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यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी बना निवेश का प्रमुख केंद्र: उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो- 2024 के शुभारंभ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को परिभाषित किया

ग्रेटर नोएडा/लखनऊ, 25 सितंबर 2024: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य निवेश के लिए तेजी से विकसित हो रहा है, और इसे लेकर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को उनके प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को परिभाषित किया है, जो किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होती है। उनके नेतृत्व में यूपी तेजी से उद्यम प्रदेश बन गया है।” उप राष्ट्रपति ने ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2024 के उद्घाटन के दौरान ये बातें कही।

ट्रेड शो की मुख्य बातें

  • उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने की योगी आदित्यनाथ की तारीफ:
    उप राष्ट्रपति ने यूपी की कानून-व्यवस्था और मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ ने यूपी को देश के विकास का प्रमुख इंजन बना दिया है।
  • वियतनाम बना पार्टनर कंट्री:
    इस ट्रेड शो में वियतनाम को पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल किया गया है, जिससे भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की उम्मीद है।
  • एमएसएमई बना रोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र:
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि यूपी में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जो कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार सृजन करती हैं।
  • यूपी के पास 75 जीआई टैग्स:
    यूपी के पास सबसे अधिक 75 जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग्स हैं, जो राज्य के उत्पादों की वैश्विक पहचान को मजबूत करते हैं।

ट्रेड शो के महत्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विचार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब देश के विकास का ग्रोथ इंजन बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यूपी अब एमएसएमई के बेहतरीन बेस और सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तेजी से विकसित हो रहा है। 2017 में शुरू की गई एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना ने राज्य के शिल्पकारों और हस्तशिल्पियों को एक नई दिशा दी है, जिससे राज्य में रोजगार सृजन की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं।

“कोरोना काल के दौरान यूपी लौटे श्रमिकों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया,” उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि यूपी के पास सबसे बड़ा एमएसएमई आधार है और प्रदेश की आर्थिक शक्ति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के लिए यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

वियतनाम का सहयोग और भविष्य की संभावनाएं

इस ट्रेड शो में वियतनाम के शामिल होने पर उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर है। वियतनामी व्यंजनों और हस्तशिल्प को भी शोकेस किया जा रहा है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में और प्रगाढ़ता आएगी।

निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में यूपी की अग्रणी भूमिका

उप राष्ट्रपति ने यूपी में तेजी से विकसित हो रहे विश्वस्तरीय एयरपोर्ट्स, एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व क्षमता के कारण यूपी अब देश के निवेशकों का चहेता गंतव्य बन गया है। राज्य ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख परियोजनाओं के जरिए राज्य को एक नया औद्योगिक केंद्र बनाया है।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2024 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में हो रहा है। इसमें 70 देशों के लगभग 2500 स्टॉल्स लगे हैं और 4 लाख फुटफॉल की संभावना है। इस शो में यूपी के एमएसएमई, ओडीओपी और महिला उद्यमियों को वैश्विक मंच पर अपने उत्पादों को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

स्वस्थ फेफड़े हैं अच्छे स्वास्थ्य की गारंटी : डॉ. सूर्यकान्त

वर्ल्ड लंग डे पर रेस्परेटरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के हर्बल पार्क में रोपे गए पौधे

लखनऊ: दुनिया भर में 25 सितम्बर को वर्ल्ड लंग डे के रूप में मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य में बुधवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के रेस्परेटरी रोटरी हर्बल पार्क में डिपार्टमेंट ऑफ़ रेस्पिरेटरी मेडिसिन और रोटरी क्लब द्वारा तुलसी की 25 विभिन्न प्रजातियों (रामा, श्यामा, पान, कपूर, शिशिर, वन तुलसी आदि) के पौधों का रोपण किया गया।

