भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते (इंटरिम ट्रेड डील) के लिए साझा फ्रेमवर्क जारी किया है। इसे द्विपक्षीय साझेदारी में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आगे चलकर एक व्यापक और स्थायी व्यापार समझौते का रास्ता साफ होगा।
सरकार की ओर से बताया गया कि इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू करने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसा संतुलित और लाभकारी व्यापार मॉडल तैयार करना है, जिससे भारत और अमेरिका दोनों को समान रूप से फायदा मिल सके।
किसानों और मछुआरों को होगा बड़ा लाभ
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, खासकर एमएसएमई सेक्टर, किसानों और मछुआरों के लिए अमेरिका जैसे करीब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले विशाल बाजार के दरवाजे खुलेंगे। निर्यात बढ़ने से देश में महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में सीधा फायदा मिलेगा।
कई उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म
इस अंतरिम समझौते के तहत जेनेरिक दवाइयों, रत्न एवं आभूषण और विमान के पुर्जों समेत कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ शून्य करने पर सहमति बनी है। इससे भारत की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में किसानों और ग्रामीण आजीविका के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है।
टैरिफ और आयात-निर्यात पर सहमति
इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्त्र, परिधान, रसायन और मशीनरी उत्पादों पर 25 प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर सहमति जताई है। वहीं भारत भी अमेरिका से आने वाले कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर अपने टैरिफ को या तो घटाएगा या समाप्त करेगा।
इसके साथ ही भारत को ऑटो पार्ट्स के लिए प्राथमिकता आधारित टैरिफ-रेट कोटा मिलेगा, जबकि विमान और विमान पुर्जों पर टैरिफ हटाने का रास्ता भी साफ हुआ है।
अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद का इरादा
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान, कीमती धातु, तकनीकी उपकरण और कोकिंग कोल खरीदने का संकेत दिया है। दोनों देशों ने इस प्रारंभिक समझौते को व्यापारिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।


































