रात में बार-बार नींद खुलना या देर तक नींद न आना इंसोम्निया (अनिद्रा) का संकेत हो सकता है। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो शरीर और दिमाग दोनों पर असर डाल सकती है।
हेल्थ संस्था Mayo Clinic के अनुसार, अधिकांश वयस्कों को रोज़ 7–9 घंटे की नींद की जरूरत होती है। यदि तीन महीने या उससे अधिक समय तक नींद की दिक्कत बनी रहे, तो इसे क्रॉनिक इंसोम्निया कहा जाता है।
क्यों बार-बार खुलती है नींद?
तनाव और मानसिक कारण
- एंग्जायटी (घबराहट)
- डिप्रेशन
- किसी भावनात्मक घटना का असर
तनाव की स्थिति में दिमाग “अलर्ट मोड” में रहता है, जिससे गहरी नींद नहीं आ पाती।
शारीरिक बीमारियां
नींद टूटने के पीछे कई मेडिकल कारण हो सकते हैं, जैसे:
- अस्थमा – सांस लेने में दिक्कत
- थायरॉयड की समस्या – हार्मोन असंतुलन
- एसिडिटी/GERD – सीने में जलन
- स्लीप एपनिया – नींद में सांस रुकना
- रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम – पैरों में बेचैनी
- लंबे समय तक रहने वाला दर्द
दवाइयों का असर
कुछ दवाइयां (ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, एलर्जी आदि की) नींद को प्रभावित कर सकती हैं।
उम्र और लाइफस्टाइल
- बढ़ती उम्र में नींद हल्की हो जाती है
- देर रात मोबाइल/स्क्रीन का इस्तेमाल
- कैफीन या निकोटीन का सेवन
- अनियमित सोने-जागने का समय
बच्चों और किशोरों में बदली हुई सर्कैडियन रिदम (बॉडी क्लॉक) के कारण भी देर से नींद आने की समस्या देखी जाती है।
कब डॉक्टर से मिलें?
यदि इन लक्षणों के साथ नींद की कमी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें:
- दिनभर थकान
- चिड़चिड़ापन या उदासी
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
- काम में बार-बार गलती
- छोटी बातों पर अत्यधिक चिंता
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर स्लीप टेस्ट (पॉलीसोमनोग्राफी) की सलाह दे सकते हैं ताकि असली कारण पता चल सके।
क्या करें अभी?
- रोज एक तय समय पर सोएं और उठें
- सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें
- कैफीन शाम के बाद न लें
- हल्की एक्सरसाइज और रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं
- बेडरूम को शांत और अंधेरा रखें
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। लगातार नींद की समस्या होने पर डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से जरूर परामर्श लें।


































