13 साल तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे Harish Rana का 24 मार्च को निधन हो गया। उनका मामला उस समय देशभर में चर्चा का विषय बना था, जब Supreme Court of India ने उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। अब उनकी इस मार्मिक कहानी को फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि मुंबई के एक लेखक ने हरीश राणा के जीवन पर फिल्म बनाने की इच्छा जताई है और इसके लिए उनके वकील मनीष जैन से संपर्क भी किया है। फिल्म में सिर्फ हरीश की हालत ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के संघर्ष, कानूनी लड़ाई और भावनात्मक पहलुओं को भी दिखाया जाएगा।
हरीश राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले थे। उनके पिता बेहतर जीवन की तलाश में 1989 में दिल्ली आ गए थे। परिवार सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया और हरीश कोमा में चले गए।
लगातार इलाज और उम्मीदों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। 13 साल तक बेटे को इसी हालत में देखने के बाद परिवार ने भारी मन से इच्छामृत्यु का फैसला लिया। इस फैसले को कानूनी मंजूरी दिलाने के लिए करीब तीन साल तक लंबी लड़ाई चली, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी।
इस पूरे मामले ने न सिर्फ कानून और संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर बहस छेड़ी, बल्कि सम्मानजनक मृत्यु (इच्छामृत्यु) जैसे मुद्दे को भी देश के सामने प्रमुखता से रखा। हरीश राणा के अंगदान के फैसले ने इस कहानी को और भी भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया।
अब उनकी जिंदगी पर बनने वाली फिल्म के जरिए इस संघर्ष, दर्द और सम्मानजनक विदाई की कहानी को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी, जो समाज को सोचने पर मजबूर कर सकती है।


































