ईरान पर हालिया हमलों के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई शहरों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के मुताबिक 1 मार्च 2026 को ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई, बहरीन की राजधानी मनामा और कतर की राजधानी दोहा की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार लगभग 165 मिसाइलें छोड़ी गईं, जिनमें से अधिकांश को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया, जबकि कुछ समुद्र में गिरीं।
दुबई पर हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा क्योंकि वहां अमेरिका का कोई घोषित सैन्य अड्डा नहीं है। हालांकि, रणनीतिक दृष्टि से दुबई का महत्व काफी बड़ा है। यूएई की राजधानी अबू धाबी में स्थित Al Dhafra Air Base का इस्तेमाल अमेरिकी और यूएई वायु सेनाएं संयुक्त रूप से करती हैं। यह बेस क्षेत्रीय अभियानों के लिए अहम माना जाता है।
दुबई में मौजूद Jebel Ali Port अमेरिकी नौसेना के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब की भूमिका निभाता है। भले ही यह औपचारिक अमेरिकी सैन्य अड्डा नहीं है, लेकिन अमेरिकी युद्धपोत और विमानवाहक पोत यहां नियमित रूप से आते-जाते हैं। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों के लिहाज से यह बंदरगाह बेहद रणनीतिक माना जाता है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी
खाड़ी क्षेत्र और आसपास के देशों में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय है। कतर की राजधानी दोहा के पास स्थित Al Udeid Air Base अमेरिकी सेंट्रल कमांड का अग्रिम मुख्यालय है और इसे क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है।
कुवैत में Camp Arifjan अमेरिकी आर्मी सेंट्रल का अग्रिम मुख्यालय है। सऊदी अरब में रियाद के पास स्थित Prince Sultan Air Base पर अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो एयर और मिसाइल डिफेंस में सहयोग करते हैं।
इन सभी ठिकानों का उपयोग क्षेत्रीय सैन्य अभियानों, निगरानी और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए किया जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने उन स्थानों को निशाना बनाया, जो किसी न किसी रूप में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़े हैं या रणनीतिक रूप से अहम हैं। दुबई भले ही आधिकारिक सैन्य अड्डा न हो, लेकिन उसकी बंदरगाह और लॉजिस्टिक भूमिका उसे इस समीकरण में महत्वपूर्ण बनाती है।


































