पाकिस्तान ने सर क्रीक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य पुनर्गठन और तैनाती शुरू कर दी है. यह क्षेत्र सिंधु नदी के मुहाने पर स्थित एक दलदली इलाका है, जिस पर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. उच्च-स्तरीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार यह कदम सामान्य सैन्य गतिविधि नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है, जो पाकिस्तान की असामरिक (Asymmetrical) युद्ध नीति को दर्शाता है.
इस सैन्य जमावड़े में वायु रक्षा, निगरानी रडार, मरीन ब्रिगेड, ड्रोन गतिविधियां और तेज़ी से बढ़ती नौसैनिक शक्ति शामिल हैं. सर क्रीक की भौगोलिक स्थिति की बात करें तो ये गुजरात तट, अरब सागर और भारत के पश्चिमी नौसैनिक रूट के काफी नजदीक है, जो इसे अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक बनाती है.
मकरान तट पर बहु-स्तरीय रडार और वायु-रक्षा नेटवर्क
पाकिस्तान की सैन्य तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है मकरान तट के साथ-साथ स्थापित घना और बहु-स्तरीय रडार नेटवर्क. सूत्रों के अनुसार इसमें शॉर्ट-रेंज, मीडियम-रेंज और लॉन्ग-रेंज रडार शामिल हैं, जिनकी निगरानी क्षमता 1,000 किलोमीटर तक बताई जा रही है. इस नेटवर्क की खास बात यह है कि इसमें अमेरिकी और चीनी दोनों तकनीक के रडार शामिल हैं. इससे पाकिस्तान को हवाई क्षेत्र की समय रहते निगरानी, समुद्री गश्ती विमानों पर नजर, मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की पहचान करने की बेहतर सुविधा मिलती है. माना जा रहा है कि इन रडारों के साथ-साथ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAMs) भी तैनात की जाएगी, जिससे यह क्षेत्र एक तरह का एरिया-डिनायल ज़ोन बन सकता है.
नई मरीन ब्रिगेड और ड्रोन गतिविधि
पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में करीब 3,000 सैनिकों वाली एक नई मरीन ब्रिगेड भी तैयार कर ली है. सर क्रीक का दलदली, नदी-नालों वाला हिस्सा परंपरागत युद्ध से अधिक असामरिक और हाइब्रिड युद्ध के लिए उपयुक्त माना जाता है. इसके साथ ही इलाके में ड्रोन देखे गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में निरंतर निगरानी रख रहा है. वह कम लागत में खुफिया जानकारी जमा करके लक्ष्य को पहचाने पर जोर दे रहा है.
पनडुब्बी शक्ति में इजाफा
पाकिस्तान अपनी नौसेना को भी तेजी से मजबूत कर रहा है. साल 2026 में ही दो या तीन हैंगर-क्लास पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की जा सकती हैं. ये कुल 8 पनडुब्बियों की परियोजना का हिस्सा हैं, जिनमें से कुछ चीन में और कुछ कराची में बन रही हैं. इन पनडुब्बियों की प्रमुख विशेषताएं ये है कि इसमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक है. इसका वजन 2,800 टन है, जो अधिक समय तक पानी के भीतर रहने की क्षमता रखता है. ये बेहतर गोपनीयता और मारक क्षमता से लैस है. AIP तकनीक पनडुब्बियों को बिना सतह पर आए लंबे समय तक ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है. उल्लेखनीय है कि भारत भी जर्मनी के साथ मिलकर ऐसे ही पनडुब्बियां बनाने की योजना पर काम कर रहा है.


































