केरल: 10 महीने की आलिन शेरिन अब्राहम ने अपने छोटे से जीवन में एक बड़ा मिसाल कायम किया। आलिन के अंगदान से चार गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जीवनदान मिला। उनका पार्थिव शरीर पहले मल्लप्पल्ली के निजी अस्पताल के शवगृह में रखा गया और फिर वेस्ट वालुम्मानिल स्थित उनके घर लाकर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ऑर्गन डोनेशन क्या है?
ऑर्गन डोनेशन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति के स्वस्थ अंग को निकालकर ऐसे मरीज के शरीर में लगाया जाता है, जिसका अंग काम करना बंद कर चुका हो। इसमें आमतौर पर दो सर्जरी लगभग एक साथ होती हैं – एक डोनर के अंग निकालने के लिए और दूसरी जरूरतमंद मरीज के शरीर में उसे ट्रांसप्लांट करने के लिए।
कितने प्रकार के होते हैं अंगदान?
- मृत्यु के बाद: ब्रेन डेथ की पुष्टि के बाद परिजनों की सहमति से हार्ट, लिवर, किडनी, लंग्स, पैंक्रियास, आंख, स्किन और बोन मैरो दान किए जा सकते हैं।
- जीवित व्यक्ति द्वारा: कुछ अंग जैसे किडनी या हिस्से का लिवर दान किया जा सकता है, बशर्ते डोनर का स्वास्थ्य अच्छा हो और अंग मरीज के अनुकूल हो।
कौन बन सकता है डोनर?
हर व्यक्ति संभावित अंगदाता हो सकता है। उम्र से ज्यादा महत्वपूर्ण है अंगों की सेहत और मेडिकल जांच। मृत्यु के बाद अंगदान में समय बहुत अहम होता है क्योंकि अंगों को सुरक्षित निकालने के लिए मौत के कुछ ही घंटों का अंतराल होता है।
ऑर्गन डोनेशन की ताकत
आलिन जैसे छोटे डोनर भी चार लोगों के जीवन में नई रोशनी छोड़ सकते हैं। यह साबित करता है कि एक सही निर्णय और मेडिकल प्रक्रिया कितनी जीवनरक्षक हो सकती है।


































