फूड पॉइजनिंग एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जो दूषित, बासी या बैक्टीरिया से संक्रमित भोजन खाने से होती है। कई बार लोग इसे साधारण पेट खराबी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह स्थिति डिहाइड्रेशन से लेकर शरीर के अंगों के फेल होने तक का खतरा पैदा कर सकती है। जब ई-कोलाई, साल्मोनेला और लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं, तो ये जहरीले तत्व छोड़ते हैं। इसके कारण दस्त, उल्टी, पेट दर्द और तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, फूड पॉइजनिंग का सबसे बड़ा कारण खाना पकाने, परोसने और स्टोर करने में की गई छोटी-छोटी गलतियां हैं। खासकर गर्मी और नमी वाले मौसम में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। केवल बाहरी सफाई ही काफी नहीं होती, बल्कि भोजन को सही तापमान पर पकाना और सुरक्षित तरीके से स्टोर करना भी बेहद जरूरी है।
खाना बनाने और रखने में होने वाली गलतियां
फूड पॉइजनिंग की एक बड़ी वजह ‘क्रॉस-कंटैमिनेशन’ है। अक्सर लोग कच्चे मांस या सब्जियां काटने के बाद उसी चाकू और चॉपिंग बोर्ड का इस्तेमाल पके भोजन के लिए कर लेते हैं। इसके अलावा, खाने को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर खुला छोड़ देना भी बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देता है। फ्रीज में रखा भोजन बार-बार गर्म करके दोबारा ठंडा करना भी हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इससे टॉक्सिन्स बनने का खतरा रहता है।
व्यक्तिगत स्वच्छता की अनदेखी
हाथों की सही तरीके से सफाई न करना भी संक्रमण की बड़ी वजह बन सकता है। खाना बनाने या खाने से पहले साबुन से हाथ धोना जरूरी है। साथ ही, रसोई में इस्तेमाल होने वाले कपड़े, स्पंज और तौलिए की नियमित सफाई भी जरूरी है, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया आसानी से पनपते हैं और बर्तनों के जरिए भोजन को दूषित कर सकते हैं।
बाहर का और अधपका भोजन
स्ट्रीट फूड या बाहर का खाना खाते समय स्वच्छता का ध्यान न रखना जोखिम भरा हो सकता है। कच्चे अंडे, अधपका मांस और बिना धुली सब्जियां परजीवियों और बैक्टीरिया का स्रोत बन सकती हैं। अधपके भोजन में मौजूद जीवाणु शरीर में जाकर तेजी से बढ़ते हैं। खासतौर पर सी-फूड और डेयरी उत्पाद अगर ताजे न हों, तो गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
सावधानी ही बचाव
फूड पॉइजनिंग से बचना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ी सतर्कता जरूरी है। हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका भोजन करें। कच्चे और पके खाने को अलग-अलग रखें और रसोई के उपकरणों को साफ रखें। यदि संक्रमण के बाद लगातार उल्टी, दस्त या तेज बुखार हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। आपकी छोटी-सी सावधानी बड़ी स्वास्थ्य समस्या से बचा सकती है।


































