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लखनऊ: SVM मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, डिस्चार्ज को लेकर हंगामा

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर थानाक्षेत्र अंतर्गत भारत माता मंदिर के सामने स्थित SVM मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगे हैं। गंभीर हालत में मरीज के साथ कौशाम्बी से राजधानी लखनऊ इलाज के लिए पहुंचे परिजनों का दावा है कि गंभीर हालत में भर्ती मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा और इलाज के नाम पर मात्र 4-5 घंटे का भारी-भरकम बिल थमाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

परिजनों के अनुसार, से एक महिला मरीज को गंभीर स्थिति में देर रात प्रयागराज (कौशांबी) से लखनऊ लाया गया। हालत नाजुक होने के चलते उन्हें तत्काल SVM मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

परिजनों का आरोप है कि रात से सुबह तक इलाज के नाम पर करीब एक लाख रुपये का बिल बना दिया गया। उनका कहना है कि कई टेस्ट और दवाओं का स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया गया, जबकि मरीज की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर ले जाने की मांग

मरीज की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए में शिफ्ट करना चाहते थे। आरोप है कि सुबह से डिस्चार्ज की मांग की जा रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने भुगतान का हवाला देकर मरीज को छोड़ने से इनकार कर दिया।

परिजनों का कहना है कि उन्होंने करीब 40 हजार रुपये तत्काल जमा भी किए, इसके बावजूद डिस्चार्ज नहीं दिया गया। मामला उग्र होने पर परिजनों ने शिकायत किया जिसके बाद मौके पर पुलिस के पहुंचने के बाद मरीज को डिस्चार्ज किया गया।

मारपीट और अभद्रता का आरोप

बिल को लेकर विरोध करने पर अस्पताल स्टाफ द्वारा अभद्रता और धक्का-मुक्की किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। परिजनों का दावा है कि पूरी घटना अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद है।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई की मांग

मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। परिजन निष्पक्ष जांच और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गंभीर मरीज को रोककर रखना मानवता के खिलाफ है।

बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। क्या गंभीर मरीजों को आर्थिक कारणों से रोका जा सकता है? क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसी घटनाओं पर निगरानी रख पा रहा है?

फिलहाल मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है और परिजन उसे जल्द से जल्द ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कराने की कोशिश में जुटे हैं। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।

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