मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मुस्लिम देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर नई हलचल दिखाई दे रही है। ईरान को कथित तौर पर मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होने का प्रस्ताव मिलने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के ईरान दौरे की खबर भी सामने आई है। उनका दौरा क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बताया जा रहा है। हालांकि, ईरान के संभावित रूप से इस सुरक्षा समझौते का हिस्सा बनने की चर्चा ने दौरे को और अहम बना दिया है।
ईरान को मिला प्रस्ताव, फिलहाल विचार जारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया गया है। ईरानी पक्ष की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव पर फिलहाल विचार किया जा रहा है।
यदि ईरान इस समझौते में शामिल होता है तो पश्चिम एशिया में मुस्लिम देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का दायरा काफी बढ़ सकता है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी इस प्रस्ताव को स्वीकार करने को लेकर अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं हुई है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की पहले ही कर चुके हैं समझौता
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 7 अगस्त को संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।
इस व्यवस्था के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी संबंधित देशों पर हमला माना जा सकता है। ऐसे में यह समझौता तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक नई दिशा देता है।
बांग्लादेश की भी समझौते में दिलचस्पी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश भी इस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख दिखा रहा है। वहां के विदेश मामलों से जुड़े मंत्री ने संकेत दिया है कि ढाका इस तरह के क्षेत्रीय सहयोग को लेकर संभावनाओं पर विचार कर सकता है।
इसके साथ ही बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को राजनयिक बातचीत के जरिए और मजबूत करने की इच्छा भी जताई है।
ईरानी राष्ट्रपति ने देशवासियों की एकजुटता की सराहना की
इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपने देश की जनता की एकजुटता और मुश्किल परिस्थितियों में दिखाई गई मजबूती की तारीफ की है।
सरकारी सप्ताह की शुरुआत के अवसर पर दिए गए भाषण में उन्होंने कहा कि ईरान ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया है। उनके मुताबिक, देश को दबाव में झुकाने की कोशिशों के बावजूद जनता ने एकजुटता और प्रतिरोध का परिचय दिया।
पेजेश्कियान ने यह भी कहा कि आर्थिक दबाव और बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए देश के लोगों को एक साथ खड़े रहने की जरूरत है।
पेजेश्कियान ने एकता बनाए रखने की अपील की
ईरानी राष्ट्रपति ने देशवासियों से नेतृत्व के दिशा-निर्देशों का पालन करने और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि समझदारी, एकजुटता और आपसी सहयोग के जरिए देश कठिन परिस्थितियों से बाहर निकल सकता है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इजरायल से जुड़े तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बनी हुई हैं।
हॉर्मुज को लेकर ट्रंप और ईरान के बीच बढ़ा तनाव
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हॉर्मुज को लेकर कई तीखे दावे किए गए हैं।
ट्रंप ने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिकी अधिकार का संकेत दिया। इससे पहले भी वह हॉर्मुज को लेकर इसी तरह के दावे कर चुके हैं।
दूसरी ओर ईरानी पक्ष ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपने रुख में बदलाव नहीं करता, तब तक हॉर्मुज को लेकर उसकी स्थिति में बदलाव की उम्मीद नहीं है।
मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी दावों पर जताई आपत्ति
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मोहसेन रेजाई ने हॉर्मुज को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों की आलोचना की है।
उन्होंने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि हॉर्मुज पर नियंत्रण को लेकर वॉशिंगटन की बयानबाजी और वास्तविक परिस्थितियों में बड़ा अंतर है। रेजाई ने यह भी संकेत दिया कि फारस की खाड़ी में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदल रहा है।
क्या ईरान बनेगा इस सुरक्षा गठजोड़ का हिस्सा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होगा। अभी ईरानी पक्ष की ओर से अंतिम सहमति की घोषणा नहीं की गई है।
अगर तेहरान इस समझौते का हिस्सा बनता है, तो पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के साथ उसके सुरक्षा संबंधों में एक नया अध्याय खुल सकता है। इससे पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी व्यापक असर पड़ने की संभावना होगी।


