इस मौके पर रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि वर्ल्ड लंग डे का उद्देश्य पूरे विश्व में फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बेहतर देखभाल को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने फेफड़ों के महत्व, फेफड़ों की बीमारियों के कारणों और उनकी रोकथाम के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही बताया कि व्यायाम और प्राणायाम स्वस्थ फेफड़ों के मूलमंत्र हैं। उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण तथा धूम्रपान से बचकर रहना बहुत जरूरी है। इस आयोजन का उद्देश्य स्वस्थ फेफड़ों के स्वास्थ्य पर जोर देना, फेफड़े की बीमारियों के कारणों पर चर्चा करना और उनसे बचाव के उपायों पर जागरूकता फैलाना है। इस वर्ष वर्ल्ड लंग डे की थीम “सभी के लिए स्वच्छ हवा और स्वस्थ फेफड़े” है।

इस अवसर पर प्रोफेसर सूर्यकांत, प्रोफेसर राजीव गर्ग, डॉ. अंकित कटियार, डॉ. ज्योति बाजपेई, नरेश अग्रवाल (पूर्व प्रेसिडेंट, रोटरी क्लब लखनऊ), वरुण आनंद (निदेशक, जेसीआई मेट्रोपॉलिटन लखनऊ) और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी गणमान्य लोगों ने तुलसी के पौधों का रोपण किया । इसके साथ ही विभाग के जूनियर डॉक्टरों तथा नर्सों द्वारा भी पौधारोपण किया गया।

भारत में बेरोजगारी: मौजूदा स्थिति, चुनौतियाँ एवं सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास

लखनऊ/नई दिल्ली: भारत जैसे देश में जहां 65% से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है, वहां बेरोजगारी एक ज्वलंत समस्या के रूप में उभरकर सामने आई है। युवा जनसंख्या का बड़ा हिस्सा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है, जो न केवल आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न कर रहा है, बल्कि सामाजिक असंतोष को भी बढ़ावा दे रहा है।

Table of Contents

भारत में बेरोजगारी कई प्रकार की है, जिनमें सबसे प्रमुख हैं:

  • संरचनात्मक बेरोजगारी: यह उस स्थिति को दर्शाती है जब युवा शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल नहीं रखता। इसमें तकनीकी क्षेत्र में तेजी से होने वाले बदलाव और शिक्षा प्रणाली के बीच असंगति मुख्य भूमिका निभाती है।
  • मौसमी बेरोजगारी: कृषि पर आधारित ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से मौसमी बेरोजगारी देखने को मिलती है, जहां रोजगार के अवसर केवल कुछ महीनों के लिए ही उपलब्ध होते हैं।
  • प्रच्छन्न बेरोजगारी: यह स्थिति तब होती है जब लोग आधे-अधूरे या कम प्रभावी ढंग से काम कर रहे होते हैं, जैसे कि कृषि क्षेत्र में अधिक श्रमिक होने के बावजूद कम उत्पादन।

बेरोजगारी का कारण: एक विश्लेषण

1. जनसंख्या विस्फोट

भारत की बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी के मुख्य कारणों में से एक है। देश की जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है, लेकिन रोजगार के अवसर उसी गति से नहीं बढ़ रहे हैं। युवा आबादी के नौकरी की तलाश में बढ़ने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा भी काफी बढ़ रही है, जिससे अधिकतर युवाओं को योग्य होने के बावजूद नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

2. शिक्षा और कौशल की असमानता

भारत में शिक्षा प्रणाली को लेकर बड़े सुधारों की आवश्यकता है। अधिकांश विश्वविद्यालयों में छात्रों को ऐसे पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं जो मौजूदा उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते। परिणामस्वरूप, ग्रेजुएट्स की संख्या तो बढ़ रही है लेकिन उनमे आवश्यक कौशलों की कमी है। उदाहरण के लिए, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा का अभाव है, जिससे युवाओं को नौकरी पाने में कठिनाई हो रही है।

3. कृषि पर निर्भरता

भारत की बड़ी आबादी अभी भी कृषि पर निर्भर है, जो सीमित आय और अवसर प्रदान करती है। कृषि क्षेत्र में रोजगार सीमित और मौसमी होता है। इसके अलावा, पारंपरिक कृषि में तकनीकी विकास की कमी के कारण भी रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं।

बेरोजगारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

1. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

बेरोजगारी का सबसे बड़ा प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। लंबे समय तक बेरोजगार रहने वाले युवाओं में आत्म-सम्मान की कमी, चिंता, और अवसाद जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। यह न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी तनाव उत्पन्न करता है। इसके कारण कई बार नशीली दवाओं और अन्य सामाजिक बुराइयों की ओर युवा आकर्षित होते हैं।

2. आर्थिक अस्थिरता

बेरोजगारी का सीधा असर देश की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। जब बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार होते हैं, तो उनके पास क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम हो जाती है। इससे देश की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था कमजोर होती है, जिसका असर जीडीपी पर भी पड़ता है। इसके साथ ही, बेरोजगारी का सीधा असर बचत और निवेश पर भी पड़ता है।

3. सामाजिक असंतोष और अपराध दर में वृद्धि

बेरोजगारी से असंतोष और हताशा की भावना उत्पन्न होती है, जो सामाजिक असंतोष को जन्म देती है। बेरोजगार युवा कई बार अपराध, हिंसा, और गैरकानूनी गतिविधियों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे समाज में अस्थिरता का खतरा बढ़ता है।

बेरोजगारी के समाधान के लिए प्रयास

1. कौशल विकास और शिक्षा में सुधार

भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने कौशल विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों के अनुकूल कौशल प्रदान करना है ताकि वे बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को तैयार कर सकें।

2. स्वरोजगार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करना है। ये योजनाएं आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करती हैं ताकि युवा अपने व्यापारिक उद्यम शुरू कर सकें और दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर सकें।

3. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इसके तहत सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा निर्माण, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसी परियोजनाओं में रोजगार प्रदान करती है।

4. निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर

भारत में निजी क्षेत्र रोजगार के बड़े स्रोत के रूप में उभरा है। तकनीकी विकास और वैश्वीकरण के कारण आईटी, बीपीओ, और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

सरकार की पहल और योजनाएँ

1. आत्मनिर्भर भारत अभियान

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत, भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही, छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

2. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)

इस योजना का उद्देश्य युवाओं को बिना गारंटी के ऋण प्रदान करके उन्हें स्वरोजगार और छोटे उद्योगों की शुरुआत करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के युवाओं के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।

3. मेक इन इंडिया

“मेक इन इंडिया” अभियान के माध्यम से भारत सरकार देश में उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है, जिससे युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा हों।

बेरोजगारी का भविष्य और समाधान की राह

भारत में बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन सही नीतियों और योजनाओं के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सरकार की नीतियों, शिक्षा में सुधार, और निजी क्षेत्र में अवसरों की वृद्धि से आने वाले वर्षों में रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखे जा सकते हैं।

आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, उद्योग, और समाज मिलकर काम करें ताकि भारत के युवा को उसके कौशल के अनुरूप रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। इसके अलावा, युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करना भी आवश्यक है, ताकि वे खुद के साथ-साथ दूसरों के लिए भी रोजगार सृजित कर सकें।

जलवायु परिवर्तन: भारत पर गहराते संकट के बादल, जलवायु परिवर्तन का वैश्विक संदर्भ

लखनऊ/नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन आज दुनिया भर में सबसे बड़े संकटों में से एक है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में मानव गतिविधियों के कारण धरती का तापमान तेजी से बढ़ा है। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हुई है, जैसे कि बाढ़, सूखा, ग्लेशियरों का पिघलना और समुद्र स्तर में वृद्धि। इन घटनाओं का गहरा असर भारत जैसे विकासशील देशों पर पड़ रहा है, जहां कृषि, उद्योग और जनसंख्या का बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर जलवायु के साथ जुड़ा हुआ है।

जलवायु परिवर्तन का भारत पर प्रभाव

भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। इसके बावजूद, भारत जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े शिकारों में से एक है। यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है, जो सीधे तौर पर जलवायु के अनुकूल है। हाल के वर्षों में बाढ़, सूखा, और अत्यधिक तापमान जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है।

जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव

भारत की कुल आबादी का लगभग 60% हिस्सा कृषि पर निर्भर है, जो जलवायु परिवर्तन के चलते सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत के कई हिस्सों में सूखा पड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे फसल उत्पादन में कमी आई है। इसके विपरीत, मानसून के बदलते पैटर्न के कारण कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश हो रही है, जिससे बाढ़ और मिट्टी कटाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के जल संसाधन भी गंभीर संकट में हैं। देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर तेजी से घट रहा है। इसके अलावा, हिमालयी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियों के जल प्रवाह में अनिश्चितता आ रही है। इससे भारत के कई राज्यों में जल संकट की स्थिति बन गई है।

विशेष रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे राज्य अक्सर जल संकट का सामना करते हैं, जहां सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे न केवल कृषि प्रभावित होती है, बल्कि पेयजल की कमी भी लोगों के जीवन को मुश्किल बना रही है।

जलवायु परिवर्तन का स्वास्थ्य पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर भी हो रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण हिट स्ट्रोक, श्वसन संबंधी समस्याएं और जलजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। बाढ़ और सूखे की घटनाओं के बाद मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू और मलेरिया में वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के चलते फसल उत्पादन में कमी के कारण कुपोषण की समस्या भी बढ़ रही है।

समुद्र के स्तर में वृद्धि और तटीय क्षेत्रों पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर भारत के तटीय क्षेत्रों पर पड़ रहा है। भारत की लंबी तटरेखा और बड़े तटीय शहर जैसे मुंबई, चेन्नई, कोलकाता आदि समुद्र स्तर में वृद्धि से प्रभावित हो रहे हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दशकों में कई तटीय क्षेत्रों के जलमग्न होने का खतरा है।

1. तटीय शहरों पर खतरा

मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे वहां के लोगों को बाढ़ और तटीय क्षरण का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल लोगों के घरों को खतरा है, बल्कि वहां के बुनियादी ढांचे को भी गंभीर क्षति हो रही है।

2. तटीय क्षेत्रों में आजीविका पर असर

भारत के कई तटीय क्षेत्रों में मछली पालन और कृषि प्रमुख आजीविका स्रोत हैं। समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण ये उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। मछलियों की प्रजातियों में कमी और खारे पानी का भूमि पर फैलाव कृषि को प्रभावित कर रहा है।

सरकार और नीतिगत प्रतिक्रियाएं

1. भारत सरकार की नीतियां

जलवायु परिवर्तन के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। भारत ने पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर कर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में शामिल होने का संकल्प लिया है। इसके तहत भारत ने 2030 तक अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 33% तक की कमी करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं।

2. नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान

भारत में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन” (International Solar Alliance) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटना है। इसके अलावा, भारत के कई राज्यों में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए नीतिगत सुधार किए जा रहे हैं।

समाज की भूमिका और जागरूकता

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कई गैर-सरकारी संगठन और पर्यावरणविद सक्रिय हैं।

1. व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास

लोगों को अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करने की आवश्यकता है, जैसे कि प्लास्टिक का कम उपयोग, ऊर्जा की बचत, और जल संरक्षण। इसके अलावा, हरित ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और वृक्षारोपण जैसे उपाय भी जलवायु परिवर्तन से निपटने में मददगार हो सकते हैं।

2. शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं की भूमिका

युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जलवायु शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे अगली पीढ़ी जलवायु संकट को बेहतर तरीके से समझ सकेगी और इसके समाधान के लिए तैयार हो सकेगी।

भारत का भविष्य और जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन से लड़ना न केवल सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि समाज और व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयासों की आवश्यकता है। यदि हम अभी ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो भारत जैसे देश को आने वाले दशकों में गंभीर पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हमें तत्काल ठोस नीतिगत सुधारों, तकनीकी विकास, और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है।

