HomeDaily Newsताइवान को लेकर चीन बड़े और खतरनाक ऑपरेशन की योजना बना सकता...

ताइवान को लेकर चीन बड़े और खतरनाक ऑपरेशन की योजना बना सकता है, नई रिपोर्ट ने अमेरिका की टेंशन बढ़ा दी।

जिस तरीके से अमेरिका ने वेनेजुएला और ग्रीनलैंड पर अपनी नजर बना रखी है, उसी तरह से चीन की नजर ताइवान पर है. चीन ताइवान पर जबरन अपना अधिकार जमाता है. हालांकि, ताइवान खुद को एक अलग स्वतंत्र देश मानता है. अमेरिका ने जिस तरह से वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई की, तब से आकलन लगाए जा रहे थे कि चीन भी ताइवान के साथ ऐसा कर सकता है. इसे लेकर ग्लोबल ताइवान इंस्टीट्यूट (जीटीआई) के डायरेक्टर जॉन डॉटसन ने चेतावनी दी है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ताइवान के आसपास ज्यादा आक्रामक और बड़े ऑपरेशन कर सकती है.

रिपोर्ट ने बढ़ाई ताइवान की टेंशन

स्थानीय मीडिया के अनुसार, पीएलए 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने की क्षमता हासिल कर लेगी. ताइवान के डेली अखबार ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जीटीआई की एक सीनियर नॉन-रेसिडेंट फेलो, एन कोवालेवस्की ने कहा कि 2026 चीन की पीएलए के लिए इस क्षमता तक पहुंचने का आखिरी साल है. जीटीआई ने वॉशिंगटन में ‘2026 में ताइवान पॉलिसी के लिए आगे की सोच’ शीर्षक वाले एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया था. जीटीआई ने 2025 में ताइवान के खिलाफ चीन के बढ़ते दबाव को रेखांकित किया है, जिसमें पीएलए की ‘जस्टिस मिशन 2025’ सैन्य अभ्यास भी शामिल है. विश्लेषकों ने जोर देकर कहा कि 2027 क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों में एक निर्णायक मोड़ ला सकता है.

उन्होंने याद दिलाया कि 2021 में तत्कालीन अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड प्रमुख एडमिरल फिलिप डेविडसन ने चेतावनी दी थी कि शी जिनपिंग ने पीएलए को 2027 तक ताइवान पर संभावित हमले के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया था. कोवालेवस्की ने कहा कि काफी पॉलिटिकल एनालिसिस से पता चलता है कि वे अभी पूरी तरह से वहां नहीं पहुंचे हैं.

‘PRC की सैन्य क्षमता में दिख सकती है बढ़ोतरी’

उन्होंने कहा, ‘इस साल हम पीआरसी की सैन्य क्षमता में भारी बढ़ोतरी देख सकते हैं. यह साफ नहीं है कि ताइवान और अमेरिका अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं या यह पक्का करने के लिए अनोखे तरीके सोच सकते हैं कि वे एक स्थिर इलाके में पावर बैलेंस को बिना किसी भेदभाव के बनाए रख सकें.’

डॉटसन ने कहा कि अप्रैल और दिसंबर में पीएलए का सैन्य अभ्यास ताइवान के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में मुख्य द्वीप के पास हुई थीं और इसमें चीनी कोस्ट गार्ड का ज्यादा आक्रामक इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने कहा कि कोस्ट गार्ड को तैनात करना चीन के नैरेटिव को पूरा करता है. चीन को सैन्य घुसपैठ के बजाय कानून लागू करने वाली गश्त के तौर पर सही ठहराया जा सकता है.

जीटीआई के डायरेक्टर ने कहा कि चीन अक्सर अपनी सैन्य अभ्यासों के लिए एक तरह का नैरेटिव जस्टिफिकेशन पेश करता है. उदाहरण के तौर पर, मार्च में हुई चीनी घुसपैठ को लेकर अपनाई गई नीति के लिए ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई को जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि पिछले साल दिसंबर में अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री के पैकेज को भी ऐसे ही अभ्यासों का कारण बताया गया. यह जानकारी ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट में सामने आई है.

‘बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यासों की योजना पहले तैयार की जाती है’

जीटीआई डायरेक्टर ने इन दावों पर संदेह जताते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाले सैन्य अभ्यासों की योजना काफी पहले से तैयार की जाती है, न कि किसी तात्कालिक घटना के जवाब में. वहीं, इसी महीने की शुरुआत में ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) पर आरोप लगाया कि उसने ताइवान के आसपास सैन्य ड्रिल की, साइबर हमले किए, 19,000 से ज्यादा विवादित संदेश फैलाए और लाखों हैकिंग प्रयास किए.

ताइवान के डेली अखबार ताइपे टाइम्स ने बताया कि ये गतिविधियां ताइवान पर दबाव बढ़ाने की चीन की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं. लेजिस्लेटिव युआन को दी गई एक रिपोर्ट में, एजेंसी ने कहा कि ऑनलाइन एक्टिविटी में 799 अजीब अकाउंट शामिल थे और यह अमेरिका, ताइवान के प्रेसिडेंट विलियम लाई और मिलिट्री के बारे में बढ़ते संदेह पर केंद्रित था। इसमें ताइवान की खुद को बचाने की काबिलियत को लेकर चिंता का जिक्र था.

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments