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सहकार भारती: रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी बने प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ, सहकारिता में पारदर्शिता और युवाओं को स्वरोजगार की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

लखनऊ: रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी, जो प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, उन्हें सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ नियुक्त किया गया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रशिक्षित कार्यकर्ता और कुशल विधिवेत्ता के रूप में पहचान बनाने वाले रवितेश प्रताप सिंह ने अपने कार्यक्षेत्र और समाज के प्रति योगदान के कारण व्यापक सराहना अर्जित की है। इस नई नियुक्ति के साथ, उनका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाना है, जिससे राज्य आर्थिक रूप से और भी अधिक समृद्ध हो सके।

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का परिचय

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी प्रतापगढ़ के मूल निवासी हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक प्रशिक्षित कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने समाज सेवा की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। वह एक कुशल अधिवक्ता होने के साथ-साथ राज्य विधि अधिकारी के रूप में लखनऊ उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विधि और समाजशास्त्र में परास्नातक (LLM और MA) की शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव का इस्तेमाल समाज के विभिन्न वर्गों को न्याय दिलाने और सहकारिता के क्षेत्र में सुधार लाने में किया है।

सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ के रूप में नियुक्ति

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी को सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ नियुक्त किया गया है। सहकार भारती, सहकारिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली एक प्रमुख संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य सहकारिता को सशक्त बनाना और इसे समाज में एक मजबूत आर्थिक ढांचे के रूप में स्थापित करना है। रवितेश की इस नियुक्ति का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में विधिक विशेषज्ञता को और अधिक सशक्त बनाना है, जिससे सहकारी संस्थाएं कानूनी दृष्टिकोण से अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बन सकें।

सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता और सुचित्रा के लिए लड़ाई

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का मुख्य उद्देश्य सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता और सुचित्रा (नैतिकता) को बढ़ावा देना है। उन्होंने सहकारिता के कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए हैं। उनकी यह लड़ाई केवल कानूनी मसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने युवाओं को सहकारिता के क्षेत्र में जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

युवाओं को सहकारिता में जोड़कर स्वरोजगार की ओर ले जाना

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का मानना है कि सहकारिता के क्षेत्र में युवाओं को जोड़ना समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि सहकारिता केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग और विश्वास को मजबूत करने का एक माध्यम है। उन्होंने युवाओं को सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार की ओर ले जाने की दिशा में कई पहल की हैं। उनके अनुसार, यदि युवा सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय होते हैं, तो यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगा।

उत्तर प्रदेश को सहकारी उद्यमशील राज्य बनाने का उद्देश्य

रवितेश का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक सहकारी उद्यमशील राज्य बनाना है। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के अनेक अवसर हैं। यदि सहकारी संस्थाएं पारदर्शी और नैतिक रूप से कार्य करें, तो वे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और विकास के अवसर पैदा कर सकती हैं। इसके साथ ही, सहकारिता के माध्यम से राज्य के संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है, जिससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में प्रयास

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का एक और बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से भारत के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। उनका मानना है कि यदि सहकारी संस्थाएं मजबूत हों और राज्य की आर्थिक नीतियां सही दिशा में हों, तो उत्तर प्रदेश न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत आर्थिक शक्ति बन सकता है। उनका यह उद्देश्य भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में सहायक होगा।

गरीबों के लिए निशुल्क विधि परामर्श

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी की विधि सेवा केवल अदालत तक सीमित नहीं है। वह समाज के गरीब और वंचित वर्गों के लिए निशुल्क विधि परामर्श भी प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, न्याय केवल उन लोगों के लिए नहीं होना चाहिए जो इसे खरीद सकते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को न्याय पाने का अधिकार है। उनके इस कदम से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को विधिक सहायता मिलती है, जिससे उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने का अवसर मिलता है।

राज्य विधि अधिकारी रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी की उपलब्धियां

रवितेश प्रताप सिंह ने अपनी विधि और सहकारिता सेवाओं के माध्यम से कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उच्च न्यायालय में राज्य विधि अधिकारी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार और समाज के हित में फैसले दिलाने में मदद की है। इसके अलावा, उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिससे सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है। उनके प्रयासों से सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार के कई अवसर उत्पन्न हुए हैं, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को आर्थिक सहायता मिली है।

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी की सहकारिता और विधिक क्षेत्र में की गई सेवाएं और उनकी समाज सेवा की प्रतिबद्धता उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करती है। सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ के रूप में उनकी नियुक्ति उनके नेतृत्व और अनुभव का प्रमाण है। उनके द्वारा सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने, युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने और उत्तर प्रदेश को एक सहकारी उद्यमशील राज्य बनाने के प्रयास निश्चित रूप से राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।

लखनऊ: योगी सरकार की कार्यशैली में सवाल उठाता भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गे “श्री हनुमान टेकरी धाम” मंदिर पर अनाधिकृत कब्जे के लिए पुनः हुए सक्रिय, गुण्डा एक्ट की कार्रवाई अब भी लंबित

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इन धार्मिक स्थलों में से एक है श्री हनुमान टेकरी धाम, जो पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के उत्तरी ज़ोन के सैरपुर थाना क्षेत्र के फ़रूख़ाबाद ग्राम पंचायत के सैदापुर गाँव में स्थित है। हाल ही में इस प्राचीन मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों ने मंदिर की भूमि पर अनाधिकृत कब्जे की मंशा से गतिविधियों को फिर से तेज कर दिया है। यह मामला वर्षों से विवादित है और अब भी इसमें कई कानूनी प्रक्रिया लंबित हैं।

भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव: लगातार विवादों में

अमरेन्द्र यादव, जो सैरपुर थाना क्षेत्र के उम्मरभारी गाँव का निवासी है, पहले भी श्री हनुमान टेकरी मंदिर की भूमि पर कब्जे के कई प्रयास कर चुका है। वर्ष 2023 में भी, इसने मंदिर में आयोजित भंडारे में अनधिकृत रूप से अपने बैनर-पोस्टर लगाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। यादव ने मंदिर की भूमि पर कब्जा करने के लिए अपने पियक्कड़ साथियों के साथ भंडारा आयोजित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, स्थानीय प्रशासन की तत्परता के कारण इस घटना को समय पर रोक दिया गया था। तब यादव और उसके गुर्गों ने लगभग 10 दिनों तक मंदिर परिसर में डेरा डाले रखा था।

श्री हनुमान टेकरी धाम मंदिर: ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

श्री हनुमान टेकरी धाम न केवल एक प्राचीन मंदिर है, बल्कि यह स्थानीय जनता की आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। मंदिर की भूमि, जो सरकारी स्वामित्व में है, सदियों से धार्मिक गतिविधियों और जनकल्याण के लिए उपयोग होती आई है। इस स्थान पर नियमित रूप से धार्मिक आयोजन होते हैं और यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।

हालांकि, मंदिर की भूमि को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। इनमें से सबसे प्रमुख मामला भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव का है, जिसने इस भूमि पर कब्जा करने के लिए कई बार अवैध प्रयास किए हैं और लगातार प्रयासरत भी है।

मंदिर के महंत रामेश्वर दास जी की अपील

मंदिर के महंत, श्री रामेश्वर दास जी महाराज, ने भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों से मंदिर परिसर के साथ-साथ स्वयं को भी बचाने के लिए शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है। महंत जी का कहना है कि भूमाफ़िया और उसके सहयोगी बार-बार मंदिर की भूमि पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं, जिससे मंदिर की सुरक्षा और धार्मिक आस्थाएं खतरे में पड़ गई हैं। उनका यह भी आरोप है कि अमरेन्द्र यादव के इरादे केवल भूमि हथियाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह मंदिर की धार्मिक पहचान को भी धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव के कब्जे की कोशिशें

ये तस्वीर बीते साल मंदिर परिसर में हुए भंडारे की है, जहां पर अमरेन्द्र यादव के पियक्कड़ गुर्गों द्वारा भंडारे के समय मंदिर परिसर में शराब पीकर विवाद किया, जिसके बाद शिकायत पर पहुँची सैरपुर थाने की पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो उनसे भी उलझने की कोशिस लेता हुआ अमरेन्द्र यादव का गुर्गा यह अमित यादव है। आपको बता दें कि बीते पाँच-सात वर्षों में, भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव ने कई बार मंदिर की जमीन पर कब्जा करने के प्रयास किए हैं। इनमें से एक सबसे विवादित घटना तब हुई जब बीकेटी तहसील की जमीन को सदर एसडीएम ने एक मुस्लिम परिवार के नाम कर दिया था। यह कदम बिना किसी उचित प्रक्रिया के कूटनीतिक दस्तावेजों के माध्यम से उठाया गया था, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश सरकार के हस्तक्षेप से निरस्त कर दिया गया।

मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान लेने के बाद तत्कालीन ज़िलाधिकारी लखनऊ अभिषेक प्रकाश ने इस आदेश को रद्द कर दिया और जमीन को ग्राम सभा के स्वामित्व में वापस सौंपा। इस मामले के बाद स्थानीय लेखपाल, बीकेटी एसडीएम और सदर एसडीएम को हटा दिया गया था और विभागीय जांच शुरू हुई थी। हालांकि, आज तक यह जांच रिपोर्ट सबमिट नहीं हो पाई है, जिसके कारण मामला अब भी लंबित है।

गुण्डा एक्ट के तहत कार्रवाई और जेसीपी कार्यालय में लंबित मामला

जब मंदिर में कब्जे के प्रयास बढ़ने लगे, तो स्थानीय पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की। सैरपुर थाने की पुलिस ने भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों को मंदिर परिसर से बाहर का रास्ता दिखाया और उनके खिलाफ गुण्डा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि, यह मामला अभी तक जेसीपी (जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस) कार्यालय में लंबित है, जिसके कारण अमरेन्द्र यादव और उसके सहयोगी अब भी सक्रिय हैं। ग़ौरतलब है भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव ने बीकेटी तहसील के मुबारकपुर, पल्हरी व अपने गाँव उम्मरभारी के आसपास कई सरकारी ज़मीनें भी बेंच डाली हैं।

शासन-प्रशासन की ढिलाई या प्रभाव?

मंदिर की भूमि को लेकर भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव के प्रयास और प्रशासनिक ढिलाई के चलते यह मामला वर्षों से विवादों में बना हुआ है। उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद भी, आज तक जांच रिपोर्ट सबमिट नहीं हो पाई है, जिससे यह साफ होता है कि मामले में कुछ बड़े लोगों का प्रभाव है। विभागीय जांच की धीमी गति और सरकारी कार्रवाई की कमी के कारण भूमाफ़िया और उसके गुर्गों की मंशा आज भी मंदिर की जमीन हड़पने की बनी हुई है। इससे साफ होता है कि प्रशासनिक तंत्र में कहीं न कहीं खामी है, जिसके कारण इस विवाद का निपटारा नहीं हो पा रहा है।

स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया

मंदिर की भूमि को लेकर हो रही इस तरह की गतिविधियों से स्थानीय जनता भी परेशान है। क्षेत्र के लोग मानते हैं कि यह मंदिर उनकी धार्मिक आस्था का केंद्र है और भूमाफ़िया द्वारा किए जा रहे प्रयास उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।

लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन समय पर कठोर कदम उठाए, तो इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकती हैं। वे यह भी उम्मीद करते हैं कि सरकार इस मामले में सख्त कदम उठाएगी और मंदिर की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए उचित कार्रवाई करेगी।

उत्तर प्रदेश सरकार का रुख

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भूमाफ़ियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दावा किया गया है, लेकिन इस मामले में प्रशासन की ओर से अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भूमाफ़िया मुक्त उत्तर प्रदेश का नारा दिया था, लेकिन श्री हनुमान टेकरी धाम के मामले में यह दावा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है और जनता को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस पर कोई ठोस कदम उठाएगी। यदि सरकार समय रहते कार्रवाई नहीं करती, तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है।

मंदिर की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी

श्री हनुमान टेकरी धाम, लखनऊ का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जिसकी भूमि को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों के अनाधिकृत कब्जे की कोशिशें और प्रशासनिक कार्रवाई की कमी ने इस मामले को और जटिल बना दिया है। मंदिर की भूमि की सुरक्षा और धार्मिक आस्था की रक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनता को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में जल्द ही उचित कदम उठाएंगे, जिससे मंदिर की भूमि सुरक्षित रहे और धार्मिक आस्था को कोई ठेस न पहुंचे। आशा है कि प्रशासनिक तंत्र और सरकार इस मामले को गंभीरता से लेंगे और मंदिर की भूमि को अवैध कब्जे से बचाने के लिए उचित कदम उठाएंगे।

