यूरोपीय यूनियन (EU) ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को ब्लैक लिस्ट कर दिया है. EU की विदेश नीति की चीफ काजा कल्लास ने कहा था कि IRGC को अल-कायदा और हमास जैसे आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया जाएगा. EU के इस कदम के बाद अब तेहरान की ओर से भी कदम उठाए गए हैं.
ईरान के अधिकारी ने एक्स पर किया पोस्ट
ईरान ने शुक्रवार (30 जनवरी, 2026) को यूरोपीय यूनियन (EU) को धमकी देते हुए कहा कि उन देशों के सशस्त्र बलों को वह ‘आतंकवादी’ घोषित कर सकता है. ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि इस्लामी सलाहकार सभा के प्रस्ताव के तहत, IRGC के खिलाफ यूरोपीय यूनियन की कार्रवाई का समर्थन करने वाले देशों की सेनाओं को आतंकवादी संस्था माना जाएगा.
اتحادیه اروپا قطعا میداند مطابق مصوبه مجلس شورای اسلامی، ارتش کشورهایی که در مصوبه اخیر اتحادیه اروپا علیه سپاه پاسداران مشارکت داشتهاند، تروریستی محسوب میشوند. لذا عواقب آن متوجه کشورهای اروپایی است که به چنین اقدامی دست زدند.
— Ali Larijani | علی لاریجانی (@alilarijani_ir) January 30, 2026
ईरानी अधिकारी ने लिखा, ‘यूरोपीय संघ निश्चित रूप से जानता है कि इस्लामी सलाहकार सभा के प्रस्ताव के अनुसार, उन देशों की सेनाओं को आतंकवादी संस्था माना जाता है जिन्होंने इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर के खिलाफ यूरोपीय यूनियन के हालिया प्रस्ताव में भाग लिया है.’ उन्होंने कहा कि इसके परिणाम उन यूरोपीय देशों को भुगतने होंगे, जिन्होंने ऐसी कार्रवाई की.
अपने लोगों की हत्या का जिम्मेदार शासन आतंकवादी माना जाएगा- कल्लास
ईरानी अधिकारी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले ही यूनियन यूनियन के विदेश मंत्रियों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने पर सहमति जताई थी. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए इसे निर्णायक कदम बताया और कहा कि जो शासन अपने ही हजारों लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार है, उन्हें आतंकवादी माना जाना चाहिए.
ईयू ने कहा कि यह लिस्टिंग, जो सभी 27 सदस्य देशों पर लागू होगा, मुख्य रूप से प्रतीकात्मक है, लेकिन इससे IRGC को अल-कायदा, हमास और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों के समान श्रेणी में रखा गया है.
क्यों उठाए गए ये कदम?
यूरोपियन यूनियन की ओर से यह कदम ईरान में आर्थिक समस्याओं और सरकारी नीतियों के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है. कार्यकर्ताओं के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में अब तक कम से कम 6,479 लोगों की मौत हो चुकी है.


































