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Pakistan ने मानी 12 जवानों की मौत, Afghanistan संग संघर्ष तेज; 274 लड़ाके मार गिराने का दावा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 26 फरवरी रात 9 बजे से शुरू हुआ सैन्य टकराव अब खुली जंग का रूप ले चुका है। सीमा के कई सेक्टरों में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं और हवाई हमलों के दावे भी किए जा रहे हैं।


🔥 सीमा से हवाई हमलों तक

पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के पक्तिका, खोस्त और नांगरहार प्रांतों में स्थित सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। इसके जवाब में अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान के स्वाबी, एबटाबाद और नौशेरा में ड्रोन हमलों का दावा किया गया।

एबटाबाद में स्थित Pakistan Military Academy (PMA) परिसर में ड्रोन गिरने की बात कही गई है, जबकि स्वाबी में एक स्कूल परिसर के बाहर विस्फोट की सूचना है। इस्लामाबाद में ड्रोन हमले के स्पष्ट सबूत सामने नहीं आए हैं।


🎥 एयर स्ट्राइक के वीडियो जारी

पाकिस्तान ने 27 फरवरी शाम तक 31 से अधिक अफगान सैन्य अड्डों पर हवाई हमलों के वीडियो जारी करने का दावा किया है। वहीं अफगान पक्ष का कहना है कि उसने मोर्टार और आर्टिलरी से 50 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।


⚔️ हताहतों को लेकर बड़े दावे

पाकिस्तानी सेना के अनुसार:

  • 274 अफगान सैनिक मारे गए
  • 400 से अधिक घायल
  • 74 से ज्यादा सैन्य पोस्ट तबाह
  • 18 पोस्ट पर कब्जे का दावा
  • 150 से अधिक टैंक, आर्टिलरी और मोर्टार गन नष्ट

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अपने 12 सैनिकों की मौत और 27 के घायल होने की बात स्वीकार की है।
अफगान सरकार ने दावा किया है कि उसने 55 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, जबकि उसके 8 सैनिकों की मौत हुई है। ताजा आधिकारिक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।


🌍 अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की पेशकश

तनाव कम करने के लिए कई देशों ने मध्यस्थता की पेशकश की है:

  • Abbas Araghchi (ईरान)
  • Faisal bin Farhan Al Saud (सऊदी अरब)
  • Badr Abdelatty (मिस्र)
  • Hakan Fidan (तुर्की)

इन सभी नेताओं ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar और अफगान विदेश मंत्री Amir Khan Muttaqi से बातचीत कर शांति की अपील की है। फिलहाल दोनों देश युद्धविराम या बाहरी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।


📌 स्थिति बेहद संवेदनशील

दोनों देशों के दावे और प्रतिदावे जारी हैं, लेकिन जमीनी हालात को लेकर स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक पहल नहीं हुई तो यह संघर्ष क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।

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