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सोशल मीडिया को लेकर बड़ी खबर: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर गंभीर सवाल- व्हाट्सऐप और मेटा के खिलाफ अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय मुकदमा, भारत सहित पांच देशों के यूज़र्स ने लगाए निजी संदेशों तक पहुंच के आरोप

  • व्हाट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा पर अमेरिका की संघीय अदालत में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को लेकर क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है।
  • भारत सहित पांच देशों के यूज़र्स ने आरोप लगाया है कि उनके निजी और एन्क्रिप्टेड संदेशों तक कंपनी की आंतरिक पहुंच मौजूद है।
  • मुकदमे में दावा किया गया है कि मेटा के कर्मचारी तकनीकी टूल्स के जरिए यूज़र्स की चैट लगभग रियल-टाइम में देख सकते हैं।
  • व्हाट्सऐप के उन दावों पर सवाल उठाए गए हैं, जिनमें कहा गया था कि संदेशों की सामग्री तक कंपनी की कोई पहुंच नहीं होती।
  • यह मामला पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और डिजिटल निजता से जुड़े वैश्विक भरोसे के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

वाशिंगटन/नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप और उसकी मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. पर अमेरिका की एक संघीय अदालत में बेहद गंभीर आरोपों के साथ मुकदमा दायर किया गया है। यह मामला केवल एक तकनीकी विवाद नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में यूज़र्स की निजता, भरोसे और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इस मुकदमे में दावा किया गया है कि व्हाट्सऐप द्वारा वर्षों से किए जा रहे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

यह क्लास एक्शन मुकदमा अमेरिका के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया स्थित यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दाखिल किया गया है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के व्हाट्सऐप यूज़र्स वादी के रूप में शामिल हैं।

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का दावा और व्हाट्सऐप की वैश्विक पहचान

व्हाट्सऐप ने खुद को शुरू से ही एक ऐसे सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया है, जहां यूज़र्स की बातचीत पूरी तरह निजी रहती है। कंपनी का लगातार यह दावा रहा है कि उसके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सिस्टम के तहत संदेश केवल भेजने और प्राप्त करने वाले ही पढ़ सकते हैं और यहां तक कि व्हाट्सऐप या मेटा भी संदेशों की सामग्री तक नहीं पहुंच सकता।

इसी दावे के कारण व्हाट्सऐप को दुनियाभर में पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का भरोसा मिला। खासकर उन देशों में, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित है, व्हाट्सऐप को सुरक्षित संवाद का माध्यम माना गया।

मुकदमे में लगाए गए मुख्य आरोप

अदालत में दायर शिकायत में वादी पक्ष ने दावा किया है कि व्हाट्सऐप और मेटा के सार्वजनिक बयान भ्रामक हैं। शिकायत के अनुसार, कंपनी यूज़र्स के कथित रूप से एन्क्रिप्टेड संदेशों को न केवल स्टोर करती है, बल्कि उनका विश्लेषण भी करती है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि मेटा के कर्मचारी आंतरिक तकनीकी टूल्स के ज़रिए यूज़र्स के संदेशों तक लगभग वास्तविक समय में पहुंच बना सकते हैं।

शिकायत में कहा गया है कि मेटा के वरिष्ठ नेतृत्व ने जानबूझकर अलग-अलग टीमों को सीमित जानकारी देकर काम करने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी कर्मचारी पूरे सिस्टम की वास्तविक स्थिति को समझ न सके और सच्चाई सार्वजनिक न हो।

मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग के बयानों पर सवाल

इस मुकदमे में मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग के उन बयानों का भी उल्लेख किया गया है, जो उन्होंने अमेरिकी सीनेट के समक्ष दिए थे। ज़ुकरबर्ग ने उस दौरान कहा था कि मेटा या फेसबुक की प्रणालियां व्हाट्सऐप संदेशों की सामग्री नहीं देख सकतीं।

वादी पक्ष का कहना है कि ये बयान वास्तविक स्थिति को छिपाने वाले थे और इनका उद्देश्य यूज़र्स और नियामक संस्थाओं को यह विश्वास दिलाना था कि व्हाट्सऐप की गोपनीयता प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि अंदरूनी तौर पर स्थिति कुछ और ही थी।

