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कनाडा के अल्बर्टा में ‘खालिस्तान’ का आगाज़, आजादी की मांग और ट्रंप के कदमों पर प्रतिक्रिया

कनाडा सालों से खालिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादियों को संरक्षण देता रहा है. भारत ने जब भी ऐसे अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की तो उसने हमेशा खारिज कर दिया, लेकिन अब उसके घर में ही ‘खालिस्तान’ की आग लग गई है. अल्बार्टा की अलगाववादी ताकतों ने इसको कनाडा से अलग होने की मांग उठाई है.

अमेरिका से तनातनी के बीच अब पूरी दुनिया की नजर डोनाल्ड ट्रंप पर है कि जिस कनाडा ने उन्हें चुनौती पेश की है, वो उसका जवाब कैसे देते हैं. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने पिछले अप्रैल से तीन बार एक ऐसे संगठन के नेताओं से मुलाकात की है जो चाहते हैं कि अल्बर्टा, कनाडा से अलग हो जाए. इस संगठन का नाम है- अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट, जो कि अल्बार्टा की आजादी के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग कर रहा है.

कार्नी ने ट्रंप से की ये अपील

वहीं, इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कनाडाई संप्रभुता का सम्मान करने का आग्रह किया है.

कनाडा के लिए क्यों जरूरी है अल्बार्टा

दरअसल, अल्बर्टा पश्चिमी कनाडा का एक तेल से भरपूर प्रांत है, जो लगभग अमेरिका के टेक्सास जितना बड़ा शहर है. इस शहर में करीब 50 लाख लोग निवास करते हैं और यह प्रांत रॉकीज पर्वत श्रृंखला और बैनफ और लेक लुईस जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन से घिरा हुआ है.

वहीं, कनाडा में जितने तेल का उत्पादन होता है, उसका 84 प्रतिशत हिस्सा मात्र अल्बार्टा शहर में ही निकलता है. इसलिए इसे कनाडा का एनर्जी प्रांत भी कहा जाता है. राजनीतिक लिहाजा से इसे कनाडा की कंजर्वेटिव पार्टी का गढ़ माना जाता है, हालांकि इसके शहर क्षेत्र ज्यादा प्रगतिशील हैं.

खालिस्तानी अलगाववादियों को शरण देता रहा है कनाडा

कनाडा करीब 50 सालों से खालिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादियों को पनाह देता रहा है. जब भी भारत ने कनाडा से इन पर कार्रवाई की मांग की है तो इसने खारिज कर दिया है. पीएम कार्नी से पहले जब ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर बवाल खड़ा कर दिया था. उन्होंने निज्जर की हत्या की अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच की मांग की थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया था.

2023 में हुई थी निज्जर की हत्या

बता दें कि ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में 18 जून, 2023 को एक गुरुद्वारे के बाहर अज्ञात हमलावरों ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. भारत ने उसे आतंकवादी घोषित कर दिया था, जोकि खालिस्तान टाइगर फोर्स का चीफ था. कनाडा ने इस हत्याकांड में भारत की संलिप्तता का दावा किया. जस्टिन ट्रूडो ने कनाडाई संसद में आरोप लगाया कि भारत सरकार के एजेंटों ने ही निज्जर की हत्या की. हालांकि, भारत ने कनाडा के आरोपों को बेबुनियाद बताया था. इस विवाद में कनाडा अब तक भारत को एक भी सबूत भी नहीं दे पाया है.

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