Benjamin Netanyahu ने ईरान को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और इजरायल दोनों इस बात पर सहमत हैं कि किसी भी अंतिम समझौते में ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से फोन पर अहम बातचीत हुई।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हालिया संघर्ष के बीच नेतन्याहू का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि बातचीत में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर संभावित समझौते को लेकर चर्चा हुई।
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को इजरायल की सुरक्षा के प्रति उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। नेतन्याहू के अनुसार, दोनों देशों ने हालिया सैन्य अभियानों के दौरान मिलकर ईरानी खतरे का सामना किया था और यही साझेदारी आगे भी जारी रहेगी।
नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि ईरान के साथ किसी भी समझौते का मतलब केवल बातचीत नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके परमाणु ढांचे को खत्म करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्रों को नष्ट किया जाना चाहिए और संवर्धित परमाणु सामग्री को देश से बाहर हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी दोहराया कि इजरायल अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। नेतन्याहू ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने लेबनान समेत हर मोर्चे पर इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है।
मध्य पूर्व में तनाव तब और बढ़ गया था जब फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाए थे। इसके बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।
हालांकि कई देशों की ओर से मध्यस्थता और बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। अमेरिका लगातार यह चाहता है कि ईरान परमाणु क्षमता सीमित करे, जबकि ईरान अमेरिकी शर्तों को एकतरफा बता चुका है।
नेतन्याहू ने अंत में कहा कि उनकी नीति बिल्कुल साफ है और वह नहीं चाहते कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों।


































