अक्सर लोग मान लेते हैं कि जो चीज़ “नेचुरल” है, वह पूरी तरह सुरक्षित भी होगी। लेकिन हर्बल और डाइटरी सप्लीमेंट्स को खाद्य उत्पादों की श्रेणी में रखा जाता है—इनका मकसद पोषण की कमी पूरी करना है, न कि हर हाल में इलाज करना। खासकर अगर किसी को पहले से लिवर (जिगर) या किडनी की समस्या है, तो कुछ सप्लीमेंट इन अंगों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
यहां जानिए किन 7 सप्लीमेंट्स से सावधानी बरतनी चाहिए:
1. ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट (कैप्सूल/टैबलेट)
सामान्य ग्रीन टी का एक कप आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट की गोलियों में कैटेचिन्स—खासकर एपिगैलोकैटेचिन गैलेट (EGCG)—की मात्रा बहुत अधिक होती है। ज्यादा डोज लेने पर यह लिवर में सूजन या गंभीर चोट का कारण बन सकता है, खासकर उन लोगों में जिनका लिवर पहले से कमजोर है।
2. हाई-डोज प्रोटीन पाउडर
जिम या बॉडीबिल्डिंग के लिए लिए जाने वाले प्रोटीन सप्लीमेंट यदि जरूरत से ज्यादा मात्रा में लिए जाएं तो किडनी पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं। ज्यादा प्रोटीन से बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में किडनी को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जो क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
3. फैट-सोल्यूबल विटामिन (A, D, E, K)
ये विटामिन शरीर में जमा हो जाते हैं और आसानी से बाहर नहीं निकलते।
- विटामिन A की अधिकता लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है।
- विटामिन D और E भी बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा मात्रा में लेने पर, खासकर किडनी या लिवर रोगियों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
4. आयरन सप्लीमेंट
आयरन जरूरी मिनरल है, लेकिन शरीर में इसकी अधिकता लिवर में जमा होकर हेमोक्रोमैटोसिस जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। इससे कई अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसलिए बिना ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह के आयरन लेना ठीक नहीं।
5. कुछ हर्बल उपाय
कुछ जड़ी-बूटियां भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जैसे:
- कॉम्फ्री
- ब्लैक कोहोश
- गार्सिनिया कंबोजिया
इनमें सक्रिय तत्वों की मात्रा और शुद्धता हमेशा नियंत्रित नहीं होती, जिससे लिवर टॉक्सिसिटी का खतरा बढ़ सकता है।
6. मुलेठी (लिकोरिस रूट)
मुलेठी में मौजूद ग्लाइसिराइजिन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और पोटैशियम का स्तर कम कर सकता है। यह किडनी या हृदय रोगियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए इसका सेवन सीमित और निगरानी में ही करना चाहिए।
7. डिटॉक्स या फैट-बर्निंग गोलियां
इन उत्पादों में स्टिमुलेंट, डाययूरेटिक या अन्य अज्ञात तत्व हो सकते हैं। ये लिवर के मेटाबॉलिज्म और किडनी की फिल्ट्रेशन प्रक्रिया पर असर डालते हैं। लगातार उपयोग से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ सकती है।
क्या करें?
- किसी भी सप्लीमेंट को “नेचुरल” समझकर आंख बंद कर न लें।
- पहले से लिवर या किडनी की बीमारी है तो डॉक्टर से सलाह अनिवार्य है।
- लेबल पढ़ें, डोज समझें और जरूरत हो तो ब्लड टेस्ट करवाएं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी सप्लीमेंट या नई स्वास्थ्य दिनचर्या शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।


































