अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर साफ शब्दों में अपना रुख जाहिर किया है। ईरान ने कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम इनरिचमेंट) को किसी भी हाल में नहीं छोड़ेगा, भले ही उस पर युद्ध ही क्यों न थोप दिया जाए।
तेहरान में आयोजित एक फोरम को संबोधित करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारी कीमत चुकाई है और अब कोई भी ताकत उसे इस अधिकार से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
ईरान बोला- कोई हमारे फैसले तय नहीं कर सकता
अराघची ने कहा कि ईरान इस मुद्दे पर इसलिए अडिग है क्योंकि किसी भी देश को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि ईरान कैसे व्यवहार करे। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर देश पर युद्ध थोपा जाता है, तब भी यूरेनियम संवर्धन जारी रहेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब दो दिन पहले ही उनकी अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात हुई थी।
‘यूरेनियम संवर्धन हमारा अधिकार’
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यूरेनियम इनरिचमेंट ईरान का वैध अधिकार है और इसे जारी रहना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान इस मुद्दे पर किसी समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत को तैयार है।
उन्होंने ओमान की राजधानी मस्कट में हुई बातचीत को सकारात्मक शुरुआत बताया और कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधे संपर्क की संभावना बनी है। लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि विश्वास कायम करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है और वार्ता को जल्द दोबारा शुरू करना होगा।
ट्रंप ने बातचीत को बताया सकारात्मक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ हुई बातचीत को “काफी अच्छी” बताया है और अगले सप्ताह बातचीत के एक और दौर का संकेत दिया है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ने दबाव की नीति जारी रखी है।
वाशिंगटन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर नए टैरिफ लागू किए हैं। इसके अलावा ईरानी तेल निर्यात से जुड़ी शिपिंग कंपनियों और जहाजों पर भी नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।
अमेरिकी सैन्य गतिविधि और ईरान की चेतावनी
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने अरब सागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन का दौरा किया, जिसकी जानकारी यूएस सेंट्रल कमांड ने सार्वजनिक की।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब अमेरिकी ठिकानों पर कार्रवाई करके दिया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम किसी भी हाल में बातचीत का विषय नहीं बनेगा, क्योंकि यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।


































