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ईरान को लेकर ट्रंप की क्या है रणनीति? व्हाइट हाउस ने बातचीत और सैन्य कार्रवाई दोनों के दिए संकेत

ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की रणनीति पर बड़ा बयान सामने आया है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा बढ़ने से संभावित कार्रवाई की अटकलें तेज हैं, लेकिन व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि राष्ट्रपति का पहला विकल्प अब भी कूटनीति है।

क्या बोलीं व्हाइट हाउस की प्रवक्ता?

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पहला विकल्प हमेशा कूटनीति होता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर ट्रंप अमेरिकी सेना की “घातक शक्ति” का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे। अंतिम फैसला राष्ट्रपति ही लेंगे।

कांग्रेस को दी जाएगी जानकारी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो व्हाइट हाउस में “गैंग ऑफ एट” कहे जाने वाले कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को ईरान मुद्दे पर ब्रीफ करेंगे। बताया जा रहा है कि सांसदों को ईरान की स्थिति और संभावित रणनीति की जानकारी दी जाएगी।

मिडिल ईस्ट में सैन्य तैनाती बढ़ी

अमेरिका ने ईरान के पास अपने नौसैनिक बल की तैनाती बढ़ा दी है। इससे पहले ट्रंप ने तेहरान को 10–15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था कि वह समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

संभावना जताई जा रही है कि ट्रंप अपने आगामी स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संभावित कदमों का जिक्र कर सकते हैं।

ट्रंप ने खारिज कीं अटकलें

इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर ईरान के साथ संभावित युद्ध को लेकर चल रही अटकलों को “फेक न्यूज” बताया था। उन्होंने उन रिपोर्ट्स को भी गलत ठहराया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ईरान के खिलाफ कार्रवाई के पक्ष में नहीं है।

असल संदेश क्या?

व्हाइट हाउस के बयान से साफ है कि ट्रंप प्रशासन फिलहाल कूटनीतिक दबाव और सैन्य शक्ति—दोनों विकल्प खुले रखना चाहता है। यानी अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, लेकिन सीधी सैन्य कार्रवाई आखिरी विकल्प के तौर पर रखी गई है।

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