
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने नियम 301 के अंतर्गत अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनहितकारी विषय को प्रभावशाली ढंग से सदन में उठाया। सदन द्वारा उनकी सूचना को स्वीकार कर लिया गया, जिससे सरोजनीनगर के विस्तारित क्षेत्रों के विकास को लेकर एक सकारात्मक संदेश गया है। यह पहल न केवल क्षेत्रीय समस्याओं को शासन के सर्वोच्च मंच तक पहुँचाने का प्रयास है, बल्कि विकास की दिशा में एक ठोस कदम भी है।
नियम 301 क्या है और इसका महत्व क्यों है
उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही में नियम 301 एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जिसके अंतर्गत कोई भी विधायक जनहित से जुड़े अत्यावश्यक विषय पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कर सकता है। इस नियम के तहत उठाए गए मुद्दे सीधे तौर पर सदन की कार्यवाही का हिस्सा बनते हैं और संबंधित विभागों को उस पर जवाब देना होता है। ऐसे में डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा नियम 301 के अंतर्गत सूचना दिया जाना यह दर्शाता है कि सरोजनीनगर की समस्या को गंभीरता से और औपचारिक रूप से शासन के समक्ष रखा गया है।
36 ग्राम पंचायतों का नगर निगम में विलय और विकास का ठहराव
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र की 36 ग्राम पंचायतें नगर निगम लखनऊ के विस्तारित क्षेत्र में सम्मिलित हो चुकी हैं। प्रशासनिक सीमाओं में परिवर्तन के बाद इन गाँवों का स्वरूप तो बदला, लेकिन विकास की गति अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ सकी।
नगर निगम में शामिल होने के बाद ग्रामीण ढांचे से शहरी ढांचे में संक्रमण की प्रक्रिया शुरू तो हुई, परंतु कई स्थानों पर सड़क, नाली, सीवर लाइन और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का समुचित विकास अभी तक नहीं हो पाया है। इससे स्थानीय निवासियों को दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मूलभूत सुविधाओं की कमी: आम नागरिकों की बड़ी चिंता
सदन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि विस्तारित क्षेत्रों में आज भी कई मार्ग कच्चे या जर्जर अवस्था में हैं, जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है, सीवर लाइन का अभाव है और नियमित पेयजल आपूर्ति की समस्या बनी हुई है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से शहरी व्यवस्था में शामिल होने के बाद नागरिकों की अपेक्षाएँ भी बढ़ी हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में वे स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। विधायक ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र का हिस्सा होने के बावजूद इन इलाकों को अभी तक राजधानी स्तर की सुविधाएँ प्राप्त नहीं हो सकी हैं।
एयरपोर्ट के निकट रणनीतिक महत्व और निवेश की संभावनाएँ
डॉ. राजेश्वर सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निकट स्थित है। इस कारण यह क्षेत्र रणनीतिक, औद्योगिक और निवेश की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि विस्तारित क्षेत्रों में सड़क, सीवर, जलापूर्ति और अन्य अवस्थापना सुविधाओं का सुदृढ़ विकास किया जाता है, तो यह न केवल स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगा, बल्कि प्रदेश में निवेश और रोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ाएगा। ऐसे में इन क्षेत्रों का विकास प्रदेश की समग्र प्रगति से भी जुड़ा हुआ विषय है।
अतिरिक्त बजट की मांग: स्थायी समाधान की दिशा में पहल
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि विस्तारित क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष प्राथमिकता तय की जाए और अतिरिक्त धनराशि आवंटित की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तब तक अधूरी परियोजनाएँ और बुनियादी समस्याएँ पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकेंगी।
उनकी मांग का उद्देश्य केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करना है, ताकि आने वाले वर्षों में सरोजनीनगर के विस्तारित क्षेत्र भी राजधानी लखनऊ के अन्य विकसित हिस्सों के समकक्ष खड़े हो सकें।
सूचना स्वीकार होने से क्षेत्रवासियों में बढ़ी उम्मीद
सदन द्वारा नियम 301 के अंतर्गत दी गई सूचना को स्वीकार किए जाने के बाद सरोजनीनगर क्षेत्र में आशा और विश्वास का वातावरण बना है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि अब उनकी समस्याएँ केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि ठोस कार्ययोजना के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
यह पहल दर्शाती है कि जब जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता के साथ क्षेत्रीय मुद्दों को सदन में उठाते हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। सरोजनीनगर के विस्तारित क्षेत्रों के विकास का यह मुद्दा अब औपचारिक रूप से शासन के एजेंडे में शामिल हो चुका है, जिससे आने वाले समय में सकारात्मक परिणामों की संभावना मजबूत हुई है।


































