पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी भीषण टकराव अब खुले युद्ध का रूप ले चुका है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए रूस ने दोनों देशों से तुरंत लड़ाई रोकने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान को सैन्य कार्रवाई तत्काल बंद करनी चाहिए और कूटनीतिक स्तर पर संवाद बहाल करना चाहिए। मॉस्को ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
हालात कैसे बिगड़े?
21 फरवरी 2026 से सीमा पर छिटपुट झड़पें शुरू हुई थीं, लेकिन 27 फरवरी की सुबह हालात अचानक गंभीर हो गए। पाकिस्तान ने “ऑपरेशन गजब लिल हक” के तहत अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत कई इलाकों में हवाई हमले किए। इन हमलों में कथित तौर पर तालिबान से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इसके जवाब में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। तोरखाम बॉर्डर और पक्तिया-खुर्रम सीमा क्षेत्र में भीषण गोलाबारी की खबरें सामने आई हैं। अफगान पक्ष ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान की कुछ चौकियों को निशाना बनाया, जबकि पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी हमले जारी हैं।
क्षेत्रीय शक्तियों की चिंता
ईरान और चीन ने भी दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। इन देशों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो इसका असर पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है।
रूस की चिंता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 1980 के दशक में सोवियत संघ अफगानिस्तान में लंबे समय तक युद्ध में शामिल रहा था। ऐसे में मॉस्को इस क्षेत्र में दोबारा बड़े सैन्य टकराव की स्थिति नहीं चाहता।
आगे क्या?
दोनों देशों की ओर से फिलहाल सैन्य कार्रवाई जारी है और बयानबाजी भी तेज है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है कि संघर्ष को और न बढ़ाया जाए। अगर जल्द कूटनीतिक पहल नहीं हुई, तो यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है।
स्थिति लगातार बदल रही है और क्षेत्रीय व वैश्विक शक्तियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।


































