
लखनऊ : राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश राज्य संग्रहालय में आयोजित 10 दिवसीय ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का समापन समारोह एवं प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम भव्य रूप से संपन्न हुआ। संग्रहालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
देशभर से आए प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा

इस विशेष पाठ्यक्रम में सौ से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कला, संस्कृति और विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान, कार्यशालाएं और प्रायोगिक सत्र आयोजित किए गए। समापन अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया—
- अतिका वर्मा – प्रथम स्थान
- कशिश चौधरी – द्वितीय स्थान
- कुलदीप सिंह – तृतीय स्थान
- प्रिया तिवारी एवं ऋचा मेहरोत्रा – प्रोत्साहन पुरस्कार
सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित कर उनके कला क्षेत्र में योगदान और रुचि की सराहना की गई।
युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में पहल

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस पाठ्यक्रम में देशभर से आए प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी इसकी लोकप्रियता और महत्व को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि युवाओं और कला प्रेमियों में सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाना है। प्रदेश की समृद्ध विरासत, परंपराओं और कलात्मक धरोहर से नई पीढ़ी को जोड़कर उनमें अपनी जड़ों के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।
ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम में “संग्रहालय की वस्तुओं का निवारक संरक्षण” विषय पर मुख्य वक्ता धर्मेंद्र मिश्रा ने विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने चम्बा रूमाल, लेड ऑब्जेक्ट, टेराकोटा, ग्लास वर्क और वॉल पेंटिंग जैसी ऐतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण की तकनीकों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तापमान, आर्द्रता, प्रकाश और रासायनिक प्रभावों से बचाव के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है। साथ ही संग्रहालयों में संरक्षित वस्तुओं की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक देखभाल पर भी बल दिया।
सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की पहल
संस्कृति विभाग की इस पहल का उद्देश्य युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्रदेश की समृद्ध कला एवं विरासत से जोड़ना है। यह कार्यक्रम नई पीढ़ी में अपनी परंपराओं के प्रति समझ, सम्मान और गर्व की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का यह सफल आयोजन लखनऊ को सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में और सशक्त बनाता है।


































