अगर आपको यह चिंता रहती है कि कहीं आपकी धमनियों (आर्टरीज) में ब्लॉकेज तो नहीं बन रहा, तो कुछ आसान जांचों के जरिए शुरुआती संकेतों को पहचाना जा सकता है। घर बैठे प्लाक को सीधे देख पाना संभव नहीं है, लेकिन शरीर कई बार ऐसे संकेत देता है जो खतरे की ओर इशारा करते हैं।
ब्लड प्रेशर की नियमित मॉनिटरिंग
दिल और धमनियों की सेहत समझने का सबसे आसान तरीका है ब्लड प्रेशर की जांच।
READ ALSO
दिल्ली के टॉप कैंसर अस्पताल: एम्स से राजीव गांधी तक
इनट्यूशन थॉट: हमारी अंदर की आवाज और जिंदगी बदलने की ताकत
- अपर आर्म वाला डिजिटल बीपी मॉनिटर ज्यादा सटीक माना जाता है।
- मापने से पहले कम से कम 5 मिनट आराम से बैठें।
- पैर जमीन पर टिके हों और पीठ को सहारा मिले।
- सुबह और रात में दो-दो रीडिंग लें।
- एक हफ्ते तक रीडिंग नोट कर औसत निकालें।
सामान्य ब्लड प्रेशर लगभग 120/80 mmHg माना जाता है। यदि बार-बार इससे ज्यादा रीडिंग आ रही है, तो यह धमनियों पर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है।
एंकल ब्रैकियल इंडेक्स (ABI) टेस्ट
यह टेस्ट हाथ और पैर के ब्लड प्रेशर की तुलना करता है और पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ (PAD) के खतरे का अंदाजा देता है।
प्रसिद्ध स्वास्थ्य संस्था Mayo Clinic के अनुसार, यदि एंकल और आर्म प्रेशर का अनुपात 0.90 से कम हो, तो यह पैरों की धमनियों में संकुचन और हृदय रोग के बढ़े खतरे का संकेत हो सकता है।
यह शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए भरोसेमंद तरीका माना जाता है।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट
दिल की सेहत जानने के लिए कोलेस्ट्रॉल की जांच बेहद जरूरी है।
इस टेस्ट में जांच होती है:
- टोटल कोलेस्ट्रॉल
- LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल)
- HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल)
- ट्राइग्लिसराइड्स
उच्च LDL स्तर धमनियों में प्लाक जमने का खतरा बढ़ाता है। आमतौर पर टेस्ट से पहले 12 घंटे का फास्ट जरूरी होता है (डॉक्टर की सलाह अनुसार)। नियमित जांच से जोखिम को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।
सीढ़ियां चढ़ते समय शरीर के संकेत
चार मंजिल सीढ़ियां सामान्य रफ्तार से चढ़कर देखें। ध्यान दें कि:
- क्या सीने में दबाव या दर्द होता है?
- क्या सांस जरूरत से ज्यादा फूलती है?
- क्या जबड़े, कंधे या बांह में दर्द होता है?
- क्या चक्कर या कमजोरी महसूस होती है?
मेहनत के दौरान ऐसे लक्षण दिखना हृदय की धमनियों में रुकावट का संकेत हो सकता है। अगर ऐसा हो, तो तुरंत रुकें और डॉक्टर से संपर्क करें।
कब सतर्क रहें?
यदि ऊपर बताए गए लक्षण बार-बार दिखें या बिगड़ते जाएं, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और इलाज से गंभीर हार्ट अटैक या अन्य जटिलताओं से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह जानकारी शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई एक्सरसाइज या जांच शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।


































