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ग्रीन बिल्डिंग्स अभियान बनें जन-आंदोलन : डॉ. राजेश्वर सिंह ने हरित निर्माण को दी नई दिशा, उन्होंने ग्रीन बिल्डिंग्स सम्मेलन में भावुक आह्वान करते हुए कहा- प्रकृति का गर्व बने हमारा शहर

  • ग्रीन बिल्डिंग्स को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने इसे भविष्य की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
  • ग्रीन बिल्डिंग्स से 30–40% ऊर्जा और 20–30% जल बचत संभव, सही समय पर सही निर्णय की जरूरत पर जोर।
  • योगी सरकार के नेतृत्व में यूपी ने ग्रीन बिल्डिंग कोड अपनाकर देश में अग्रणी भूमिका निभाई।
  • सरोजनीनगर में सोलर, तारा शक्ति केंद्र और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे नवाचारों से हरित मॉडल प्रस्तुत।
  • सम्मेलन में मिले सुझावों को नीति स्तर पर लागू कर यूपी को सतत विकास का मॉडल राज्य बनाने का संकल्प

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को गोमती नगर स्थित होटल ग्रैंड जेबीआर में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन (LMA) द्वारा आयोजित “ट्रांसफॉर्मिंग रियल एस्टेट इन उत्तर प्रदेश थ्रू ग्रीन बिल्डिंग्स” विषयक सम्मेलन में सहभागिता कर ग्रीन बिल्डिंग्स को जन-आंदोलन बनाने का सशक्त आह्वान किया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ग्रीन एनर्जी अब विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्यावरण संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण, गिरता भूजल स्तर और बढ़ता AQI मानवता के भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी हैं।

उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर हर वर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है, जिनमें से लगभग 24 लाख मौतें भारत में होती हैं। अर्थ ओवरशूट डे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां वर्ष 1972 में यह 26 दिसंबर को पड़ता था, वहीं अब यह अगस्त के पहले सप्ताह तक सिमट चुका है, जो यह दर्शाता है कि मानवता प्रकृति की सीमाओं से कहीं अधिक उपभोग कर रही है।

ग्रीन बिल्डिंग्स केवल तकनीक नहीं, जन-आंदोलन बनें

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग्स केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी हैं। उन्होंने कहा, “हर नागरिक को यह गर्व होना चाहिए कि उसका घर, उसकी सोसायटी, उसका बाजार और उसका शहर ग्रीन है।” उन्होंने बताया कि ग्रीन बिल्डिंग्स से 30–40 प्रतिशत ऊर्जा और 20–30 प्रतिशत जल की बचत संभव है। जब देश की लगभग 70 प्रतिशत इमारतें अभी बननी शेष हैं, तो यही सही समय है कि ग्रीन कंस्ट्रक्शन को मुख्यधारा बनाया जाए। उन्होंने सरकार से अधिक टैक्स इंसेंटिव, कम ब्याज दर पर ऋण, FAR में वृद्धि और संपत्ति कर में रियायत जैसे प्रोत्साहनों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

ग्रीन नीति में यूपी अग्रणी : योगी सरकार की सराहना

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने ग्रीन बिल्डिंग कोड अपनाकर देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है और 22,000 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो नेट ज़ीरो 2070 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि नीति, नियमन और राजनीतिक इच्छाशक्ति -तीनों स्तरों पर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है।

सरोजनीनगर की हरित मिसाल

सोलर से वेस्ट-टू-एनर्जी तक अपने क्षेत्र सरोजनीनगर का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि वहां 160 से अधिक ‘तारा शक्ति केंद्र’ संचालित हैं, जिनके माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त किया जा रहा है। इन केंद्रों में 2000 से अधिक सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं और अब तक 30,000 से अधिक इको-फ्रेंडली स्कूल बैग तैयार कर वितरित किए जा चुके हैं, जिससे प्लास्टिक के उपयोग में उल्लेखनीय कमी आई है।

उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय में सोलर हेल्प डेस्क संचालित है और लखनऊ की कुल 120 मेगावाट सौर क्षमता में से 60 मेगावाट से अधिक अकेले सरोजनीनगर में स्थापित की जा चुकी है। इसके साथ ही शिविरी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संयंत्र प्रतिदिन 2100 मीट्रिक टन कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है और लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बनने की ओर अग्रसर है, जो अपने संपूर्ण कचरे को ऊर्जा में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।

नीति स्तर पर आगे बढ़ेंगे सुझाव

सम्मेलन को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर LMA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ए.के. माथुर, अमित श्रीवास्तव (चेयरमैन, इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल-लखनऊ चैप्टर), जय कुमार गुप्ता (GM, SIDBI), अशोक कुमार, राज वर्मा, आर्किटेक्ट एस.के. सारस्वत, प्रवीन कुमार द्विवेदी सहित अनेक विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सम्मेलन से प्राप्त सुझावों को नीति स्तर पर गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश को हरित, स्वच्छ और सतत विकास का मॉडल राज्य बनाया जा सके।

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