गंभीर रक्त रोग Aplastic Anemia से जूझ रहे 19 वर्षीय युवक को स्टेम सेल डोनर की मदद से नई जिंदगी मिली है। बेंगलुरु की 32 वर्षीय स्वाति ने ब्लड स्टेम सेल दान कर युवक की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। डॉक्टरों के मुताबिक यह बीमारी समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है।
यह मामला तब सामने आया जब युवक को लगातार बुखार रहने लगा। जांच में पता चला कि वह सीवियर एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित है। इस बीमारी में शरीर का बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में नए ब्लड सेल्स बनाना बंद कर देता है, जिससे शरीर कमजोर होने लगता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी का सबसे प्रभावी इलाज Stem Cell Transplant या बोन मैरो ट्रांसप्लांट माना जाता है। केरल के कोझिकोड स्थित MVR Cancer Centre के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीज को स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी, जिसके बाद उपयुक्त डोनर की तलाश शुरू की गई।
इसी दौरान बेंगलुरु में आईटी कंसल्टेंट के रूप में काम करने वाली स्वाति का स्टेम सेल मैच हो गया। उन्होंने 2016 में एक डोनर रजिस्ट्रेशन ड्राइव में भाग लिया था और उसी के आधार पर बाद में उनका मैच मिला। जब उन्हें इस बारे में जानकारी दी गई तो उन्होंने बिना हिचकिचाए स्टेम सेल दान करने के लिए हामी भर दी।
सफल ट्रांसप्लांट के बाद युवक की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और अब उसकी ब्लड रिपोर्ट स्थिर है। फिलहाल वह सामान्य जीवन जी रहा है और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के शौक को भी आगे बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एप्लास्टिक एनीमिया और कई अन्य गंभीर रक्त रोगों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कई बार जीवन बचाने का एकमात्र तरीका होता है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त डोनर मिलना होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक लोग स्टेम सेल डोनर के रूप में रजिस्टर करें तो ब्लड कैंसर और अन्य गंभीर रक्त रोगों से जूझ रहे हजारों मरीजों को समय पर इलाज मिल सकता है और कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।


