पंचायतीराज विभाग: मंत्री ओ.पी.राजभर की अध्यक्षता में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों की एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

  • कार्यशाला में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों ने रखी 09 सूत्रीय मांग
  • पीएम मोदी के स्वप्न ‘स्वच्छता ही सेवा पखावाड़ा’ को सफल बनाने में क्षेत्र पंचायत प्रमुख दें अपना योगदान
  • क्षेत्र पंचायत प्रमुख शासन द्वारा निर्धारित विभिन्न कार्ययोजनाओं को धरातल पर उतारने में करें सहयोग
  • वित्तीय कार्य स्वीकृति की सीमा 10 लाख रु0 से बढ़ाकर 15 लाख रु0 स्वीकृत
  • तकनीकी सहायता के लिए ब्लॉक स्तर पर नियुक्त होंगे ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज मंत्री ओम प्रकाश राजभर की अध्यक्षता में आज लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी मेहनत पूर्वक कार्य कर रहे हैं। विभाग की तरफ से भी पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के संबंध में जो निर्देश प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी द्वारा मिला है उसको धरातल पर उतारने में हम सभी को मिलकर सहयोग करना होगा। ‘स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा’ को सफल बनाने के लिए उन्होंने सभी क्षेत्र प्रमुखों को अपना अमूल्य सहयोग देने का आह्वान किया।

पंचायतीराज मंत्री ने कहा कि पंचायतीराज विभाग द्वारा ओडीएफ प्लस योजना पर कार्य किया जा रहा है। गांवों में कूड़े के प्रबंधन के दृष्टिगत सॉलिड एवं लिक्विड मैनेजमेंट की दिशा में पंचायतीराज विभाग काम कर रहा है। कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था गांवों में ही की जा रही है। कूड़े के प्रबंधन से ग्राम पंचायत की स्वयं की आर्थिक स्रोत बन रहे है। इसके अलावा पंचायतीराज संस्थाओं की कार्य प्रणाली में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। आज प्रदेश की समस्त पंचायतें अपना कार्य ऑनलाइन कर रही हैं।

इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत प्रमुखों की तरफ से 09 सूत्रीय मांग पत्र पंचायती राज मंत्री जी को दिया गया। जिस पर मंत्री ने गम्भीरतापूर्वक विचार कर निस्तारण करने का आश्वासन दिया। प्रमुख मांगों में से वित्तीय कार्ययोजना को कराने के लिए स्वीकृत 10 लाख रुपये की राशि को बढ़ाकर 15 लाख रुपये तक करने की घोषण की। उन्होंने कहा कि वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति को प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत तक बढ़ाने पर भी विचार किया जायेगा। जिससे कि क्षेत्र पंचायत की कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराया जा सके। आकस्मिक व्यय नियमावली के तहत धनराशि की व्यवस्था की स्थिति अन्य प्रदेशों में क्या है का अध्ययन करने के पश्चात जल्द ही उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू किया जायेगा, जिससे कि आपदा के समय में पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद की जा सके।

पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने ब्लॉक प्रमुखों की समस्याओं को गम्भीरतापूर्वक सुना उन्होंने कहा कि आपकी समस्याओं के निराकरण के लिए एवं तकनीकी सहायता के लिए ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक ब्लॉक में ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर की नियुक्ति किया जायेगा। ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा जा चुका है। ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर क्षेत्र स्तर पर योजनाओं एवं उसमें आ रही समस्याओं से शासन को अवगत करायेंगे। जिसका निराकरण शासन स्तर से कराया जा सकेगा।

इसके अलावा लखनऊ में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत का राज्य स्तरीय कार्यालय खोले जाने पर भी विभाग द्वारा जल्द ही निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य सचिव नरेन्द्र भूषण, निदेशक पंचायतीराज अटल कुमार राय, अध्यक्ष क्षेत्र पंचायत प्रमुख धीरेन्द्र प्रताप सिंह सेनानी, उपाध्यक्ष यशकान्त सिंह, महामंत्री परेश एवं संरक्षक जगमोहन यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।