पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत की राजधानी पेशावर में स्थित सरकारी विश्वविद्यालय इस्लामिया कॉलेज ने तालिबानी आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत महिला छात्राओं को पुरुष शिक्षकों के साथ किसी भी प्रकार की पढ़ाई या अन्य बातचीत करने की अनुमति नहीं है।
आदेश के मुख्य बिंदु
पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के अध्यक्ष डॉ. आमिर उल्लाह खान की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि:
- महिला छात्राएं पुरुष शिक्षकों के कार्यालय में नहीं जा सकतीं।
- पुरुष छात्र महिला शिक्षकों के कार्यालय में नहीं जा सकते।
- यदि किसी बातचीत की आवश्यकता अत्यंत जरूरी हो, तो इसके लिए खैबर पख्तूनख्वाह के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी या प्रांत के गवर्नर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा।
आदेश में दावा किया गया है कि यह कदम छात्र-छात्राओं की भलाई के लिए उठाया गया है और यह मुख्यमंत्री और गवर्नर के निर्देश पर लागू किया गया है।
पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति
खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में महिलाओं की शिक्षा की स्थिति बहुत कमजोर है। यहां महिलाओं की साक्षरता दर केवल 37% है, जबकि पूरे पाकिस्तान में यह आंकड़ा 52% है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के आदेश महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला हैं। पाकिस्तान पहले ही महिला शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेल चुका है।
राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
- पिछले साल अक्टूबर में मुख्यमंत्री बने 36 वर्षीय सुहैल अफरीदी ने खैबर पख्तूनख्वाह में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनकी पहले आलोचना होती थी।
- पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के दौर में महिलाओं को पुरुषों के बराबरी के अधिकार देने और कुप्रथाओं को खत्म करने पर जोर था।
- अफरीदी के प्रशासन में खैबर पख्तूनख्वाह के सबसे पुराने कॉलेज में महिला छात्राओं और पुरुष शिक्षकों की बातचीत पर प्रतिबंध लग गया।
तालिबानी और आतंकवादी गतिविधियों का विस्तार
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सुहैल अफरीदी के शासन में प्रांत में अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि हुई है।
- लोअर डिर के कुम्बन मैदान इलाके में लश्कर ए तैयबा का नया ट्रेनिंग कैंप तैयार किया जा रहा है।
- जैश ए मोहम्मद के प्रशिक्षण कैंप मनसेहरा और हंगू में संचालित हो रहे हैं।
- अफरीदी की सरकार ने कुछ आतंकवादी रोड-शो और गतिविधियों को मंजूरी दी है और पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई है।
पूर्व में इमरान खान ने हाफिज सईद और मसूद अजहर को नजरबंद कर आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाई थी, जबकि अफरीदी के शासन में प्रांत में तालिबानी और आतंकवादी गुटों के लिए सुविधाजनक माहौल बन गया है।


































