मध्य पूर्व में रमजान की शुरुआत के बीच Israel की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के नेतृत्व में प्रशासन ने पूर्वी यरूशलम स्थित Al-Aqsa Mosque में जुमे की नमाज अदा करने के लिए 10 हजार फिलिस्तीनी मुस्लिमों को अनुमति दी है।
अल-अक्सा मस्जिद को मुस्लिम समुदाय इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल मानता है। रमजान के मौके पर यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी गई हैं।
उम्र सीमा की शर्त लागू
इजरायल की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक:
- पुरुषों के लिए न्यूनतम आयु 55 वर्ष तय की गई है।
- महिलाओं के लिए आयु सीमा 50 वर्ष रखी गई है।
- 12 वर्ष तक के बच्चों को भी प्रवेश की अनुमति होगी।
इन शर्तों के तहत ही मस्जिद में नमाज अदा की जा सकेगी।
डेली परमिट अनिवार्य
जुमे की नमाज में शामिल होने के लिए इच्छुक लोगों को पहले से विशेष दैनिक परमिट बनवाना होगा। बिना परमिट किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह जानकारी इजरायल के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में दी गई है।
ऐतिहासिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि
पूर्वी यरूशलम 1967 से इजरायल के नियंत्रण में है। हालांकि अल-अक्सा मस्जिद परिसर का धार्मिक प्रबंधन जॉर्डन के वक्फ बोर्ड के हाथों में है। मुस्लिम समुदाय इसे अपना पवित्र स्थल मानता है, जबकि यहूदी समुदाय इसी परिसर को टेंपल माउंट के रूप में देखता है।
रमजान के दौरान लिए गए इस फैसले को क्षेत्रीय संवेदनशीलता के मद्देनज़र अहम कदम माना जा रहा है।


