LUCKNOW: राजभवन में ‘स्वच्छता सेवा पखवाड़ा-2024’ के तहत सफाई कर्मचारियों और परिजनों के लिए स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा शिविर का आयोजन

56 सफाई कर्मियों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य जांच और 12 विभागों की योजनाओं से लाभान्वित किया गया

लखनऊ, 24 सितंबर 2024: ‘स्वच्छता सेवा पखवाड़ा-2024’ के तहत राजभवन में सफाई कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर और सामाजिक सुरक्षा सहायता शिविर का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल, डॉ.सुधीर महादेव बोबडे द्वारा किया गया। इस अवसर पर 56 सफाई कर्मचारियों और उनके परिजनों की विभिन्न स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें 12 सरकारी विभागों की योजनाओं से लाभान्वित किया गया।

स्वच्छता कर्मियों के योगदान को अपर मुख्य सचिव ने सराहा

अपर मुख्य सचिव डॉ.सुधीर महादेव बोबडे ने अपने सम्बोधन में सफाई कर्मचारियों के महत्त्व पर जोर देते हुए कहा कि स्वच्छता सेवा पखवाड़ा का सबसे महत्वपूर्ण अंग यही कर्मचारी हैं। इनका स्वास्थ्य और सुरक्षा शासन की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने और विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिविर में उपस्थित सफाई कर्मियों और उनके परिजनों का स्वागत किया और विभिन्न विभागों के स्टालों का निरीक्षण किया।

स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा सहायता शिविर का आयोजन

इस शिविर में सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारजनों की नेत्र, ईएनटी, रक्तचाप, मधुमेह, अस्थि रोग समेत अन्य चिकित्सकीय जांच की गई। इसके साथ ही, सामाजिक सुरक्षा सहायता शिविर में सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने हेतु विभिन्न काउंटर लगाए गए। इनमें जॉब कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, उज्ज्वला योजना, वृद्धा पेंशन योजना, बैंकिंग सेवाएं, शहरी आवास योजना, पेयजल कनेक्शन, जनधन योजना, और इन्द्रधनुष जैसी योजनाओं के काउंटर शामिल थे।

12 विभागों की योजनाओं से मिला लाभ

शिविर में ग्राम विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, जल निगम, जिला शहरी विकास एजेंसी, जिला पूर्ति विभाग, प्रोबेशन विभाग, मंध्याचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड जैसे 12 सरकारी विभागों ने भाग लिया। इन विभागों ने सफाई कर्मचारियों और उनके परिजनों को सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया और उन्हें संबंधित योजनाओं से लाभान्वित किया।

विशेष अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर विशेष सचिव, राज्यपाल, प्रकाश गुप्ता ने उपस्थित लोगों को स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में अपर नगर मजिस्ट्रेट, सुश्री फाल्गुनी सिंह, राजभवन चिकित्सालय के चिकित्सक, राजभवन के अधिकारी और सफाई कर्मचारी एवं उनके परिजन भी उपस्थित रहे।

बलिया: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का छठा दीक्षांत समारोह सम्पन्न

  • 23,242 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान, राज्यपाल ने 150 आंगनबाड़ी किटें वितरित कीं

लखनऊ, 24 सितंबर 2024: जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया का छठा दीक्षांत समारोह आज राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। समारोह में 23,242 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिसमें 59% छात्राएं थीं। 43 पदकों में से 34 छात्राओं ने प्राप्त किए, जो कुल पदकों का 81% है। इस विशेष उपलब्धि पर राज्यपाल ने गर्व प्रकट किया और कहा कि बेटियाँ हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

समारोह के दौरान सभी उपाधियों को डिजीलॉकर में अपलोड किया गया, जिससे छात्र-छात्राओं को डिजिटली अपनी डिग्री प्राप्त करने में आसानी होगी।

