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Iran के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर मंडराया खतरा? संभावित टारगेटेड स्ट्राइक की खबरों से United States-ईरान के बीच तनाव तेज

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, United States ने Iran के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर उन्नत स्तर की तैयारी की है। दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी में कहा गया है कि योजना में अलग-अलग ईरानी नेताओं को निशाना बनाने के विकल्प शामिल हैं। अंतिम निर्णय राष्ट्रपति Donald Trump के हाथ में होगा।

जंग के विकल्प तैयार, कूटनीति भी जारी

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अगर कूटनीतिक कोशिशें नाकाम रहती हैं तो अमेरिका गंभीर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। संभावित ऑपरेशन में ईरान के सुरक्षा ठिकानों और न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किन नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है—इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।

रिपोर्ट्स में यह भी संकेत है कि “रिजीम चेंज” (सरकार बदलने) जैसे विकल्पों पर आंतरिक चर्चा हुई है, लेकिन बिना बड़े ग्राउंड फोर्स के ऐसा कैसे संभव होगा—यह अस्पष्ट है।

चुनावी वादों से अलग रुख?

अगर सरकार बदलने की कोशिश होती है, तो यह ट्रंप के चुनावी बयानों से अलग कदम माना जाएगा। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने Afghanistan और Iraq में पूर्व अमेरिकी हस्तक्षेपों को असफल बताया था।

भारी सैन्य तैनाती

फिलहाल मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी मजबूत बताई जा रही है—वॉरशिप, फाइटर जेट्स और जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी के बॉम्बर्स का विकल्प भी मौजूद है। किसी बड़े बमबारी अभियान के लिए क्षेत्रीय बेस से उड़ानें भरी जा सकती हैं।

पिछला बड़ा कदम: सुलेमानी स्ट्राइक

अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने 2020 में ईरान के शीर्ष कमांडर Qasem Soleimani पर हमले की मंजूरी दी थी। सुलेमानी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की विदेशी ऑपरेशंस शाखा ‘कुद्स फोर्स’ के प्रमुख थे। 2019 में ट्रंप प्रशासन ने IRGC को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था—यह पहली बार था जब अमेरिका ने किसी दूसरे देश की सेना को ऐसा दर्जा दिया।

इजरायल का जिक्र

एक अमेरिकी अधिकारी ने पिछले साल Israel और ईरान के बीच 12 दिन तक चली झड़पों का जिक्र किया। क्षेत्रीय सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान ईरान के सीनियर सैन्य अधिकारियों को नुकसान हुआ था। हालांकि, मौजूदा हालात में अमेरिकी खुफिया जानकारी कितनी सटीक है—इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

आगे क्या?

राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीति की उम्मीद भी जताई है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि समझौता न होने पर “बहुत बुरी चीजें” हो सकती हैं। क्षेत्रीय हालात को देखते हुए अब नजर वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी है।

नोट: सैन्य कार्रवाई से जुड़े दावे संवेदनशील होते हैं। आधिकारिक घोषणाओं और विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

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