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पाकिस्तान में ट्रंप का मेगा निवेश, रेको दीक खान प्रोजेक्ट में 1.3 अरब डॉलर लगाने का ऐलान

अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित रेको दीक खान में 1.3 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। यह निवेश अमेरिकी योजना प्रोजेक्ट वॉल्ट का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में जरूरी खनिज और दुर्लभ धातुओं के बाजार को मजबूत करना है।

रेकॉ दीक खान दुनिया के सबसे बड़े सोने और तांबे के भंडारों में से एक माना जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि प्रोजेक्ट वॉल्ट के तहत यह पाकिस्तान में अकेला विदेशी निवेश है।

प्रोजेक्ट वॉल्ट की शुरुआत:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी 2026 को इस योजना की घोषणा की थी। इसे अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। EXIM ने इस प्रोजेक्ट के लिए 10 अरब डॉलर का लोन मंजूर किया है, जो इस एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ा लोन है।

अमेरिका में निवेश के अन्य उदाहरण:

  • 10 अरब डॉलर अमेरिकी स्ट्रैटेजिक क्रिटिकल मिनरल रिजर्व के लिए।
  • पेंसिल्वेनिया में टाइटेनियम, निकल और एडवांस मेटल पाउडर के लिए 27.4 मिलियन डॉलर।
  • टेनेसी में एडवांस मटेरियल और जरूरी धातुओं की प्रोसेसिंग के लिए 23.5 मिलियन डॉलर।
  • न्यूयॉर्क में जिंक खनन और उत्पादन के लिए 15.9 मिलियन डॉलर।
  • वर्जीनिया में टाइटेनियम प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग के लिए 11.1 मिलियन डॉलर।

इस सूची में पाकिस्तान ही ऐसा देश है, जहां अमेरिका ने अपने देश के बाहर सीधे निवेश किया है।

रेकॉ दीक खान का महत्व:
इस इलाके में लगभग 5.9 अरब टन अयस्क है, जिसमें 0.41% तांबा और करीब 41.5 मिलियन औंस सोना मौजूद है। यह बलूचिस्तान की चागाई पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है और क्वेटा-तफ्तान रेलवे लाइन तथा अफगानिस्तान की सीमा के बीच फैला हुआ है।

कानूनी विवाद:
साल 2011 में यह परियोजना पाकिस्तान और थेथ्यान कॉपर कंपनी (TCC) के बीच विवाद का केंद्र बन गई थी। आरोप था कि ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान निवेश समझौते का उल्लंघन हुआ और TCC को खनन के अधिकार गलत तरीके से नहीं दिए गए।

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