होली के मौके पर बाजार में मिलने वाले कई चमकीले रंग दिखने में आकर्षक जरूर होते हैं, लेकिन इनमें मौजूद सिंथेटिक केमिकल्स शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इन रंगों में भारी धातुएं और इंडस्ट्रियल डाई मिलाए जाते हैं, जो त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
स्किन पर असर
सिंथेटिक रंगों में सीसा (Lead), पारा (Mercury), क्रोमियम (Chromium) और सिलिका (Silica) जैसे तत्व पाए जा सकते हैं। इनके संपर्क में आने से:
- त्वचा में जलन और खुजली
- लाल चकत्ते
- कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस
- एक्जिमा का बढ़ना
- त्वचा का रूखापन और संवेदनशीलता
बार-बार संपर्क से त्वचा पर लंबे समय तक निशान भी रह सकते हैं। जिन लोगों की स्किन पहले से संवेदनशील है, उनके लिए खतरा ज्यादा होता है।
आंखों के लिए खतरा
होली खेलते समय रंग आंखों में चले जाने से:
- जलन और सूजन
- लालपन
- कंजंक्टिवाइटिस
- कॉर्नियल एब्रेशन (कॉर्निया पर खरोंच)
रंगों में मौजूद एसिडिक या क्षारीय तत्व आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों में जोखिम ज्यादा होता है, क्योंकि पाउडर लेंस के पीछे फंस सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
फेफड़ों और सांस पर प्रभाव
सूखे रंग हवा में उड़कर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इनमें कीटनाशक, एस्बेस्टस या भारी धातुएं हो सकती हैं, जिससे:
- अस्थमा अटैक
- ब्रोंकाइटिस
- घरघराहट
- सीने में जकड़न
- राइनाइटिस
अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अधिक मात्रा में रसायन शरीर में जाने से किडनी और लीवर पर भी असर पड़ सकता है।
सुरक्षित तरीके से कैसे मनाएं होली?
नेचुरल या हर्बल गुलाल का इस्तेमाल करें।
होली खेलने से पहले त्वचा और बालों पर तेल या मॉइश्चराइजर लगाएं।
फुल स्लीव कपड़े पहनें।
आंखों की सुरक्षा रखें और कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें।
रंग लगने के तुरंत बाद साफ पानी से धो लें।
ज्यादा धूल और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।


