खास यूज़र्स के लिए अलग नियम होने का दावा

मुकदमे में यह भी दावा किया गया है कि कुछ खास वर्ग के यूज़र्स, जैसे राजनेता, सेलिब्रिटी और मेटा के अपने कर्मचारी, विशेष निगरानी व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं। हालांकि इन खातों तक पहुंच को ट्रैक किया जाता है और कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, फिर भी मेटा के पास उनके संदेशों तक पहुंच बनी रहती है। वादी पक्ष का कहना है कि यह तथ्य अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि व्हाट्सऐप का “पूर्ण गोपनीयता” का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता और यह सभी यूज़र्स के साथ भ्रामक व्यवहार है।

किन कानूनी प्रावधानों के तहत दायर हुआ है मुकदमा

इस मुकदमे में मेटा और व्हाट्सऐप पर कैलिफोर्निया संविधान के अनुच्छेद 1, धारा 1 के तहत निजता के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, कंपनी पर अनुचित लाभ कमाने और वैधानिक चोरी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
वादी पक्ष का तर्क है कि व्हाट्सऐप ने यूज़र्स की निजता और भरोसे को अपने व्यापार मॉडल का हिस्सा बनाकर उससे आर्थिक लाभ कमाया, जो कानूनन गलत है।

किन यूज़र्स पर लागू होगा यह क्लास एक्शन मुकदमा

प्रस्तावित क्लास एक्शन में 5 अप्रैल 2016 के बाद से व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करने वाले वैश्विक यूज़र्स को शामिल किया गया है। हालांकि अमेरिका और कनाडा के यूज़र्स को इस मुकदमे से बाहर रखा गया है, क्योंकि वे व्हाट्सऐप की सेवा शर्तों के तहत आर्बिट्रेशन क्लॉज़ से बंधे हैं। यूरोप और यूनाइटेड किंगडम के यूज़र्स को भी अलग क्षेत्रीय डेटा और कानूनी नियमों के कारण इस मुकदमे में शामिल नहीं किया गया है।

पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए क्यों है यह मामला बेहद संवेदनशील

मुकदमे में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि व्हाट्सऐप की एन्क्रिप्शन नीति पर भरोसा करके दुनिया भर में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार रक्षक संवेदनशील जानकारियों का आदान-प्रदान करते हैं। कई देशों में ऐसी जानकारी लीक होने पर लोगों की स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि जीवन तक खतरे में पड़ सकता है। यदि व्हाट्सऐप के एन्क्रिप्शन दावे असत्य साबित होते हैं, तो यह डिजिटल संवाद की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

मेटा का पुराना प्राइवेसी रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में

शिकायत में मेटा के खिलाफ पहले की गई अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन और यूरोपीय डेटा संरक्षण एजेंसियों की कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया गया है। इससे यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि कंपनी का अतीत भी निजता उल्लंघन से जुड़े मामलों से अछूता नहीं रहा है। वादी पक्ष का कहना है कि यह मुकदमा मेटा के लंबे समय से चले आ रहे प्राइवेसी संबंधी व्यवहार की एक और कड़ी है।

अदालत से क्या राहत मांग रहे हैं वादी

इस मुकदमे के माध्यम से वादी पक्ष आर्थिक हर्जाने के साथ-साथ अदालत से यह भी मांग कर रहा है कि मेटा और व्हाट्सऐप को भविष्य में यूज़र्स की निजता को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रामक दावा करने से रोका जाए। इसके अलावा, मामले में जूरी ट्रायल की भी मांग की गई है।

सिर्फ व्हाट्सऐप नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री पर असर

यह मामला केवल व्हाट्सऐप और मेटा तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल युग में टेक कंपनियों की जवाबदेही, यूज़र्स की निजता और भरोसे से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले समय में इस मुकदमे का फैसला न केवल मेटा की नीतियों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री की प्राइवेसी रणनीतियों पर भी गहरा असर डाल सकता है।

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