

लखनऊ में सड़क धंसने की बढ़ती घटनाएं शहर के बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल खड़ा करती हैं। हजरतगंज जैसे पॉश इलाके में सड़क धंसने की घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें शहर की सड़कों की गुणवत्ता और रखरखाव पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

उत्तर प्रदेश पुलिस: डीजीपी ने किया वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स-2024 के पदक विजेताओं का सम्मान

लखनऊ: 7 सितंबर से 14 सितंबर, 2024 के बीच ऑलमबर्ग, डेनमार्क में आयोजित 15वें वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स-2024 में उत्तर प्रदेश अग्निशमन और आपात सेवाओं के कर्मियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कुल 12 पदक जीते। इन कर्मियों को उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक प्रशान्त कुमार ने पुलिस मुख्यालय, लखनऊ में सम्मानित किया। पदक विजेताओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुलिस महानिदेशक प्रशंसा चिन्ह से सम्मानित किया गया।

वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स-2024: भारतीय अग्निशमन कर्मियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन

वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है, जिसमें अग्निशमन और आपात सेवा कर्मी विभिन्न खेल स्पर्धाओं में अपनी शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन करते हैं। इस वर्ष डेनमार्क में आयोजित 15वें वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स में उत्तर प्रदेश से अग्निशमन कर्मियों ने कुल 12 पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। इनमें 7 गोल्ड, 3 सिल्वर, और 1 ब्रॉन्ज पदक शामिल हैं।

फ़ायर फ़ाइटर्स पदक विजेताओं का विवरण

मुख्य आरक्षी चालक आनन्द प्रताप सिंह, जो फायर स्टेशन लालगंज, रायबरेली में नियुक्त हैं, ने इस प्रतियोगिता में अद्वितीय प्रदर्शन किया। उन्हें शॉट पुट, डिस्कस थ्रो, हैमर थ्रो, और 100×4 मीटर रिले रेस में गोल्ड मेडल प्राप्त हुए। इस उपलब्धि ने उन्हें प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शुमार कर दिया।

मुख्य आरक्षी चालक धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, जो फायर स्टेशन सिविल लाइंस, प्रयागराज में नियुक्त हैं, ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 400 मीटर रेस और 100×4 मीटर रिले रेस में गोल्ड मेडल प्राप्त किया, जबकि 100 मीटर और 200 मीटर रेस में सिल्वर मेडल हासिल किया।

आरक्षी फायरमैन जितेन्द्र कुमार यादव, जो अग्निशमन मुख्यालय लखनऊ में नियुक्त हैं, ने जैवलिन थ्रो में गोल्ड, ट्रिपल जंप में सिल्वर, 67 किलोग्राम भार वर्ग कुश्ती में सिल्वर, और डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

पुलिस महानिदेशक द्वारा सम्मान समारोह

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशान्त कुमार ने पदक विजेताओं को बधाई दी और उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन अग्निशमन कर्मियों ने खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर न सिर्फ अपनी सेवाओं का मान बढ़ाया, बल्कि पूरे प्रदेश का गौरव भी बढ़ाया है।

सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने पदक विजेताओं को प्रशंसा चिन्ह देने की घोषणा की और कहा कि यह उनके कठिन परिश्रम और प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कर्मियों को भविष्य में भी इसी तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

उत्तर प्रदेश अग्निशमन और आपात सेवाओं के कर्मी केवल आग बुझाने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए खेलों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स में उनकी भागीदारी और सफलता इस बात का प्रमाण है कि वे न केवल अपनी सेवाओं में दक्ष हैं, बल्कि शारीरिक रूप से भी अत्यधिक फिट और सक्षम हैं।

वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स 2024 में उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवाओं के कर्मियों ने अपने देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। इनकी उपलब्धियों को न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहा गया, बल्कि पुलिस मुख्यालय में भी इन्हें उचित सम्मान दिया गया। पुलिस महानिदेशक द्वारा किया गया यह सम्मान समारोह कर्मियों के अद्वितीय योगदान और समर्पण की गाथा को और प्रबल करता है।

दीना महराज की कचौड़ियों का स्वाद: बनारस की गलियों में 60 साल का अनोखा सफर

वाराणसी, लखनऊ: बनारस जिसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है, अपनी तंग गलियों और अनोखी खानपान परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

