ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान ने आम चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। इसके साथ ही केयरटेकर सरकार का नेतृत्व कर रहे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ गया है। देश अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है।
सत्ता हस्तांतरण की तैयारी
बीएनपी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद नई संसद के गठन और सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल के गठन और प्रशासनिक फेरबदल को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। करीब दो दशकों बाद सत्ता में वापसी को पार्टी ऐतिहासिक जनादेश बता रही है।
यूनुस का कार्यकाल और सुधार एजेंडा
डॉ. यूनुस ने अवामी लीग सरकार के पतन के बाद केयरटेकर प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने चुनाव से पहले “सुधार चार्टर” और संस्थागत बदलावों की बात कही थी। हालांकि अब नई सरकार इस एजेंडे की समीक्षा कर सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीएनपी अपने वादों के अनुरूप संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव पर जोर दे सकती है।
अवामी लीग का विरोध
मुख्य विपक्षी दल अवामी लीग ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रमुख शेख हसीना फिलहाल निर्वासन में हैं। अवामी लीग ने चुनाव को निष्पक्ष न बताते हुए परिणामों को चुनौती देने के संकेत दिए हैं। इससे आने वाले समय में राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है।
कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव
चुनावी माहौल के बीच देश में कुछ जगहों पर हिंसा और सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं भी सामने आई हैं। नई सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करना बड़ी चुनौती होगी। बीएनपी नेतृत्व ने शांति और स्थिरता बनाए रखने का भरोसा दिलाया है।
विदेश नीति और भारत संबंध
सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी नजरें टिकी हैं। जानकारों का कहना है कि नई सरकार क्षेत्रीय संतुलन और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दे सकती है, हालांकि शुरुआती संकेतों से ही स्पष्ट होगा कि द्विपक्षीय रिश्ते किस दिशा में बढ़ेंगे।
फिलहाल, तारिक रहमान की जीत के साथ बांग्लादेश में नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले सप्ताह देश की राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय करने में अहम साबित होंगे।


































