दुनिया आज मोटापे और फिजिकल एक्टिविटी की कमी एक गंभीर और खामोश महामारी से जूझ रही है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 31 प्रतिशत एडल्ट यानी लगभग 1.8 अरब लोग जरूरी फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पा रहे हैं. यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ते हार्ट अटैक, डायबिटीज और कैंसर का संकेत है. चिंता की बात यह है कि 2010 से 2022 के बीच शारीरिक अनएक्टिविटी में करीब 5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और अगर यही रफ्तार रही, तो 2030 तक यह आंकड़ा 35 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, एक वयस्क को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मध्यम या 75 मिनट की तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए. लेकिन दुनिया का बड़ा हिस्सा इस लक्ष्य से काफी पीछे है. इसका सीधा असर हार्ट रोग, स्ट्रोक, टाइप-2 डायबिटीज, डिमेंशिया और ब्रेस्ट व कोलन कैंसर जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है.
भारत में भी स्थिति गंभीर
भारत की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। पिछले दो दशकों में देश में मोटापा तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस पर उतनी गंभीर चर्चा नहीं हुई. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक, भारत में करीब हर चौथा वयस्क मोटापे का शिकार है. यही वजह है कि वजन बढ़ना और उससे जुड़ी बीमारियां अब भारत के लिए एक साइलेंट किलर बनती जा रही हैं. राज्य-दर-राज्य आंकड़े देखें तो कहीं मोटापे की दर 8 प्रतिशत है, तो कहीं यह 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. शहरों के साथ-साथ गांवों में भी पुरुष और महिलाएं दोनों इसकी चपेट में हैं. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक स्टडी के अनुसार, देश में करोड़ों लोग पेट के मोटापे, सामान्य मोटापे और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
पिछले 15 सालों में भारत में ओवरवेट और मोटे लोगों की संख्या दोगुनी हो चुकी है, जबकि 30 सालों में यह तीन गुना बढ़ी है. सबसे डराने वाली बात यह है कि भारत में 1.44 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉक्टरों के अनुसार, मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या नहीं है. इससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारी, स्लीप एपनिया और कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.खासतौर पर पेट के आसपास जमा चर्बी सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है. इस बढ़ती समस्या के पीछे हमारी बदलती लाइफस्टाइल और खानपान बड़ी वजह है. शहरीकरण, लंबे समय तक बैठकर काम करना, कम शारीरिक मेहनत और प्रोसेस्ड व फास्ट फूड की बढ़ती खपत ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. WHO के मुताबिक, भारत में करीब आधी आबादी पर्याप्त एक्सरसाइज नहीं करती. कोविड महामारी ने भी इस स्थिति को और खराब किया, जब लोगों की शारीरिक गतिविधि कम हुई और स्क्रीन टाइम बढ़ गया.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.


































