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परमाणु परीक्षण विवाद पर चीन का पलटवार, अमेरिका पर झूठे आरोप गढ़ने का लगाया इल्ज़ाम

अमेरिका द्वारा चीन पर गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण करने के आरोप लगाए जाने के बाद बीजिंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका बिना किसी ठोस सबूत के निराधार दावे कर रहा है और परमाणु परीक्षण को लेकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

चीन का कहना है कि उसने कभी भी अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए परमाणु परीक्षण नहीं किया है। बीजिंग ने वाशिंगटन से ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बयानबाज़ी तुरंत बंद करने की मांग की है।

अमेरिकी दावों को बताया बेबुनियाद

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की ओर से यह दावा किया गया था कि चीन ने 22 जून 2020 सहित कुछ तारीखों पर गुप्त तरीके से परमाणु परीक्षण किए और भविष्य में भी बड़े परीक्षणों की तैयारी कर रहा है। चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय भरोसे को कमजोर करते हैं।

परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका की नई रणनीति

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका परमाणु हथियारों को लेकर रूस और चीन के साथ नई सीमाएं तय करने की बात कर रहा है। न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने के बाद अमेरिका एक नई त्रिपक्षीय व्यवस्था की वकालत कर रहा है, जिसमें चीन को भी शामिल किया जाए।

अमेरिकी नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि भविष्य में किसी भी नई परमाणु संधि में चीन की भागीदारी जरूरी मानी जाएगी। इसी क्रम में चीन पर दबाव बढ़ाने की कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं।

2020 के कथित परीक्षण को लेकर भी विवाद

अमेरिका की ओर से यह भी दावा किया गया कि जून 2020 में चीन ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों से बचते हुए एक गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। इस तारीख को लेकर इसलिए भी चर्चा हुई क्योंकि इससे कुछ दिन पहले भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी।

हालांकि चीन ने इस पूरे दावे को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसे आरोप पूरी तरह राजनीतिक मकसद से लगाए जा रहे हैं और इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

परमाणु हथियार नियंत्रण से जुड़ी प्रमुख संधियों के कमजोर पड़ने के बाद वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच आरोप-प्रत्यारोप से अंतरराष्ट्रीय तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

चीन ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और परीक्षण के खिलाफ जिम्मेदार रुख अपनाता रहेगा, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या झूठे आरोपों को स्वीकार नहीं करेगा।

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