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Health News:हल्की-सी चोट लगते ही तेज दर्द क्यों? और टेस्टिकल्स शरीर के बाहर ही क्यों होते हैं?

अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि टेस्टिकल्स (अंडकोष) शरीर के बाहर क्यों होते हैं और हल्की-सी चोट पर भी इतना तेज दर्द क्यों होता है। दरअसल, यह मेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम का बेहद संवेदनशील और खास हिस्सा है।

टेस्टिकल्स को घेरने वाली थैली को स्क्रोटम (Scrotum) कहा जाता है। यह त्वचा और मांसपेशियों से बनी एक लचीली लेकिन मजबूत संरचना होती है, जो पेनिस के नीचे स्थित रहती है। इसके अंदर दो अंडाकार ग्रंथियां होती हैं, जो स्पर्म बनाने और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्राव करने का काम करती हैं।

शरीर के बाहर क्यों होते हैं टेस्टिकल्स?

विशेषज्ञों के अनुसार, टेस्टिकल्स को सामान्य शरीर के तापमान (लगभग 37°C) से थोड़ा कम तापमान की जरूरत होती है। स्पर्म का निर्माण सही तरीके से तभी संभव है, जब तापमान शरीर से 2–3 डिग्री कम रहे।

स्क्रोटम एक “नेचुरल क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम” की तरह काम करता है। इसमें मौजूद क्रीमास्टर मसल (Cremaster muscle) जरूरत के मुताबिक टेस्टिकल्स को शरीर के करीब या दूर ले जाती है, जिससे तापमान संतुलित बना रहे।

अगर टेस्टिकल्स पेट के अंदर होते, तो अधिक तापमान के कारण स्पर्म प्रोडक्शन प्रभावित हो सकता था। इसलिए प्रकृति ने इन्हें शरीर के बाहर रखा है।


हल्की चोट पर भी इतना तेज दर्द क्यों?

टेस्टिकल्स में बहुत ज्यादा और अत्यंत संवेदनशील नर्व एंडिंग्स (तंत्रिकाएं) होती हैं। शरीर के छोटे से हिस्से में इतनी घनी नसों की मौजूदगी के कारण हल्का झटका भी तेज दर्द में बदल जाता है।

इसके अलावा:

  • यह हिस्सा हड्डियों या मोटी मांसपेशियों से सुरक्षित नहीं होता।
  • बाहरी स्थिति के कारण सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • नसों का सीधा संबंध पेट के हिस्से से भी होता है।

पेट में दर्द या मितली क्यों होती है? (Referred Pain)

कई बार टेस्टिकल्स पर चोट लगने के बाद पेट या निचले हिस्से में भी दर्द महसूस होता है। इसे रेफर्ड पेन (Referred Pain) कहा जाता है।

भ्रूण विकास के दौरान टेस्टिकल्स पहले पेट के अंदर बनते हैं और बाद में नीचे की ओर उतरते हैं। इसी वजह से इनकी कुछ नसें पेट से जुड़ी रहती हैं। चोट लगने पर दिमाग को दर्द का संकेत मिलता है, लेकिन वह हमेशा सही स्थान पहचान नहीं पाता, जिससे पेट में दर्द या मितली हो सकती है।


क्या कोई प्राकृतिक सुरक्षा होती है?

प्रकृति ने कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं:

  • स्क्रोटम की त्वचा लचीली होती है
  • अंदर मजबूत रेशेदार परत (ट्यूनिका अल्बुजिनिया) होती है
  • टेस्टिकल्स हल्की मूवमेंट कर सकते हैं, जिससे झटका थोड़ा कम हो

फिर भी, यह हिस्सा बेहद संवेदनशील है, इसलिए चोट से पूरी तरह बचाव संभव नहीं होता।


Disclaimer:
यह जानकारी शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या दर्द की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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