टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने राज्य की सभी सरकारी एजेंसियों और सरकारी विश्वविद्यालयों में नए H-1B वीजा आवेदन पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया है. उनका कहना है कि इस वीजा प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल हो रहा है और अमेरिकी नौकरियों पर सबसे पहला हक अमेरिकी, खासकर टेक्सास के लोगों का होना चाहिए. यह रोक 31 मई 2027 तक लागू रहेगी.
H-1B वीजा पर क्यों लगी रोक
गवर्नर एबॉट ने कहा कि हाल की रिपोर्टों में सामने आया है कि H-1B वीजा प्रोग्राम का दुरुपयोग किया गया है. कई जगहों पर अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को रखा गया, वो भी कम वेतन पर. एबॉट का कहना है कि यह प्रोग्राम अमेरिकी कामगारों की मदद के लिए बनाया गया था, उनकी जगह लेने के लिए नहीं.
H-1B वीजा क्या है?
H-1B वीजा के ज़रिए अमेरिकी कंपनियां और संस्थान विदेशी प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रख सकते हैं. इसके लिए कम से कम ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी होती है. हर साल 65,000 H-1B वीजा दिए जाते हैं और उच्च डिग्री वालों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा होते हैं. ये वीजा आमतौर पर 3 से 6 साल के लिए मान्य होते हैं.
टेक्सास के विश्वविद्यालयों पर असर
टेक्सास में कई सरकारी विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और कुछ स्कूल जिलों में H-1B वीजा एक अहम सहारा रहा है. इसके ज़रिए प्रोफेसर, रिसर्चर, डॉक्टर और टीचर जैसे पदों पर लोगों की भर्ती होती रही है, जहां स्थानीय उम्मीदवार कम मिलते हैं.
टेक्सास की नौकरियां टेक्सास वालों के लिए
गवर्नर एबॉट ने कहा कि टैक्सपेयर्स के पैसों से चलने वाली नौकरियों में सरकार को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए. उनका मानना है कि कई ऐसी नौकरियां हैं जिन्हें टेक्सास के लोग आसानी से कर सकते हैं, लेकिन वहां विदेशी कर्मचारियों को रखा जा रहा है.
किन पर लागू होगा आदेश
इस आदेश के तहत गवर्नर द्वारा नियुक्त प्रमुखों वाली सभी राज्य एजेंसियां और सरकारी उच्च शिक्षा संस्थान बिना टेक्सास वर्कफोर्स कमीशन की लिखित अनुमति के कोई नया H-1B आवेदन नहीं कर सकेंगे. यह नियम टेक्सास विधानसभा के 90वें सत्र के खत्म होने तक यानी 31 मई 2027 तक लागू रहेगा.
सरकार को देनी होगी पूरी रिपोर्ट
सभी प्रभावित एजेंसियों और विश्वविद्यालयों को 27 मार्च 2026 तक टेक्सास वर्कफोर्स कमीशन को एक विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी. इसमें 2025 में किए गए H-1B आवेदन, अभी काम कर रहे वीजा धारकों की संख्या, उनका देश, नौकरी का प्रकार, वीजा की अवधि और यह जानकारी शामिल होगी कि विदेशी कर्मचारी रखने से पहले टेक्सास के लोगों को नौकरी देने की क्या कोशिश की गई.
ट्रंप सरकार ने भी सख्त किए नियम
पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर नया नियम लागू किया था, जिसके तहत नए आवेदकों से एक बार में 1 लाख डॉलर फीस ली गई. इस फैसले को 20 से ज्यादा अमेरिकी राज्यों ने अदालत में चुनौती दी, लेकिन टेक्सास इस मुकदमे में शामिल नहीं हुआ.
भारतीय नागरिकों पर असर
वित्त वर्ष 2024 में H-1B वीजा पाने वालों में 71 फीसदी भारतीय नागरिक थे. लेकिन 2025 में बड़ा बदलाव देखने को मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए वीजा मंजूरी 37 फीसदी तक गिर गई, जो पिछले 10 साल में सबसे कम है.


































