पश्चिम एशिया में Israel, Iran और United States के बीच एक महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद अब हालात धीरे-धीरे बातचीत की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। तीनों पक्ष शांति स्थापित करने के लिए वार्ता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में जारी तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, इस युद्ध के असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई पर भी इसका असर पड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
इसी बीच, Israel के भीतर इस युद्ध के नतीजों को लेकर जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu द्वारा किए जा रहे जीत के दावों को बड़ी संख्या में लोग स्वीकार नहीं कर रहे हैं। एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि लगभग आधे नागरिक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि ईरान के खिलाफ युद्ध में स्पष्ट जीत हासिल हुई है।
इस स्थिति ने देश के अंदर राजनीतिक माहौल को और अधिक विभाजित कर दिया है। जहां एक ओर सैन्य नेतृत्व पर जनता का भरोसा अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की भूमिका और निर्णयों पर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता और जनता की नाराजगी आने वाले समय में Israel की आंतरिक राजनीति को और प्रभावित कर सकती है। फिलहाल सभी की नजरें संभावित शांति वार्ता और उसके नतीजों पर टिकी हुई हैं।

































