HomeHEALTHइनट्यूशन थॉट: कैसे हमारी अंदर की आवाज बदल सकती है जिंदगी

इनट्यूशन थॉट: कैसे हमारी अंदर की आवाज बदल सकती है जिंदगी

खेल, बिजनेस और कला की दुनिया के टॉप पर्फॉर्मर्स अक्सर कहते हैं कि इनट्यूशन थॉट यानी “अंदर की आवाज़” ने उन्हें सही वक्त पर तुरंत फैसला लेने में मदद की। यह वही शक्ति है जो आपको पलक झपकते ही निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।

इनट्यूशन कैसे काम करता है?

  • बेसबॉल खिलाड़ियों का उदाहरण लें: 90 मील प्रति घंटे की गेंद के सामने बल्लेबाज के पास सिर्फ 150 मिलीसेकेंड का समय होता है फैसला लेने के लिए।
  • इस समय में दिमाग सोच नहीं पाता, सिर्फ अनुभव और इनट्यूशन काम करती है।
  • यही वजह है कि टॉप खिलाड़ियों के फैसले “नेचुरल” और सही दिखाई देते हैं।

हर इंसान में मौजूद क्षमता

  • 2016 की स्टडी के अनुसार इनट्यूशन कोई खास ताकत नहीं, बल्कि हर इंसान में मौजूद होती है।
  • इसे अनुभव, अभ्यास और खुद पर भरोसा करके मजबूत किया जा सकता है।

दिमाग की दो तरह की सोच

  1. एनालिटिकल सोच – तर्क, आंकड़े और प्लानिंग पर आधारित।
  2. इनट्यूटिव सोच – भावनाओं, अनुभव और बड़ी तस्वीर को समझने में मदद करती है।

उदाहरण:

  • घर खरीदते समय इनट्यूटिव व्यक्ति जगह का फीलिंग महसूस करता है।
  • एनालिटिकल सोच वाला व्यक्ति बजट, स्कूल और दूरी जैसे फैक्टर्स पर ध्यान देता है।

इनट्यूशन को मजबूत कैसे करें

  • खुद की आवाज़ सुनना और फैसलों पर नियमित रूप से विचार करना।
  • डर और बेचैनी की आवाज़ और शांत, सच्ची आवाज़ में फर्क पहचानना।
  • नियमित अभ्यास, क्रिएटिव एक्टिविटीज़ और तनाव में भी शांत रहना।

अल्बर्ट आइंस्टीन का मानना

इनट्यूशन, पहले के बौद्धिक अनुभवों का नतीजा होती है।

फायदा

  • तेज और सही फैसले लेना।
  • खुद पर भरोसा बढ़ाना।
  • जीवन के हर क्षेत्र में सही मौके पहचानने की क्षमता बढ़ाना।

निष्कर्ष: इनट्यूशन कोई रहस्य नहीं, बल्कि अनुभव, अभ्यास और खुद पर भरोसे से विकसित की जा सकती क्षमता है, जो आपकी जिंदगी और करियर को बदल सकती है।

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