उत्तरी लंदन में एक घनी पेड़ों से घिरी सड़क को बिलेनियर्स रो के नाम से जाना जाता है. बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियों और काले दरवाजों के पीछे कई खाली आलीशान घर दिखाई देते हैं. स्कूली बच्चे इधर-उधर घूमते नजर आते हैं, जबकि बाहर काली एसयूवी गाड़ियों में निजी गार्ड गश्त लगाते रहते हैं.
बिशप्स एवेन्यू पर स्थित इन आलीशान घरों के पीछे तेहरान से लेकर दुबई और फ्रैंकफर्ट तक फैला एक नेटवर्क है. कई गुप्त कंपनियों के जरिए इन घरों का असली मालिकाना हक मीडिल ईस्ट की सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक ईरान के सर्वोच्च नेता के दूसरे बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई तक पहुंचता है.
अयातुल्ला अली के संभावित उत्तराधिकारी हैं मोजतबा
56 वर्षीय धर्मगुरु मोजतबा खामेनेई को उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है, जो लंदन स्थित इन घरों के मालिक हैं. यह जानकारी मामले से परिचित लोगों और एक प्रमुख पश्चिमी खुफिया एजेंसी के आकलन से मिली है. इन लोगों ने बताया कि युवा खामेनेई सारी प्रॉपर्टी अपने नाम पर नहीं रखते, लेकिन वे डील में खुद शामिल रहे हैं, जिनमें से कई डील 2011 से चल रही हैं.
कहां-कहां किया है निवेश
जानकारों के मुताबिक मोजतबा खामेनेई ने जहाजों के व्यापार में निवेश कर रखा है और स्विस बैंक खातों में भी पूरी नकदी जमा है तो वहीं 138 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की संपत्तियां ब्रिटेन में हैं. कंपनियों के इस जाल ने खामेनेई को 2019 में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अरबों डॉलर की धनराशि पश्चिमी बाजारों में पहुंचाने में मदद की है.
दुबई से लेकर मलोरका तक संपत्तियां
इसमें लंदन के कई सबसे खास इलाकों में स्थित प्रमुख अचल संपत्तियां शामिल हैं, जहां एक घर जिसकी कीमत 2014 में 33.7 मिलियन यूरो थी जब उसे खरीदा गया था. दुबई के बेवर्ली हिल्स कहे जाने वाले क्षेत्र में एक विला और फ्रैंकफर्ट से लेकर मलोरका तक आलीशान यूरोपीय होटल की चेन है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इन लेन-देन के लिए नकदी ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और संयुक्त अरब अमीरात के बैंकों में खातों के माध्यम से भेजी गई है और ये पैसे मुख्य रूप से ईरानी तेल की बिक्री से मिले हैं.
ब्लूमबर्ग द्वारा देखे गए किसी भी दस्तावेज में खामेनेई के नाम पर सीधे तौर पर संपत्तियों का जिक्र नहीं है. इसके बजाय कई खरीददारी एक ईरानी व्यवसायी अली अंसारी के नाम पर दिखाई देती हैं, जिन पर ब्रिटेन ने अक्टूबर में प्रतिबंध लगा दिया था.


































