आज के समय में Heart Attack एक गंभीर और तेजी से बढ़ती समस्या बन चुकी है। यह तब होता है जब दिल तक जाने वाली रक्त धमनियों में ब्लॉकेज हो जाता है, जिसे Coronary Artery Disease कहा जाता है। हालांकि यह बीमारी पुरुष और महिला दोनों के लिए खतरनाक है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार पुरुषों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है।
महिलाओं में क्यों कम होता है जोखिम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा पुरुषों की तुलना में लगभग 8–10 साल देर से बढ़ता है। जहां पुरुषों में पहली बार हार्ट अटैक का औसत उम्र करीब 65 साल होती है, वहीं महिलाओं में यह 70 वर्ष के बाद ज्यादा देखने को मिलता है।
इसके पीछे क्या कारण हैं?
- हार्मोन का प्रभाव:
महिलाओं में मेनोपॉज से पहले Estrogen हार्मोन दिल की सेहत की रक्षा करने में मदद करता है। यह कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने और ब्लड वेसल्स को लचीला बनाए रखने में सहायक माना जाता है। - लाइफस्टाइल फैक्टर:
आमतौर पर पुरुषों में धूम्रपान और शराब का सेवन अधिक होता है, जो दिल की बीमारियों का बड़ा कारण बनता है। - तनाव का प्रभाव:
विशेषज्ञ मानते हैं कि पुरुषों में तनाव को मैनेज करने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है और जोखिम बढ़ता है। - मेनोपॉज के बाद बढ़ता खतरा:
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे उनका हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है।
किन कारणों से बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा?
- हाई ब्लड प्रेशर
- डायबिटीज
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- मोटापा
- तंबाकू और शराब का सेवन
- पारिवारिक इतिहास
- लगातार तनाव
कैसे करें बचाव?
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
- ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें
- संतुलित और हेल्दी डाइट लें
- रोजाना व्यायाम करें
- तनाव कम करने की कोशिश करें
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लक्षण या समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।


































