
छतर मंजिल से जनरल कोठी तक शैक्षणिक भ्रमण, छात्रों ने जाना ऐतिहासिक धरोहरों का महत्व
70 विद्यार्थियों की सहभागिता, विरासत संरक्षण के लिए नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर
ऐतिहासिक धरोहरों पर गर्व करें युवा, संरक्षण में निभाएं सक्रिय भूमिका: जयवीर सिंह
विरासत केवल अतीत नहीं, हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी है: जयवीर सिंह

लखनऊ, 21 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और युवाओं में ऐतिहासिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय “यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) द्वारा इतिहास संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारतीय विरासत के महत्व से परिचित कराना और उन्हें सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना था।
ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागी छात्रों को लखनऊ की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने तथा का दौरा किया। भ्रमण के दौरान इन स्मारकों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य शैली, सांस्कृतिक महत्व और संरक्षण संबंधी पहलुओं की जानकारी सरल और संवादात्मक शैली में दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि छतर मंजिल अवध काल की स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण है, जबकि कैसरबाग परिसर लखनऊ की नवाबी विरासत का प्रतीक माना जाता है। छात्रों ने इन इमारतों की वास्तु संरचना, ऐतिहासिक घटनाओं और वर्तमान संरक्षण प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से समझा, जिससे उनकी ऐतिहासिक दृष्टि और गहरी हुई।
विरासत की परिभाषा और युवाओं की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी ने विद्यार्थियों को विरासत की परिभाषा, स्वरूप और उसके सांस्कृतिक आयामों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विरासत केवल भौतिक इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि परंपराएं, भाषा, लोक कला और जीवन शैली भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं। संवाद के माध्यम से छात्रों को यह समझाया गया कि सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विद्यार्थियों को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी गई, ताकि वे भविष्य में विरासत संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय योगदान दे सकें।
मंत्री का संदेश: विरासत से जुड़ाव ही असली उद्देश्य
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराना नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। उन्होंने कहा, “विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा है। जब युवा अपनी विरासत पर गर्व करना सीखते हैं, तभी संरक्षण का भाव स्वाभाविक रूप से विकसित होता है।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में जागरूकता फैलाएं।
70 छात्रों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय और जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय के कक्षा 9वीं और 11वीं के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इतिहास संस्थान से सुश्री सुयशा जी सहित पुरातत्व निदेशालय के अधिकारी, शिक्षकगण एवं विद्यालय स्टाफ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
यह पहल न केवल विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अनुभव सिद्ध हुई, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई। युवाओं में जागरूकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाला यह कार्यक्रम भविष्य में विरासत संरक्षण की मजबूत नींव रखने का प्रयास माना जा रहा है।
संपर्क सूत्र – अभिषेक सिंह


