यहां के हर गली-नुक्कड़ पर आपको कुछ न कुछ स्वादिष्ट और अद्वितीय खाने की चीजें मिलेंगी, लेकिन भैरव बाजार से ठठेरी बाजार के बीच पड़ने वाले सोराकुंआ में एक ऐसा नाम है, जिसने अपने जायके से लोगों का दिल जीत लिया है। यह नाम है दीना महराज का, जो पिछले 60 वर्षों से अपनी मसालेदार कचौड़ियों और घुघनी चाट के लिए प्रसिद्ध हैं।

75 साल के दीना महराज और उनका अनोखा स्वाद

दीना महराज, जो अब 75 वर्ष के हो चुके हैं, आज भी कचौड़ी बनाने की अपनी पारंपरिक कला को उसी लगन और जुनून के साथ निभाते हैं, जैसे उन्होंने वर्षों पहले इसे शुरू किया था। उनकी कचौड़ियां बनारस के लोगों के बीच एक खास जगह रखती हैं, और जो भी एक बार उनके हाथ का बना हुआ खाता है, वह बार-बार वापस आता है। कचौड़ी में इस्तेमाल होने वाले मसालों की तुलना महराज आयुर्वेद से करते हैं, जिसमें हर मसाला न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

दुकानदारी का समय और स्थान

दीना महराज की दुकान का समय भी कुछ खास है। वह रोज़ाना शाम चार बजे से लेकर छह बजे तक ही अपनी दुकान खोलते हैं। तंग गलियों के बीच यह दो घंटे का समय लोगों के लिए सोराकुआं की गलियों में एक जश्न जैसा होता है। यहां आने वाले लोग जानते हैं कि इस दौरान उन्हें बेहतरीन कचौड़ी, घुघनी और चटनी का स्वाद चखने को मिलेगा।

घुघनी और काला चना की विशेषता

दीना महराज की कचौड़ियों के साथ जो घुघनी (काला चना) परोसी जाती है, उसकी भी अपनी खासियत है। इसे दीना महराज खुद खास मसालों और तरीकों से तैयार करते हैं। साथ ही, पुदीने की खट्टी चटनी की भी अपनी एक पहचान है, जो पूरे साल बारहों महीने उपलब्ध रहती है। दीना महराज के कस्टमर कहते हैं कि घुघनी और चटनी के बिना उनकी कचौड़ी अधूरी है।

कोयले की धीमी आंच पर तैयार होती हैं कचौड़ियां

दीना महराज की कचौड़ी की एक और खास बात यह है कि यह कोयले की धीमी आंच पर तैयार की जाती हैं। हींग और मसालों की खुशबू कोयले की आंच पर और भी बढ़ जाती है, जिससे कचौड़ी का स्वाद बेहद लाजवाब हो जाता है। कचौड़ियों में भरा जाता है मसालेदार आलू, जो हर बाइट में ज़बर्दस्त स्वाद का एहसास कराता है। इसे खाने के बाद ग्राहक महराज की कचौड़ियों के दीवाने हो जाते हैं।

60 वर्षों की धरोहर

दीना महराज की कचौड़ी की दुकान कोई आज की बात नहीं है। इस स्वादिष्ट सफर की शुरुआत 60 साल पहले हुई थी। महराज और उनके परिवार के सदस्य मिलकर इस दुकान को संभालते हैं। उनके दोनों बेटे भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में उनका साथ दे रहे हैं। यह सिर्फ एक दुकान नहीं है, बल्कि एक ऐसी धरोहर है जो बनारस के लोगों के दिलों में बसी हुई है।

पौन घंटे का इंतजार, लेकिन स्वाद का वादा

दीना महराज की कचौड़ी के दीवाने जानते हैं कि अगर वे शाम 4 से 6 बजे के बीच सोराकुआं पहुंचे, तो उन्हें यहां की खास कचौड़ी का स्वाद जरूर चखने को मिलेगा। लेकिन इस कचौड़ी के लिए थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है। एक घान (बड़ी कचौड़ी) को पकने में कम से कम पौन घंटा लगता है। महराज इस धीमी आंच और सब्र के साथ कचौड़ियों को तैयार करते हैं ताकि उनका स्वाद और भी बेहतर हो जाए।

सीमित समय और उत्पादन

दीना महराज की दुकान का संचालन सिर्फ दो घंटे का है, लेकिन इन दो घंटों में भी वह सिर्फ तीन से चार घान ही बनाते हैं। हर घान में भरी होती हैं मसालेदार आलू की कचौड़ियां, जिनका स्वाद आपको बार-बार अपनी ओर खींचेगा। दीना महराज को अपने सीमित उत्पादन और ग्राहकों की संतुष्टि का गर्व है। वह मानते हैं कि कम समय में गुणवत्ता बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

आज भी सिर्फ 10 रुपए में लाजवाब स्वाद

जहां आजकल हर जगह महंगाई का असर है, वहीं दीना महराज ने अपने कचौड़ी के दाम को 10 रुपए ही रखा है। महराज का कहना है कि वह इस दर पर संतुष्ट हैं और उन्हें अपने ग्राहकों को बेहतरीन स्वाद देने में खुशी मिलती है। बनारस में इतने सस्ते दाम पर ऐसा स्वाद मिलना दुर्लभ है, और शायद यही कारण है कि दीना महराज की दुकान पर हर रोज लोगों की भीड़ लगी रहती है।

दीना महराज की विरासत: आगे का सफर

दीना महराज ने जो स्वाद और परंपरा अपने जीवन के 60 वर्षों में बनाई है, उसे अब उनके दोनों बेटे भी आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वे महराज की तरह ही कचौड़ी बनाने की इस कला को सीख रहे हैं और ग्राहकों को वही पुराने स्वाद का अनुभव करा रहे हैं। दीना महराज का यह सफर सिर्फ एक दुकानदारी नहीं है, बल्कि यह बनारस की सांस्कृतिक और खानपान धरोहर का हिस्सा है।

बनारस की पहचान का हिस्सा

दीना महराज की दुकान बनारस की खानपान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग जानते हैं कि अगर उन्हें असली बनारसी कचौड़ी का स्वाद चखना है, तो सोराकुआं की इस तंग गली में आना जरूरी है। महराज का यह स्वाद केवल एक कचौड़ी की दुकान नहीं है, बल्कि बनारस की संस्कृति और स्वाद का प्रतीक है।

बनारस की तंग गलियों में छुपी दीना महराज की यह दुकान आज भी लोगों को अपने खास स्वाद और परंपरा से जोड़कर रखे हुए है। 75 वर्ष की उम्र में भी दीना महराज अपने कस्टमर्स को वह पुराना स्वाद देने का प्रयास करते हैं, जो उन्होंने दशकों पहले शुरू किया था। बनारस की यह दुकान न केवल एक स्वाद का सफर है, बल्कि एक विरासत है जिसे महराज और उनका परिवार मिलकर संजोए हुए हैं।

BOLLYWOOD: एस.आर.ग्रुप, लखनऊ में राजकुमार राव का धमाल, 4000 छात्रों के साथ साझा की फिल्म की झलक

लखनऊ: फ़िल्म अभिनेता राजकुमार राव ने एस आर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, बक्शी का तालाब, लखनऊ में अपनी आगामी फिल्म “विकी विद्या की वो वाली वीडियो” का प्रमोशन किया। यह फिल्म 11 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है, और इस प्रमोशनल इवेंट में राजकुमार राव ने छात्रों के साथ खास बातचीत की और फिल्म के गाने “तुम जो मिले हो” पर डांस भी किया।

राजकुमार राव ने लखनऊ के छात्रों के साथ की खास मुलाकात

फिल्म अभिनेता राजकुमार राव ने लखनऊ के एस आर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के बीटेक, एमबीए, आयुष, और आईएमबीए जैसे कोर्सों के 4000 से अधिक छात्रों के साथ अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के लिए मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने फिल्म के बारे में विस्तार से बताया और छात्रों के साथ बातचीत की। उन्होंने फिल्म के गीत “तुम जो मिले हो” पर छात्रों के साथ डांस भी किया, जिससे छात्रों में काफी उत्साह देखने को मिला।

“विकी विद्या की वो वाली वीडियो” पर चर्चा

राजकुमार राव की यह फिल्म “विकी विद्या की वो वाली वीडियो” 11 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में राजकुमार राव के साथ तृप्ति डिमरी विद्या के किरदार में नजर आएंगी। तृप्ति ने भी इस इवेंट के दौरान वीडियो मैसेज के जरिए छात्रों से मुलाकात का वादा किया और कहा कि वे जल्द ही एस आर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट आएंगी।

प्रमोशनल इवेंट में फिल्म की चर्चा

प्रमोशनल इवेंट के दौरान राजकुमार राव ने बताया कि यह फिल्म रोमांस और कॉमेडी से भरपूर है और इसका निर्देशन एक बेहतरीन टीम ने किया है। फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने बताया कि फिल्म के गाने “तुम जो मिले हो” को दर्शकों द्वारा बेहद पसंद किया जा रहा है और इस गाने पर डांस करते हुए उन्होंने छात्रों को अपनी डांस मूव्स भी सिखाई।

