भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शोर और तनाव आम हो गया है। ऐसे में भ्रामरी प्राणायाम एक सरल लेकिन प्रभावी योग तकनीक मानी जाती है, जो मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट के जरिए मन को शांत करती है।
अक्सर लोग इसे सिर्फ सांस लेकर आवाज निकालने का अभ्यास समझते हैं, लेकिन सही तरीके से किया जाए तो इसमें बॉडी पोस्चर, हाथों की मुद्रा, सांस का नियंत्रण और एकाग्रता—सभी का अहम योगदान होता है
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
योग साधक हिमालयन सिद्धा अक्षर के अनुसार, भ्रामरी सिर्फ रिलैक्सेशन तकनीक नहीं है, बल्कि यह मूड और ऊर्जा स्तर पर भी सकारात्मक असर डालती है।
उनका कहना है कि यह अभ्यास बिखरे विचारों को शांत कर व्यक्ति को वर्तमान क्षण में लाने में मदद करता है और अंदरूनी बेचैनी को कम करता है।
नर्वस सिस्टम पर कैसे करता है असर?
भ्रामरी में पैदा होने वाली कंपन (वाइब्रेशन) शरीर के भीतर फैलती है।
- यह कंपन खोपड़ी और साइनस में गूंजती है
- दिमाग के न्यूरल पाथवे को सिंक्रोनाइज़ करने में मदद कर सकती है
- वेगल टोन (Vagal Tone) बेहतर करती है
- पैरासिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करती है
पैरासिंपैथेटिक सिस्टम को शरीर का “रेस्ट एंड डाइजेस्ट” मोड कहा जाता है। इसके सक्रिय होने से: हार्ट रेट स्थिर होती है
स्ट्रेस हार्मोन घटते हैं
मन शांत महसूस करता है
भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें?
- किसी शांत स्थान पर आराम से बैठें।
- रीढ़ सीधी रखें और आंखें बंद करें।
- नाक से गहरी सांस लें।
- सांस छोड़ते समय होंठ बंद रखते हुए मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट करें।
- कंपन को सिर और चेहरे में महसूस करें।
- इसे 6–10 बार दोहराएं।
- अंत में कुछ देर शांत बैठकर अनुभव को महसूस करें।
नियमित अभ्यास से तनाव कम हो सकता है, मन की स्पष्टता बढ़ सकती है और भावनात्मक संतुलन बेहतर हो सकता है।
क्यों है यह खास?
भ्रामरी सिर्फ बाहरी शोर को शांत नहीं करती, बल्कि भीतर एक स्थिर और संतुलित अवस्था बनाने में मदद करती है। यह सरल, सुरक्षित और घर पर आसानी से किया जाने वाला अभ्यास है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई योग या व्यायाम गतिविधि को शुरू करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।


































