कर्नाटक के एक स्टार्टअप ने तैयार किया है AI आधारित मोबाइल एप ‘श्वासा’, जिसे अब AIIMS दिल्ली से मान्यता मिल चुकी है। यह एप खास एल्गोरिद्म तकनीक के जरिए मरीजों में क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की स्क्रीनिंग करता है। भारत में यह बीमारी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।
AIIMS में हुआ टेस्ट
पिछले साल AIIMS दिल्ली के बल्लभगढ़ केंद्र में 460 लोगों पर एप का परीक्षण किया गया। पारंपरिक स्पाइरोमेट्री से तुलना करने पर एप ने सटीकता में 82-90% तक प्रदर्शन किया। गंभीर मामलों में एप की सटीकता और भी बेहतर रही।
एप का तरीका
- मरीज को सिर्फ स्मार्टफोन के सामने खांसना होता है।
- फोन का माइक्रोफोन खांसी की आवाज रिकॉर्ड करता है।
- AI सॉफ्टवेयर तुरंत एनालिसिस करता है।
- कुछ ही मिनटों में पता चल जाता है कि लंग्स सामान्य हैं या सीओपीडी/अस्थमा के संकेत हैं।
क्यों है ये उपयोगी?
- स्पाइरोमेट्री जैसी सुविधाएं ज्यादातर बड़े मेडिकल कॉलेज तक सीमित हैं।
- श्वासा एप संसाधन सीमित इलाकों में प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य केंद्रों, यहां तक कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- जांच पूरी प्रक्रिया केवल लगभग 8 मिनट में पूरी हो जाती है।
आगे की योजना
AIIMS टीवी स्क्रीनिंग के जरिए भी एप की उपयोगिता का परीक्षण कर रहा है। कर्नाटक और कुछ अन्य राज्यों में फिलहाल इसे इस्तेमाल किया जा रहा है, और फरीदाबाद में निजी डॉक्टरों को जोड़कर इसके उपयोग को बढ़ाने की योजना है।


