एस आर ग्रुप के चेयरमैन और छात्रों की प्रतिक्रिया

एस आर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन और एमएलसी पवन सिंह चौहान ने राजकुमार राव और उनकी टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने छात्रों के साथ इस खास मौके को साझा किया और फिल्म प्रमोशन के लिए आए अभिनेता और सह-अभिनेताओं को सम्मानित भी किया। इसके अलावा वाइस चेयरमैन पीयूष सिंह चौहान और वाइस चेयरपर्सन सुष्मिता सिंह चौहान भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

इंस्टीट्यूट के सभी निदेशक, उप निदेशक, सहायक निदेशक, विभागाध्यक्ष, और फैकल्टी स्टाफ भी इस इवेंट का हिस्सा बने। छात्रों ने राजकुमार राव की अदाकारी और उनकी फिल्म के प्रति गहरी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने अपने अभिनय कौशल से सबको प्रभावित किया। छात्रों का कहना था कि यह उनके लिए एक अनमोल अनुभव था, जहां उन्हें अपने पसंदीदा अभिनेता से मिलने और बातचीत करने का मौका मिला।

फिल्म “विकी विद्या की वो वाली वीडियो” का प्रमोशन

“विकी विद्या की वो वाली वीडियो” एक रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म है जिसमें राजकुमार राव और तृप्ति डिमरी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म के गाने “तुम जो मिले हो” को प्रमोट करने के लिए राजकुमार राव ने एस आर ग्रुप के छात्रों के साथ विशेष डांस मूव्स की प्रस्तुति दी। उन्होंने छात्रों से कहा कि फिल्म को वे जरूर अपने परिवार के साथ सिनेमाघरों में जाकर देखें।

एस.आर.ग्रुप में फिल्म प्रमोशन की अहमियत

लखनऊ का एस आर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट एक प्रमुख शिक्षण संस्थान है, और इस तरह के बड़े इवेंट्स का आयोजन करना छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इस प्रमोशनल इवेंट ने न सिर्फ छात्रों को मनोरंजन का मौका दिया बल्कि उन्हें फिल्मी दुनिया के बारे में जानने और उसमें हो रहे बदलावों को समझने का भी अवसर मिला।

इवेंट के दौरान छात्रों ने राजकुमार राव से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सवाल पूछे और अभिनेता ने उनके सवालों का विस्तार से उत्तर दिया। छात्रों ने इस इंटरएक्टिव सेशन को बहुत सराहा और कहा कि यह उनके लिए एक यादगार अनुभव था।

फिल्म प्रमोशन के माध्यम से छात्रों का मनोरंजन और शिक्षा

फिल्म प्रमोशन के ऐसे इवेंट्स सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होते, बल्कि ये छात्रों के लिए एक सीखने का भी मौका होते हैं। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग जब छात्रों के बीच आते हैं, तो वे अपने अनुभव और संघर्षों के बारे में बताते हैं, जो छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। राजकुमार राव ने भी अपने करियर से जुड़े अनुभव साझा किए और छात्रों को मेहनत और समर्पण का महत्व बताया।

राजकुमार राव के अभिनय कौशल की तारीफ

प्रमोशनल इवेंट के दौरान राजकुमार राव के अभिनय कौशल की सभी ने सराहना की। उनके अभिनय का सशक्त मंचन छात्रों और फैकल्टी के सदस्यों को बहुत पसंद आया। राजकुमार राव ने छात्रों को यह भी बताया कि कैसे उन्होंने अपने करियर में कठिनाइयों का सामना किया और उनसे सीख लेकर आगे बढ़े।

फिल्म रिलीज का इंतजार

“विकी विद्या की वो वाली वीडियो” के रिलीज का छात्रों को बेसब्री से इंतजार है। राजकुमार राव ने इवेंट के अंत में सभी छात्रों और फैकल्टी से कहा कि वे इस फिल्म को जरूर देखें और अपने परिवार के साथ इसे सिनेमाघरों में जाकर एंजॉय करें। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मनोरंजन और संदेश, दोनों से भरपूर है।

एस.आर.ग्रुप का योगदान

एस आर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट ने इस इवेंट का सफल आयोजन किया, जो छात्रों के लिए न सिर्फ मनोरंजन का जरिया बना बल्कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियों को समझने का भी मौका मिला। संस्थान के चेयरमैन पवन सिंह चौहान, वाइस चेयरमैन पीयूष सिंह चौहान, और वाइस चेयरपर्सन सुष्मिता सिंह चौहान ने इस इवेंट को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इवेंट के अंत में एमएलसी पवन सिंह चौहान ने राजकुमार राव और उनकी टीम को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।