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लखनऊ में शादी बनी मातम : गोमतीनगर में हर्ष फायरिंग से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत, आरोपी फरार

लखनऊ के गोमतीनगर थाना क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान हुई हर्ष फायरिंग ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। विराटखण्ड-1 स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आयोजित विवाह समारोह में चली गोली से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार प्रतिबंध और सख्त निर्देशों के बावजूद हर्ष फायरिंग पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है?

क्या है पूरा मामला?

दिनांक 20/21 फरवरी 2026 की मध्य रात्रि लगभग 01:30 बजे डायल-112 के माध्यम से गोमतीनगर पुलिस को सूचना मिली कि एक शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान एक व्यक्ति को गोली लग गई है। घायल को तत्काल मैक्स हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

मृतक की पहचान सुनील यादव (50 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद यादव, निवासी चांदंज, थाना अलीगंज (नियर कपूरथला चौराहा), लखनऊ के रूप में हुई है। वह अपने रिश्तेदार के विवाह समारोह में शामिल होने आए थे।

किसने की फायरिंग?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि समारोह में मौजूद शाश्वत सिंह नामक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से हर्ष फायरिंग की गई थी। इसी दौरान गोली सुनील यादव को जा लगी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) के निर्देश पर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। हालांकि, अब तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

बड़ा सवाल: प्रतिबंध के बावजूद कैसे हो रही है हर्ष फायरिंग?

प्रदेश में हर्ष फायरिंग पर पहले से प्रतिबंध है। सुप्रीम कोर्ट और प्रशासनिक स्तर पर कई बार स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि शादी समारोहों में हथियारों का प्रदर्शन और फायरिंग दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ में खुलेआम हथियार लहराना और फायरिंग करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है-

  • क्या समारोह आयोजकों ने हथियारों की जांच की?
  • क्या स्थानीय पुलिस को समारोह की पूर्व सूचना थी?
  • क्या देर रात तक चल रहे समारोहों की निगरानी की जा रही थी?
  • लाइसेंसी हथियार का दुरुपयोग हुआ या अवैध हथियार इस्तेमाल हुआ?

स्थानीय पुलिस की अनदेखी या व्यवस्था की ढिलाई?

गोमतीनगर जैसे पॉश इलाके में इस तरह की घटना होना प्रशासनिक सतर्कता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अक्सर देखा गया है कि शादी समारोहों में हथियारों का प्रदर्शन ‘भौकाल’ दिखाने के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए न तो आयोजकों पर सख्ती दिखाई देती है और न ही पुलिस द्वारा पूर्व निगरानी की ठोस व्यवस्था।

यदि पुलिस की गश्त और खुफिया निगरानी प्रभावी होती तो क्या यह घटना टाली जा सकती थी? क्या लाइसेंसी हथियारों की मॉनिटरिंग व्यवस्था कागजों तक सीमित है?

कानूनी स्थिति

फिलहाल मृतक के परिजनों द्वारा थाना गोमतीनगर में प्रार्थनापत्र नहीं दिया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रार्थनापत्र प्राप्त होने पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। शव का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

हालांकि, सवाल यह भी है कि जब घटना स्पष्ट रूप से सामने है, तो क्या पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज नहीं करना चाहिए?

हर्ष फायरिंग: ‘जश्न’ से ‘जनलेवा’ तक

हर्ष फायरिंग की घटनाएं पहले भी प्रदेश में कई जिंदगियां निगल चुकी हैं। हर बार घटना के बाद सख्ती की बात होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कानून के खुलेआम उल्लंघन का परिणाम है।

जब तक-

  • समारोह आयोजकों की जवाबदेही तय नहीं होगी
  • लाइसेंसी हथियारों के दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी

तब तक ‘भौकाल’ दिखाने की यह प्रवृत्ति मासूम जिंदगियों को लीलती रहेगी।

गोमतीनगर की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमियों का आईना है। एक परिवार ने अपने सदस्य को खो दिया, और आरोपी अभी भी फरार है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस कितनी शीघ्र आरोपी को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई करती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

लखनऊ में हर्ष फायरिंग का यह मामला एक बार फिर चेतावनी है-
जश्न में चली एक गोली, हमेशा के लिए एक जिंदगी छीन लेती है।

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