समारोह के मुख्य बिंदु

  1. विद्यार्थियों को रोजगार देने वाले बनने की प्रेरणा:
    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को न केवल रोजगार मांगने वाले बल्कि रोजगार देने वाले बनाने की दिशा में प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि भारत सरकार कौशल विकास के लिए बजट में अलग से प्रावधान कर रही है और इसका लाभ विद्यार्थियों को मिलना चाहिए।
  2. शैक्षणिक प्रदर्शन और व्यक्तित्व विकास:
    राज्यपाल ने गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि मेडल का महत्त्व सिर्फ शैक्षणिक प्रदर्शन में नहीं, बल्कि इसके प्रभाव को व्यवहार और व्यक्तित्व में भी दिखना चाहिए। उन्होंने छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर विशेष रूप से गर्व व्यक्त किया और उन्हें भविष्य में भी इस सम्मान को बनाए रखने की प्रेरणा दी।
  3. आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए 150 किटें वितरित:
    समारोह के दौरान राज्यपाल ने आंगनबाड़ी के बच्चों के समग्र विकास के लिए 150 किटें प्रदान कीं। इन किटों में तौलिया, कंघी, आईना, सुई-धागा, बटन, नेल कटर, और साबुन जैसी वस्तुएं शामिल थीं, जो बच्चों की स्वच्छता और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए दी गईं।
  4. सामाजिक और कृषि विकास पर जोर:
    राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वे पद्मश्री प्राप्त किसानों से मिलकर उनसे राय लें और अपने क्षेत्र के किसानों को आगे बढ़ाएं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को वार्षिक कैलेंडर बनाकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को ज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रोत्साहन मिले।
  5. कृषि और उद्योग में योगदान:
    राज्यपाल ने शिक्षकों को भी लेखन कार्य और शोध में योगदान देने की सलाह दी ताकि विद्यार्थियों को औद्योगिक क्षेत्रों में इंटर्नशिप का अवसर मिल सके और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
  6. प्रशासनिक भवन का लोकार्पण और स्मारिका का विमोचन:
    राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन का लोकार्पण किया और विश्वविद्यालय की स्मारिकाओं का विमोचन भी किया।

समारोह में उपस्थित विशिष्ट अतिथिगण

इस अवसर पर बलिया के जिलाधिकारी प्रवीण कुमार, मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज, जनप्रतिनिधिगण, विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद-विद्यापरिषद सदस्य, सम्बद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।

ऊर्जा मंत्री ए.के.शर्मा से विद्युत संविदा संगठन के पदाधिकारियों ने की मुलाकात

  • ऊर्जा मंत्री ने निविदा/संविदा कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कराने का दिया आश्वासन
  • संगठन के पदाधिकारियों द्वारा 23 सितंबर, 2024 के कार्यक्रम को किया गया स्थगित

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के.शर्मा से शनिवार को पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने मुलाकात की और विद्युत् विभाग में कार्य कर रहे निविदा/संविदा कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया।

ऊर्जा मंत्री ने संगठन की मांगों तथा निविदा/संविदा कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार करने और संगठन पदाधिकारियों व प्रबंधन कार्मिकों की उपस्थिति में समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया। ऊर्जा मंत्री जी के आश्वासन के बाद संगठन के पदाधिकारियों द्वारा 23 सितंबर, 2024 के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।

विद्युत संविदा मज़दूर संगठन ने विद्युत् विभाग के संविदा कर्मचारियों की समस्याओं से संबंधित एक ज्ञापन ऊर्जा मंत्री जी को दिया और उनकी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने असिस्टेंट बिलिंग के कार्य में शिकायत के नाम पर हो रही छंटनी और स्थानांतरण के आदेशों पर पुनर्विचार करने का ऊर्जा मंत्री से अनुरोध किया।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि विद्युत् विभाग के सभी आउटसोर्स संविदा कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति प्रदेश सरकार संवेदनशील है। विद्युत् दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जल्द ही शटडाउन प्रक्रिया में सुधार के लिए एक पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां लाइन चालू करने के लिए ओटीपी प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे दुर्घटनाओं पर अंकुश लगेगा। कार्मिकों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे संविदा कर्मचारियों का शोषण रोका जा सकेगा।