रवींद्र जडेजा भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में रहे हैं, जिन्होंने आलोचना को अपनी ताकत बनाया है. 2019 में जब उन्हें “बिट्स एंड पीसेज़” खिलाड़ी कहा गया, तब जडेजा ने तीनों फॉर्मेट में प्रदर्शन कर अपनी अहमियत साबित की. टेस्ट क्रिकेट में आज भी उनका रुतबा कायम है और दिसंबर 2024 में रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद वे भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिन ऑलराउंडर बने हुए हैं. हालांकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में तस्वीर अब बदलती दिख रही है.
टी20 इंटरनेशनल से जडेजा पहले ही 2024 में विश्व कप जीत के बाद संन्यास ले चुके हैं. वनडे क्रिकेट में भी उनका बेहतरीन प्रदर्शन 2023 तक ही नजर आया. उसी साल उन्होंने 26 वनडे मैच खेले, जिनमें करीब 31 की औसत से रन बनाए और नियमित विकेट भी लिए. हालांकि इसके बाद उनका ग्राफ नीचे जाता दिखा. 2019 विश्व कप के बाद के कुछ सालों में उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रही और 2024 में उन्हें एक भी वनडे खेलने का मौका नहीं मिला.
2025 और 2026 को मिलाकर जडेजा ने सिर्फ 13 वनडे मैच खेले. इन मुकाबलों में उनके बल्ले से सिर्फ 139रन ही निकले. न तो उनकी बल्लेबाजी में वह असर दिखा और न ही गेंद से वही धार नजर आई, जिसके लिए वे जाने जाते थे. भले ही उनके करियर आंकड़े मजबूत हों- 200 से ज्यादा वनडे, 2866 रन और 200 से अधिक विकेट—लेकिन हालिया दो सालों के प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं और फैंस दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
बल्लेबाजी क्रम बनी बड़ी समस्या
जडेजा को नंबर 5 और 6 पर बल्लेबाजी कराने का प्रयोग टीम इंडिया और आईपीएल दोनों में ज्यादा सफल नहीं रहा. इन स्थानों पर उन्हें सीमित मौके मिले और रन भी कम बने. इसके उलट, नंबर 7 पर उन्होंने अपने करियर में सबसे ज्यादा प्रभाव डाला है. हालिया वनडे में उनका जल्दी आउट होना भी आलोचना की वजह बना, क्योंकि टीम को उस वक्त उनके अनुभव की सबसे ज्यादा जरूरत थी.
अक्षर पटेल और सुंदर की चुनौती
जडेजा के लिए मुश्किल इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे ऑलराउंडर तेजी से उभर रहे हैं. अक्षर ने हाल के वनडे मैचों में बल्ले और गेंद दोनों से दमदार प्रदर्शन किया है और चयनकर्ताओं का भरोसा जीता है. सुंदर फिलहाल चोटिल हैं, लेकिन फिट होते ही वे भी मजबूत दावेदार होंगे. इसके अलावा रियान पराग और आयुष बदोनी जैसे युवा खिलाड़ी भविष्य की योजनाओं में शामिल हैं
आखिरी मौके की लड़ाई
सुंदर की चोट ने जडेजा को मौजूदा सीरीज में एक मौका जरूर दिया है. वे टीम में एकमात्र अनुभवी स्पिन ऑलराउंडर हैं और अगर इन मैचों में उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया, तो उनका वनडे करियर कुछ और आगे बढ़ सकता है. हालांकि अगर असर नहीं दिखा, तो 50 ओवर के क्रिकेट में उनका सफर जल्द थम सकता है.


































